उत्तर भारत में धुंध और प्रदूषण का असर तेज: लाहौर AQI 447, दिल्ली में CPCB ने 332 दर्ज किया
3 नवंबर को लाहौर का AQI 447 और दिल्ली में CPCB का AQI 332 दर्ज हुआ। दिल्ली-NCR में प्रदूषण नियंत्रण के उपाय लागू किए गए।

नई दिल्ली, 3 नवंबर 2026। Delhi Air Quality में सर्दियों से पहले ही गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार दिल्ली का AQI 332 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है। इसी अवधि में पाकिस्तान के लाहौर में IQAir के पैमाने पर AQI 447 दर्ज किया गया। अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़े उनके अपने निगरानी नेटवर्क और गणना पद्धति के अनुसार अलग हो सकते हैं।
Reuters की रिपोर्ट के अनुसार उत्तर भारत और पाकिस्तान के कुछ हिस्सों में मौसमी धुंध और प्रदूषण बढ़ने के पीछे वाहन उत्सर्जन, निर्माण गतिविधियां, फसल अवशेष जलाना और ठंडी हवा में प्रदूषकों का फंसना जैसे कारण शामिल हैं। दिल्ली में प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बीच प्रशासन ने नियंत्रण उपाय लागू किए हैं। दिल्ली-NCR में प्रदूषण कम करने के लिए वाहनों, निर्माण स्थलों और धूल नियंत्रण पर निगरानी बढ़ाई गई है।
Delhi Air Quality खराब होने के पीछे क्या कारण?
दिल्ली और आसपास के इलाकों में सर्दियों की शुरुआत के समय हवा की गति कम होने और तापमान में बदलाव से प्रदूषक जमीन के करीब जमा हो सकते हैं। वाहनों का धुआं, सड़क की धूल, निर्माण कार्य, औद्योगिक उत्सर्जन और कुछ क्षेत्रों में पराली जलाने से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकता है। इन कारणों का योगदान मौसम और स्थान के हिसाब से बदलता रहता है।
Delhi Air Quality का एक ही आंकड़ा पूरे NCR की हवा की स्थिति नहीं बताता। दिल्ली के अलग-अलग निगरानी केंद्रों और नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम तथा फरीदाबाद जैसे शहरों में AQI अलग हो सकता है। लोगों को अपने निकटतम निगरानी केंद्र का नवीनतम डेटा देखना चाहिए। AQI समय के साथ बदलता है, इसलिए सुबह और शाम की रीडिंग में फर्क हो सकता है।
प्रदूषण के दौरान स्वास्थ्य पर क्या असर हो सकता है?
बहुत खराब हवा में मौजूद सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या हृदय रोग से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। आंखों में जलन, खांसी, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। यदि सांस फूलने, सीने में जकड़न या असामान्य तकलीफ हो तो चिकित्सकीय सलाह लें।
Delhi Air Quality बहुत खराब होने पर बाहर लंबे समय तक व्यायाम करने से बचें। जरूरत पड़ने पर अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क उपयोग किया जा सकता है। बच्चों की बाहरी गतिविधियों का समय सीमित करें और स्थानीय प्रशासन या स्कूल की सलाह का पालन करें। दवा या इनहेलर का उपयोग करने वाले मरीज अपने डॉक्टर की बताई योजना जारी रखें और खुद से दवा में बदलाव न करें।
प्रदूषण कम करने के लिए प्रशासन और नागरिक क्या कर सकते हैं?
प्रशासन की ओर से सड़क की मशीन से सफाई, पानी का छिड़काव, निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। नागरिक भी निजी वाहन का कम उपयोग, कार-पूलिंग, कचरा न जलाना और निर्माण सामग्री को ढककर रखने जैसे उपाय अपना सकते हैं। छोटे स्तर के प्रयास अकेले समस्या हल नहीं करते, लेकिन सामूहिक सहयोग से उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है।
Delhi Air Quality की स्थिति में सुधार के लिए प्रदूषण के स्रोतों पर लगातार निगरानी और अलग-अलग राज्यों के बीच समन्वय जरूरी है। मौसम, हवा की दिशा और स्रोतों के योगदान के बारे में वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर ही नीति और नियंत्रण उपाय तय किए जाने चाहिए।
दिल्ली और उत्तर भारत की पिछली रिपोर्ट के लिए 2 नवंबर को GRAP-II लागू होने की खबर भी पढ़ें।
स्रोत: Reuters, 3 नवंबर 2026।
कवर नोट: दिल्ली की धुंध का फाइल फोटो।
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