KNG-22 चीता मौत मामले में मुरैना के दो भाई गिरफ्तार, STF ने जंगल से बंदूक बरामद की

Morena Cheetah: KNG-22 चीता मामले के संदर्भ में कूनो क्षेत्र का प्रतीकात्मक फोटो
प्रतीकात्मक फाइल फोटो: Free Press Journal

मुरैना/श्योपुर, 3 नवंबर 2026। Morena Cheetah मामले में कूनो क्षेत्र के 19 माह के चीते KNG-22 की मौत की जांच के दौरान मध्य प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने मुरैना जिले के दो भाइयों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक दोनों पर शिकार के दौरान चीते पर गोली चलाने का आरोप है। STF ने कथित तौर पर इस्तेमाल की गई दो नली वाली बंदूक भी बरामद की है। आरोपियों की पहचान भगवान सिंह और प्रीतम सिंह के रूप में बताई गई है।

इंडियन एक्सप्रेस की 2 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार KNG-22 को 25 अक्टूबर को कूनो राष्ट्रीय उद्यान के बाहर मुरैना के वन क्षेत्र में घायल अवस्था में पाया गया था। उसे पहले कूनो लाया गया और बाद में बेहतर उपचार के लिए जबलपुर भेजा गया। 27 अक्टूबर की सुबह इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। सर्जरी के दौरान उसके शरीर से पांच छर्रे निकाले जाने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई।

Morena Cheetah मामले में STF की जांच

जांच एजेंसी के अनुसार आरोपियों से पूछताछ के बाद हथियार की बरामदगी की गई। रिपोर्ट में बताया गया कि घटना कथित तौर पर पड़ोसी श्योपुर जिले के विजयपुर क्षेत्र में नितनवास गांव के पास जंगल में शिकार के दौरान हुई। STF ने कहा कि दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया की गई। मामले में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि गिरफ्तारी का अर्थ दोष सिद्ध होना नहीं है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोप अदालत में साक्ष्य और सुनवाई के बाद ही साबित या खारिज होंगे। इसलिए Morena Cheetah मामले की खबर में उन्हें आरोपी के रूप में ही संबोधित किया जाना चाहिए। जांच एजेंसी की ओर से सामने आई जानकारी और न्यायालय की आगे की प्रक्रिया इस मामले की स्थिति स्पष्ट करेगी।

कूनो में चीता संरक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में चीता पुनर्वास कार्यक्रम का उद्देश्य देश में इस प्रजाति की आबादी को फिर से स्थापित करना और उसके लिए सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार करना है। इसके लिए संरक्षित क्षेत्र, निगरानी, स्वास्थ्य जांच, रेडियो कॉलर, पशु चिकित्सक और वन विभाग की टीमों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। राष्ट्रीय उद्यान के बाहर वन्यजीवों की आवाजाही होने पर स्थानीय समुदायों का सहयोग और वन विभाग की सतर्कता भी जरूरी हो जाती है।

जंगल या संरक्षित क्षेत्र के आसपास अवैध शिकार वन्यजीवों के संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती है। ग्रामीणों को किसी घायल वन्यजीव या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर स्वयं पास जाने के बजाय वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। वन्यजीवों को भोजन देना, उनका पीछा करना या फोटो लेने के लिए उनके करीब जाना भी जोखिम पैदा कर सकता है।

आगे की कार्रवाई पर नजर

Morena Cheetah मामले में जांच एजेंसी ने अब तक जो तथ्य साझा किए हैं, वे शुरुआती जांच का हिस्सा हैं। अदालत में पेश दस्तावेज, फॉरेंसिक जांच और गवाहों के बयान आगे की प्रक्रिया में अहम होंगे। वन विभाग और STF की ओर से आने वाली आधिकारिक जानकारी के बाद खबर में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे।

कूनो और मुरैना की अन्य खबरों के लिए मुरैना डायल 112 की खबर भी पढ़ें।

स्रोत: The Indian Express, 2 नवंबर 2026।

कवर नोट: चीते का प्रतीकात्मक फाइल फोटो; यह KNG-22 की वास्तविक तस्वीर नहीं है।


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