आगरा के मंदिरों में शीतकालीन सेवा शुरू: मनकामेश्वर बाबा को गर्म पोशाक, भोग में मिल्क केक
आगरा के मनकामेश्वर मंदिर में बाबा को गर्म पोशाक पहनाई जा रही है। मौसम के अनुसार इत्र, भोग और मंदिरों की पूजा-दिनचर्या में बदलाव शुरू हुआ।

आगरा, 3 नवंबर 2026। Agra Mankameshwar Temple में सर्दी की दस्तक के साथ भगवान भोलेनाथ की सेवा और श्रृंगार में मौसमी बदलाव शुरू हो गया है। रावतपाड़ा स्थित प्राचीन मनकामेश्वर महादेव मंदिर में बाबा को गर्म पोशाक पहनाई जा रही है। भोग में मौसम के अनुरूप मिल्क केक अर्पित किया जा रहा है और इत्र में भी बदलाव किया गया है। मंदिर की यह परंपरा श्रद्धालुओं के लिए ऋतु परिवर्तन और विशेष पूजा-सेवा का संकेत है।
अमर उजाला की 3 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि ठंड को देखते हुए बाबा के श्रृंगार और भोग में बदलाव किए जा रहे हैं। गर्म कपड़ों की पोशाक के साथ इत्र में खस की जगह हिना का प्रयोग किया जा रहा है। दीपावली के बाद बाबा को कंबल भी ओढ़ाया जाएगा। मंदिर में होने वाली इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य मौसम के अनुसार ठाकुरजी की सेवा की परंपरा को निभाना है।
Agra Mankameshwar Temple में क्या बदला?
मनकामेश्वर मंदिर में गर्म पोशाक की शुरुआत के साथ भोग की सामग्री भी मौसमी जरूरत के अनुसार रखी जा रही है। रिपोर्ट में मिल्क केक को भोग में शामिल किए जाने का उल्लेख है। इत्र में खस के स्थान पर हिना का उपयोग किया जा रहा है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि ठंड बढ़ने पर कंबल ओढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। पूजा और श्रृंगार से जुड़े इन बदलावों की तारीख मंदिर की व्यवस्था और मौसम के अनुसार तय होती है।
मंदिरों में भगवान को ऋतु के अनुरूप वस्त्र, भोग और शयन व्यवस्था देना उत्तर भारत की कई धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है। गर्मियों में हल्के वस्त्र और ठंड के मौसम में गर्म पोशाक की व्यवस्था की जाती है। इसी तरह भोग में भी मौसम और परंपरा के हिसाब से सामग्री बदली जाती है। श्रद्धालु इन व्यवस्थाओं को केवल सजावट नहीं, बल्कि सेवा और भक्ति की परंपरा के रूप में देखते हैं।
आगरा के अन्य मंदिरों में भी शीतकालीन दिनचर्या
अमर उजाला की रिपोर्ट में मथुराधीश और प्रेम निधि मंदिरों में भी देवउठनी एकादशी से शीतकालीन सेवा शुरू करने की तैयारी का उल्लेख है। प्रेम निधि मंदिर में सुबह की पूजा का समय छह बजे से बढ़ाकर सात बजे और रात के शयन का समय साढ़े नौ बजे से बदलकर नौ बजे करने की जानकारी दी गई। दोपहर में पट बंद होने के समय में भी बदलाव किया जाना है। हर मंदिर की परंपरा और समय-सारणी अलग हो सकती है, इसलिए दर्शन के लिए निकलने से पहले श्रद्धालु संबंधित मंदिर से समय की पुष्टि कर लें।
आगरा में धार्मिक गतिविधियों और मंदिरों की व्यवस्थाओं से जुड़ी अन्य खबरें भी DLP NewsTV पर पढ़ी जा सकती हैं। शहर में प्रशासनिक आदेशों की जानकारी के लिए आगरा में धारा 163 लागू होने की खबर और स्थानीय सुरक्षा अपडेट के लिए विम्स हॉस्पिटल की रसोई में आग की खबर देखें।
दर्शन से पहले समय की पुष्टि करें
मौसम के अनुसार मंदिरों की सेवा और दर्शन के समय में बदलाव होने पर श्रद्धालुओं को पुराने समय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। खासकर सुबह की मंगला आरती, दोपहर में पट बंद होने और रात के शयन समय के बारे में मंदिर प्रशासन से जानकारी लेना उपयोगी रहेगा। त्योहार या विशेष अवसर पर भीड़ बढ़ सकती है, इसलिए बुजुर्गों और बच्चों के साथ आने वाले श्रद्धालु अतिरिक्त समय लेकर पहुंचें और मंदिर परिसर में निर्धारित व्यवस्था का पालन करें।
शीतकालीन सेवा का यह बदलाव आगरा की धार्मिक परंपराओं और मंदिरों की मौसमी दिनचर्या को दर्शाता है। आने वाले दिनों में ठंड बढ़ने के साथ अन्य मंदिरों में भी वस्त्र, भोग और दर्शन-समय से जुड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
स्रोत: अमर उजाला, 3 नवंबर 2026।
कवर नोट: आगरा के मनकामेश्वर मंदिर का फाइल फोटो।
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