
1 बड़ी जनसमस्या: बाड़ी में बिना ट्रैफिक इंचार्ज के यातायात व्यवस्था का खौफनाक पतन, भीषण जाम में उबल रही जनता, SP ने दिया सुखद आश्वासन
1 बड़ी जनसमस्या: बाड़ी में बिना ट्रैफिक इंचार्ज के यातायात व्यवस्था का खौफनाक पतन, भीषण जाम में उबल रही जनता, SP ने दिया सुखद आश्वासन
dlpnewstv.com लोकल न्यूज़ डेस्क: राजस्थान के धौलपुर जिले का प्रमुख व्यावसायिक उपखंड बाड़ी इन दिनों एक अत्यंत गंभीर और भीषण समस्या से जूझ रहा है। विकास की दौड़ में शहर की आबादी और वाहनों की संख्या तो बेतहाशा बढ़ गई है, लेकिन शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से भगवान भरोसे चल रही है।
पिछले एक महीने से बाड़ी शहर में ‘ट्रैफिक इंचार्ज’ (Traffic Incharge) का सबसे महत्वपूर्ण पद रिक्त पड़ा हुआ है। इस प्रशासनिक रिक्ति का सीधा और दर्दनाक असर शहर की सड़कों पर देखने को मिल रहा है। यातायात पुलिस के नियंत्रण के अभाव में शहर की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है और हर तरफ केवल अराजकता (Chaos) का माहौल है।
चिलचिलाती धूप और आसमान से बरसती भीषण गर्मी के बीच जब लोग अपने घरों से बाहर निकलते हैं, तो उन्हें घंटों तक लंबे और उबाऊ ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है। दोपहिया वाहन चालक हों या पैदल चलने वाले राहगीर, हर कोई इस खौफनाक ट्रैफिक जाम में उबलने को मजबूर है।
- बाड़ी शहर में पिछले एक महीने से ‘ट्रैफिक इंचार्ज’ का पद रिक्त, व्यवस्था का हुआ भीषण पतन।
- भीषण गर्मी में घंटों जाम में फंसकर दर्दनाक परेशानी झेल रही है आम जनता।
- रेलवे फाटक, भारद्वाज मार्केट, बसेड़ी रोड और अंबेडकर सर्किल बने जाम के खौफनाक हॉटस्पॉट।
- शादी-विवाह (सावों) के सीजन ने शहर की सड़कों पर बढ़ाया वाहनों का अत्यधिक दबाव।
- दुकानदारों का सड़कों पर अवैध अतिक्रमण और बेतरतीब खड़े ठेले बने जाम का मुख्य कारण।
- वरिष्ठ नागरिक बृजमोहन गर्ग ने उठाई निष्पक्ष संयुक्त कार्रवाई की बड़ी मांग।
- एसपी विकास सांगवान का सुखद आश्वासन: 1-2 दिन में होगी नए ट्रैफिक इंचार्ज की नियुक्ति।
इन प्रमुख इलाकों में लगता है खौफनाक जाम: राहगीरों का निकलना हुआ मुहाल
बाड़ी शहर की भौगोलिक बनावट और पुरानी बसावट के कारण यहाँ की सड़कें पहले से ही काफी संकरी हैं। ऐसे में ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने के लिए पुलिस की सक्रिय उपस्थिति बहुत जरूरी है। लेकिन वर्तमान में शहर के प्रमुख चौराहे और बाजार भीषण जाम के ‘हॉटस्पॉट’ (Hotspots) बन चुके हैं।
सबसे दर्दनाक स्थिति शहर के रेलवे फाटक इलाके की है। जब भी कोई ट्रेन गुजरती है और फाटक बंद होता है, तो दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। फाटक खुलने के बाद लोग एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में अपने वाहन बेतरतीब ढंग से फंसा देते हैं, जिससे घंटों तक ट्रैफिक रेंग-रेंग कर चलता है।
इसके अलावा, शहर का हृदय स्थल माने जाने वाला अंबेडकर सर्किल भी इस अराजकता का शिकार है। यहाँ से चारों दिशाओं (धौलपुर, बसेड़ी, सैपऊ और सरमथुरा) का ट्रैफिक गुजरता है। ट्रैफिक पुलिस के न होने से यहाँ कोई नियम नहीं मानता। लोग गलत दिशा (Wrong side) से वाहन घुसा देते हैं, जिससे खौफनाक दुर्घटनाओं का अंदेशा हर पल बना रहता है।
व्यावसायिक क्षेत्रों की बात करें तो भारद्वाज मार्केट, सीताराम बाजार, बसेड़ी रोड और सैपऊ रोड पर दिन भर जाम लगा रहता है। इन बाजारों में खरीदारी करने आने वाले लोग अपनी मोटरसाइकिलें और कारें बीच सड़क पर ही खड़ी कर देते हैं, जिससे पीछे से आने वाले ट्रैफिक के लिए रास्ता ही नहीं बचता।
शादी-विवाह का सीजन: भीषण जाम में कोढ़ में खाज का काम
मई-जून का महीना वैसे भी ‘सावों’ (शादी-विवाह के मुहूर्तों) का समय होता है। इस समय ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, बसों और निजी कारों में भरकर खरीदारी करने बाड़ी शहर आते हैं।
ग्रामीण वाहनों के अचानक शहर में प्रवेश करने से सड़कों पर अत्यधिक दबाव बढ़ गया है। इसके अलावा, रात के समय बारात निकासी और बैंड-बाजे के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह से ब्लॉक (Block) हो जाते हैं।
यातायात को डायवर्ट (Divert) करने या सुचारू रूप से निकालने के लिए कोई ‘ट्रैफिक इंचार्ज’ मौजूद नहीं है। एक-दो कांस्टेबल जो चौराहों पर खड़े होते हैं, वे इतने भीषण जनसैलाब और वाहनों की भीड़ को नियंत्रित करने में खुद को असहाय महसूस करते हैं। शादी के इस सीजन ने शहर की ट्रैफिक समस्या को ‘कोढ़ में खाज’ बना दिया है।
अतिक्रमण का खौफनाक जाल: सिकुड़ती सड़कें, बढ़ती परेशानी
ट्रैफिक जाम का एकमात्र कारण पुलिस की अनुपस्थिति नहीं है। बाड़ी शहर में अवैध अतिक्रमण (Illegal Encroachment) एक बहुत बड़ी और पुरानी बीमारी है। शहर के वरिष्ठ और प्रबुद्ध नागरिक बृजमोहन गर्ग ने इस दर्दनाक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रशासन को आईना दिखाया है।
वरिष्ठ नागरिक बृजमोहन गर्ग ने बताया कि बाड़ी शहर की मुख्य सड़कें और बाजार लगातार सिकुड़ते जा रहे हैं। इसका कारण यह है कि दुकानदारों ने अपनी दुकानों की सीमा से कई फीट आगे तक खौफनाक कब्जा कर रखा है।
दुकानदार अपना सामान, काउंटर, और विज्ञापन के बोर्ड सड़क के बीचों-बीच रख देते हैं। इसके बाद ग्राहक अपनी मोटरसाइकिलें उस सामान के आगे खड़ी कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि 30 फीट चौड़ी सड़क मात्र 10 फीट की संकरी गली में बदल जाती है।
गर्ग जी ने बताया कि जब इस सिकुड़ी हुई सड़क पर दो चौपहिया वाहन (Cars/SUVs) आमने-सामने आ जाते हैं, तो वे एक-दूसरे को क्रॉस (Cross) नहीं कर पाते। कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं होता, और पल भर में ही वाहनों की लंबी और उबाऊ कतारें लग जाती हैं।
सीताराम बाजार और मदरसा चौराहे का दर्दनाक हाल: ठेलों का कब्जा
बृजमोहन गर्ग के अनुसार, शहर के सबसे पुराने और व्यस्त सीताराम बाजार तथा मुख्य मदरसा चौराहे की स्थिति सबसे अधिक खराब और भयावह है।
यहाँ सड़कों के दोनों किनारों पर फल, सब्जी, और फास्ट-फूड बेचने वाले ठेल-ढकेल (Handcarts) वालों ने स्थायी रूप से अपना अवैध कब्जा जमा लिया है। ये ठेले वाले सड़क के बिल्कुल बीच में खड़े होकर अपना व्यापार करते हैं, जिससे पैदल चलने वालों तक को निकलने की जगह नहीं मिलती।
मदरसा चौराहे से गुजरने वाली महिलाओं और स्कूल जाने वाले बच्चों को इस भीषण भीड़ के बीच से धक्के खाकर निकलना पड़ता है। कई बार ई-रिक्शा (E-Rickshaw) और ऑटो चालक भी सवारियों के चक्कर में इन्हीं चौराहों पर आड़ी-तिरछी गाड़ियां खड़ी कर देते हैं। इस पूरी व्यवस्था को सुधारने वाला कोई प्रशासनिक अधिकारी मैदान में नजर नहीं आता।
संयुक्त कार्रवाई की मांग: नगर पालिका, प्रशासन और पुलिस आएं साथ
इस गंभीर समस्या का समाधान केवल एक ट्रैफिक इंचार्ज की नियुक्ति भर से नहीं हो सकता। वरिष्ठ नागरिकों और शहर के प्रबुद्ध जनों का मानना है कि बाड़ी को जाम मुक्त बनाने के लिए एक बड़ी और संयुक्त रणनीति की आवश्यकता है।
बृजमोहन गर्ग ने एक बहुत ही शानदार सुझाव देते हुए कहा है कि बाड़ी नगर पालिका (Nagar Palika), स्थानीय उपखंड प्रशासन (SDM/Tehsildar) और बाड़ी पुलिस को मिलकर एक ‘संयुक्त निष्पक्ष कार्रवाई’ (Joint Task Force Action) करनी चाहिए।
जब तक नगर पालिका का ‘पीला पंजा’ (JCB) सड़कों पर फैले अवैध अतिक्रमण को नहीं हटाएगा, तब तक पुलिस ट्रैफिक को सुचारू नहीं कर सकती। प्रशासन को चाहिए कि वह ठेले वालों के लिए एक अलग ‘वेंडिंग जोन’ (Vending Zone) निर्धारित करे ताकि वे अपना रोजगार भी चला सकें और शहर का यातायात भी प्रभावित न हो।
इसके साथ ही, दुकानदारों को सख्त हिदायत दी जानी चाहिए कि यदि उनका सामान सफेद पट्टी (White Line) से बाहर मिला, तो उन पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
एसपी विकास सांगवान का सुखद आश्वासन: 1-2 दिन में मिलेगी राहत
बाड़ी शहर की इस खौफनाक ट्रैफिक व्यवस्था और जनता के बढ़ते आक्रोश का मामला जब धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) विकास सांगवान तक पहुंचा, तो उन्होंने इसे बेहद गंभीरता से लिया।
एसपी विकास सांगवान एक तेज-तर्रार और जनहित में त्वरित फैसले लेने वाले अधिकारी माने जाते हैं। उन्होंने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए बाड़ी की जनता को एक सुखद और बड़ा आश्वासन दिया है।
एसपी सांगवान ने मीडिया को बताया कि, “बाड़ी शहर में ट्रैफिक इंचार्ज का पद रिक्त होने की जानकारी पुलिस मुख्यालय के संज्ञान में है। मैं शहरवासियों को आश्वस्त करता हूं कि जल्द ही, महज एक से दो दिन के भीतर, बाड़ी शहर में एक अनुभवी और सख्त ‘ट्रैफिक इंचार्ज’ की स्थायी नियुक्ति कर दी जाएगी।”
उन्होंने आगे उम्मीद जताई कि नए ट्रैफिक इंचार्ज के पदभार ग्रहण करते ही शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पर्याप्त पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। नो-पार्किंग में खड़े वाहनों के चालान काटे जाएंगे और बेतरतीब ट्रैफिक को नियंत्रित किया जाएगा। एसपी के इस बयान के बाद शहरवासियों ने राहत की सांस ली है।
नया मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) सड़क सुरक्षा को लेकर बेहद सख्त है। गलत दिशा (Wrong side) में वाहन चलाना, नो-पार्किंग जोन में गाड़ी खड़ी करके यातायात को बाधित करना, और बिना हेलमेट या सीट बेल्ट के वाहन चलाना खौफनाक अपराध की श्रेणी में आते हैं। ऐसे अपराधों के लिए भारी जुर्माने (Challan) का प्रावधान है। यदि नए ट्रैफिक इंचार्ज ने बाड़ी में इन नियमों को सख्ती से लागू कर दिया, तो शहर का ट्रैफिक अपने आप पटरी पर आ जाएगा।
निष्कर्ष: जनता की जागरूकता भी है अहम
बाड़ी शहर की ट्रैफिक समस्या केवल पुलिस के डंडे से हल नहीं हो सकती। इसमें शहर के प्रत्येक नागरिक की शानदार भागीदारी और जागरूकता की भी सख्त आवश्यकता है।
जब तक हम खुद यह नहीं समझेंगे कि हमारी गाड़ी गलत जगह खड़ी करने से पीछे एंबुलेंस में फंसी किसी की जान जा सकती है, तब तक कोई भी व्यवस्था सुखद परिणाम नहीं दे सकती।
उम्मीद की जानी चाहिए कि एसपी विकास सांगवान के निर्देशानुसार नए ट्रैफिक इंचार्ज के आने के बाद बाड़ी की सड़कों पर अराजकता खत्म होगी और जनता को इस भीषण गर्मी के जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिलेगी।
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