
1 शानदार पहल: शिकोहाबाद NH-19 अंडरपास का भीषण भूमि विवाद सुलझा, प्रशासन की मध्यस्थता से किसानों और NHAI के बीच बनी सुखद सहमति
dlpnewstv.com विशेष विकास रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जनपद के शिकोहाबाद क्षेत्र से विकास और किसान हितों को लेकर एक बेहद शानदार और सकारात्मक खबर सामने आई है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 19 (NH-19) पर चल रहे अंडरपास निर्माण को लेकर पिछले कई दिनों से किसानों और राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के बीच जो भीषण तनातनी चल रही थी, वह अब पूरी तरह से समाप्त हो गई है।
किसानों ने आरोप लगाया था कि निर्माण कंपनियां उनकी अधिग्रहित जमीन से अधिक भूमि पर जबरन कब्जा कर रही हैं। इस खौफनाक आरोप के बाद किसान यूनियन ने एक बड़े और उग्र आंदोलन की चेतावनी दे दी थी, जिससे हाईवे का काम ठप होने की कगार पर पहुंच गया था।
लेकिन स्थानीय प्रशासन की सूझबूझ और समय रहते किए गए अहम हस्तक्षेप ने स्थिति को बिगड़ने से बचा लिया। प्रशासन, NHAI के अधिकारियों और किसान प्रतिनिधियों के बीच हुई मैराथन वार्ता पूरी तरह से सफल रही। इस सुखद समझौते के बाद अब हाईवे का काम बिना किसी बाधा के सुचारू रूप से शुरू हो गया है।
- शिकोहाबाद में NH-19 पर अंडरपास निर्माण को लेकर पनपा भीषण भूमि विवाद सुलझा।
- किसानों का आरोप था कि NHAI की कंपनियां उनकी अतिरिक्त जमीन पर कर रही हैं खौफनाक कब्जा।
- भारतीय किसान यूनियन (Bhakiyu) ने दी थी हाईवे का काम रोककर उग्र आंदोलन की चेतावनी।
- प्रशासन की मध्यस्थता में NHAI अधिकारियों और किसानों के बीच हुई शानदार वार्ता।
- जमीन की सटीक पैमाइश (Measurement) के लिए लेखपाल शिवांशु मिश्रा को किया गया नियुक्त।
- अतिरिक्त जमीन जाने पर मिलेगा उचित मुआवजा; आर्बिट्रेशन के मामले भी होंगे जारी।
- सहमति के बाद किसानों का आंदोलन टला, हाईवे का निर्माण कार्य सुखद रूप से जारी।
विवाद की जड़: NH-19 पर अंडरपास और अतिरिक्त जमीन का मुद्दा
फिरोजाबाद और शिकोहाबाद के बीच से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (पूर्व में NH-2) उत्तर प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। इस हाईवे पर यातायात का भारी दबाव रहता है। स्थानीय ग्रामीणों और वाहनों को सुरक्षित सड़क पार कराने के लिए शिकोहाबाद के पास एक बड़े अंडरपास (Underpass) का निर्माण कार्य चल रहा है।
यह प्रोजेक्ट क्षेत्र के विकास के लिए एक शानदार कदम है, लेकिन इसके निर्माण के दौरान आसपास के किसानों की उपजाऊ जमीनें इसके दायरे में आ रही हैं। विवाद की शुरुआत तब हुई जब ठेकेदार कंपनियों ने अंडरपास की सर्विस रोड और ढलान (Slope) बनाने के लिए चिन्हित जमीन से बाहर जाकर खुदाई शुरू कर दी।
किसानों ने जब अपनी आंखों के सामने अपनी खड़ी फसल और पुश्तैनी जमीन को मशीनों से उजड़ते देखा, तो उनमें भीषण आक्रोश फैल गया। किसानों का सीधा आरोप था कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने कागजों में जितनी जमीन का अधिग्रहण (Land Acquisition) किया है और जितने का मुआवजा दिया है, कंपनियां उससे कहीं अधिक जमीन पर खौफनाक तरीके से कब्जा कर रही हैं।
किसानों के लिए उनकी जमीन ही उनके जीवन का एकमात्र सहारा होती है। ऐसे में बिना उचित मुआवजे के एक इंच जमीन देना भी उनके लिए एक दर्दनाक त्रासदी से कम नहीं है। इसी बात को लेकर स्थानीय किसानों ने निर्माण कार्य रुकवा दिया था।
किसान यूनियन की एंट्री और उग्र आंदोलन की खौफनाक चेतावनी
जब पीड़ित किसानों की आवाज NHAI के ठेकेदारों ने नहीं सुनी, तो यह मामला किसान संगठनों तक पहुंच गया। भारतीय किसान यूनियन और अन्य स्थानीय किसान नेताओं ने इस मुद्दे को गंभीरता से लिया। वे भारी संख्या में अंडरपास निर्माण स्थल पर पहुंच गए और वहां धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया।
किसान नेताओं ने प्रशासन और NHAI को एक खौफनाक अल्टीमेटम दे दिया था। उनकी चेतावनी थी कि यदि किसानों की अतिरिक्त जमीन का उचित मुआवजा तय नहीं किया गया और अवैध कब्जा नहीं रोका गया, तो वे राष्ट्रीय राजमार्ग 19 को पूरी तरह से जाम कर देंगे।
हाईवे जाम होने का मतलब था उत्तर प्रदेश के सबसे व्यस्त मार्ग पर भीषण हाहाकार मचना। दिल्ली से लेकर कानपुर और कोलकाता तक जाने वाला सारा ट्रैफिक शिकोहाबाद में रुक जाता। इस चेतावनी ने जिले के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दीं।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए फिरोजाबाद के जिलाधिकारी (DM) और शिकोहाबाद के उपजिलाधिकारी (SDM) ने तुरंत मामले का संज्ञान लिया और टकराव टालने के लिए एक शानदार रणनीति तैयार की।
प्रशासन का हस्तक्षेप: NHAI और किसानों के बीच सफल वार्ता
आंदोलन की आंच को शांत करने के लिए प्रशासन ने एक अहम बैठक बुलाई। इस बैठक में उपजिलाधिकारी की मौजूदगी में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर, निर्माण कंपनी के प्रतिनिधि, राजस्व विभाग के अधिकारी और किसान यूनियन के प्रमुख नेता आमने-सामने बैठे।
शुरुआत में दोनों पक्षों के बीच काफी तीखी बहस हुई। किसानों ने अपने नक्शे और खतौनी (Land Records) मेज पर रख दिए और दावा किया कि हाईवे की निर्धारित सीमा से 10-15 फीट अतिरिक्त जमीन खोदी जा रही है। वहीं, NHAI के अधिकारियों का तर्क था कि अंडरपास की मजबूती और सर्विस रोड की चौड़ाई के लिए तकनीकी रूप से इतनी जगह आवश्यक है।
प्रशासन ने मध्यस्थ (Mediator) की शानदार भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों को शांत किया। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि विकास कार्य रुकने नहीं चाहिए, लेकिन किसी भी किसान की एक इंच जमीन भी बिना मुआवजे के नहीं ली जाएगी।
कई घंटों की इस मैराथन बैठक के बाद अंततः एक सुखद समाधान निकल आया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे की मजबूरियों को समझा और लिखित समझौते पर सहमति जताई।
लेखपाल शिवांशु मिश्रा की नियुक्ति: पारदर्शी पैमाइश का आदेश
समझौते के सबसे अहम बिंदु के तहत यह तय हुआ कि जमीन की सीमा का निर्धारण हवा-हवाई दावों पर नहीं, बल्कि सरकारी नक्शे और फीते से होगा। इस संवेदनशील कार्य को पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न कराने के लिए प्रशासन ने हल्का लेखपाल (Revenue Officer) शिवांशु मिश्रा को विशेष रूप से नियुक्त किया है।
लेखपाल शिवांशु मिश्रा को निर्देश दिए गए हैं कि वे NHAI के इंजीनियरों और संबंधित किसानों की मौजूदगी में पूरी अधिग्रहित जमीन की सटीक पैमाइश (Measurement) करें। जहाँ-जहाँ भी NHAI द्वारा किसानों की अतिरिक्त भूमि का उपयोग किया गया है या किया जाना है, उसकी पूरी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
इस फैसले से किसानों के भीतर का वह खौफनाक डर खत्म हो गया कि उनकी जमीन मुफ्त में छिन जाएगी। किसानों ने प्रशासन की इस निष्पक्ष कार्यप्रणाली पर सुखद संतोष व्यक्त किया है। अब पैमाइश का कार्य प्रतिदिन चल रहा है और लाल झंडियों से नई सीमाएं तय की जा रही हैं।
जब नेशनल हाईवे अथॉरिटी (NHAI) सड़क बनाने के लिए जमीन का अधिग्रहण करती है, तो वह सर्किल रेट के अनुसार मुआवजा तय करती है। यदि किसान इस मुआवजे की राशि से असंतुष्ट होता है, तो वह आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता न्यायालय) में अपील कर सकता है। जिले के डीएम आमतौर पर आर्बिट्रेटर (Arbitrator) होते हैं। आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया में किसान अपनी जमीन की व्यावसायिक या बाजार कीमत (Market Value) का प्रमाण देकर बढ़ा हुआ मुआवजा (Enhanced Compensation) मांग सकते हैं। यह एक लंबी लेकिन न्यायपूर्ण प्रक्रिया है, जो किसानों के हकों की रक्षा करती है।
आर्बिट्रेशन के मामलों पर NHAI का अहम आश्वासन
वार्ता के दौरान एक और बड़ा पेंच उन किसानों का था, जिनके मुआवजे के मामले पहले से ही आर्बिट्रेशन (Arbitration) में चल रहे हैं। कई किसानों ने शुरूआती मुआवजे को कम बताते हुए कोर्ट या जिलाधिकारी के यहाँ अपील कर रखी थी।
NHAI के उच्चाधिकारियों ने किसानों को आश्वस्त किया है कि जिनकी जमीन हाईवे के इस नए अलाइनमेंट या अंडरपास में जा रही है, और जो लोग आर्बिट्रेशन में गए हैं, उनकी कानूनी कार्यवाही पर कोई रोक नहीं लगेगी।
अधिकारियों ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिन किसानों के मामले आर्बिट्रेशन में हैं, उन्हें अपनी पहली आर्बिट्रेशन में ही कार्यवाही जारी रखने का अधिकार है। जो भी अतिरिक्त जमीन इस अंडरपास में नापी जाएगी, उसका मुआवजा भी उसी बढ़ी हुई दर के अनुसार आर्बिट्रेशन कोर्ट के फैसले के बाद जोड़कर दे दिया जाएगा।
इस सुखद आश्वासन के बाद किसानों का वह भीषण गुस्सा शांत हो गया, जो उन्हें लग रहा था कि NHAI उनका पैसा हड़प लेगी। अधिकारियों ने कहा कि विकास के नाम पर किसी भी किसान को आर्थिक रूप से रुलाया नहीं जाएगा।
शिकोहाबाद के लिए अंडरपास का सुखद महत्व
NH-19 पर बन रहा यह अंडरपास शिकोहाबाद की जनता के लिए एक बड़ी संजीवनी साबित होने वाला है। पिछले कई सालों से हाईवे पार करते समय इस कट पर खौफनाक सड़क हादसे होते रहे हैं, जिनमें कई निर्दोष लोगों ने अपनी जान गंवाई है।
भारी वाहनों की तेज रफ्तार के बीच से ट्रैक्टर-ट्रॉली, स्कूल बसें और दोपहिया वाहनों का गुजरना किसी भीषण खतरे से कम नहीं था। इस अंडरपास के बनने से न केवल स्थानीय ट्रैफिक सुगम हो जाएगा, बल्कि हाईवे का ट्रैफिक भी बिना रुके (Signal-free) फर्राटे भर सकेगा।
किसानों ने भी यह बात मानी कि यह अंडरपास उनके और उनके बच्चों की सुरक्षा के लिए ही बनाया जा रहा है। वे विकास के विरोधी नहीं हैं, बस उन्हें अपनी छीनी जा रही पुश्तैनी जमीन का वाजिब हक चाहिए था। प्रशासन की इस शानदार पहल ने विकास और किसान हित के बीच एक बेहतरीन संतुलन स्थापित कर दिया है।
निष्कर्ष: टला खौफनाक आंदोलन, हाईवे का काम फुल स्पीड में
अंततः, संवाद और सही नीयत से बड़े से बड़ा भीषण विवाद भी सुलझाया जा सकता है, यह बात फिरोजाबाद प्रशासन ने साबित कर दी है। यदि यह विवाद नहीं सुलझता, तो हाईवे का काम महीनों तक लटक सकता था और निर्माण की लागत कई गुना बढ़ जाती।
वर्तमान में, अंडरपास साइट पर भारी मशीनें और मजदूर वापस लौट आए हैं। मिट्टी की खुदाई, पिलर निर्माण और कंक्रीट का काम सुखद रूप से और फुल स्पीड में चल रहा है। किसान भी अब संतुष्ट हैं कि लेखपाल की पैमाइश के बाद उनका पैसा उनके बैंक खातों में आ जाएगा।
dlpnewstv.com इस शानदार समाधान के लिए प्रशासन, NHAI और संयम दिखाने वाले किसानों की सराहना करता है। उम्मीद है कि यह अंडरपास जल्द ही बनकर तैयार होगा और शिकोहाबाद की जनता को जाम और हादसों से हमेशा के लिए सुखद मुक्ति मिलेगी।
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