
1 बड़ा स्वास्थ्य अभियान: फ़िरोज़ाबाद के नगला जोरे में ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ पर उठी आवाज़, भारत में हर साल 13 लाख मौतों का डरावना सच आया सामने
dlpnewstv.com हेल्थ एवं लोकल न्यूज़ डेस्क: उत्तर प्रदेश के फ़िरोज़ाबाद जिले में विश्व तम्बाकू निषेध दिवस (World No Tobacco Day) के अवसर पर एक बेहतरीन और सराहनीय पहल देखने को मिली। पर्यावरण मित्र संस्था द्वारा जिले के नगला जोरे गांव में एक विशाल जन-जागरूकता अभियान चलाया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचल की भोली-भाली जनता और विशेषकर भटके हुए युवाओं को तम्बाकू, गुटखा और धूम्रपान जैसे जानलेवा व्यसनों के खौफनाक दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करना था।
इस अहम कार्यक्रम में न केवल बीमारियों और मौतों के डरावने आंकड़े पेश किए गए, बल्कि तम्बाकू की लत छोड़ने के लिए ग्रामीणों को मानसिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाने की रणनीति भी तैयार की गई। कार्यक्रम में गांव स्तर पर एक विशेष समिति के गठन का भी लक्ष्य रखा गया, जो नशा छोड़ने के इच्छुक लोगों की सीधी मदद करेगी।
- फ़िरोज़ाबाद के नगला जोरे गांव में पर्यावरण मित्र संस्था ने चलाया विशेष अभियान।
- संस्था की अध्यक्ष किरण बजाज के नेतृत्व में युवाओं को किया गया जागरूक।
- दुनिया में हर साल 80 लाख लोग तम्बाकू के कारण अपनी जान गंवाते हैं।
- भारत में तम्बाकू सेवन से प्रतिवर्ष लगभग 13 लाख मौतें होती हैं।
- परोक्ष धूम्रपान (Passive Smoking) से वैश्विक स्तर पर 10 लाख निर्दोष लोग मारे जाते हैं।
- नशा छोड़ने के लिए ग्रामीणों को भजन, ध्यान और उल्टी गिनती जैसे उपाय सुझाए गए।
80 लाख मौतें और पैसिव स्मोकिंग का खौफनाक सच
जागरूकता कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पर्यावरण मित्र संस्था के वरिष्ठ समन्वयक दीपक ओहरी ने बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक आंकड़े पेश किए। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में हर साल लगभग 80 लाख लोग तम्बाकू के सीधे सेवन के कारण मौत के मुंह में समा जाते हैं।
इससे भी ज्यादा दर्दनाक सच्चाई यह है कि इनमें से करीब 10 लाख लोग ऐसे होते हैं जो खुद बीड़ी-सिगरेट नहीं पीते, बल्कि दूसरों द्वारा छोड़े गए धुएं (Passive Smoking) का शिकार होकर कैंसर और सांस की गंभीर बीमारियों से अपनी जान गंवा देते हैं। भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए ओहरी ने कहा कि हमारे देश में भी हर साल लगभग 13 लाख मौतें केवल तम्बाकू और गुटखा के सेवन से हो रही हैं, जो समाज के लिए एक बड़ा ‘रेड अलर्ट’ है।
युवाओं से खास अपील: गलत संगति छोड़ें, मानसिक बल बढ़ाएं
दीपक ओहरी ने इस स्थिति को बेहद गंभीर बताते हुए पूरे समाज से तम्बाकू रूपी इस दानव के खिलाफ एकजुट होकर जंग छेड़ने का आह्वान किया। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से भावुक अपील की कि वे ऐसे ‘मित्रों’ की संगति से दूर रहें जो उन्हें सिगरेट, बीड़ी या गुटखा खाने के लिए उकसाते हैं।
तम्बाकू की भयंकर लत को छोड़ने के लिए कुछ बहुत ही आसान और असरदार मनोवैज्ञानिक (Psychological) उपाय भी बताए गए। ग्रामीणों को सलाह दी गई कि जब भी नशा करने की तीव्र इच्छा (Craving) हो, तो वे अपना ध्यान बंटाने के लिए भगवान के भजन सुनें, एकांत में ध्यान (Meditation) लगाएं, या फिर 100 से 1 तक उल्टी गिनती (Reverse Counting) गिनना शुरू कर दें। इन उपायों से मन पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
ग्राम समिति ने ली नशा मुक्ति की जिम्मेदारी
संस्था के आह्वान पर नगला जोरे में एक ग्राम समिति का गठन किया गया है। ओहरी ने इस नवगठित ग्राम समिति से अपील की कि वे गांव में एक ऐसा माहौल बनाएं जहां तम्बाकू छोड़ने के इच्छुक लोगों की न केवल शारीरिक, बल्कि मानसिक (Mental Support) रूप से भी पूरी मदद की जाए।
इस सफल और प्रेरणादायक कार्यक्रम में गांव के तमाम सम्मानित लोग, जिनमें श्यामबाबू, अनेक सिंह, राजपाल सिंह, सोपाली, मोहन यादव, रामदास और भूरे यादव सहित कई ग्रामीण उपस्थित रहे। अंत में, ग्राम समिति के सदस्यों ने पर्यावरण मित्र संस्था की अध्यक्ष किरण बजाज द्वारा चलाए जा रहे इन जनहितकारी और निस्वार्थ अभियानों की भूरि-भूरि प्रशंसा की। कार्यक्रम का विधिवत समापन और सभी का धन्यवाद ज्ञापन मोहित जादौन तथा ग्राम समिति अध्यक्ष विवेक यादव ने संयुक्त रूप से किया।
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1 बड़ा स्वास्थ्य अभियान: फ़िरोज़ाबाद के नगला जोरे में ‘विश्व तम्बाकू निषेध दिवस’ पर उठी आवाज़, भारत में हर साल 13 लाख मौतों का डरावना सच आया सामने




