चंबल अभयारण्य निगरानी और अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) ने कई गंभीर कमियों की ओर ध्यान दिलाया है। 4 नवंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय चंबल वन्यजीव अभयारण्य में कर्मचारियों की कमी, निगरानी उपकरणों के संचालन, विभागों के बीच समन्वय और अवैध खनन पर कार्रवाई को लेकर अभी सुधार की जरूरत है। रिपोर्ट का महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह संरक्षित क्षेत्र राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश—तीनों राज्यों में फैला है। इसमें मुरैना, आगरा और धौलपुर से जुड़े तथ्य भी दर्ज हैं।
आगरा डिवीजन में दो अहम पद खाली
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, CEC ने उत्तर प्रदेश से आगरा डिवीजन में उप वन संरक्षक (DCF) और सहायक वन संरक्षक (ACF) के खाली पद तत्काल भरने की सिफारिश की है। रिपोर्ट में कहा गया कि ये पद कई महीनों से रिक्त थे। आगरा के प्रभागीय वन अधिकारी को DCF का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, जबकि ACF का प्रभार किसी अधिकारी को नहीं सौंपा गया था। समिति का मानना है कि लंबे समय तक प्रमुख पद खाली रहने से अभयारण्य के प्रबंधन और निगरानी पर असर पड़ सकता है।
मध्य प्रदेश में स्टाफ और कैमरों की स्थिति
रिपोर्ट में मध्य प्रदेश के लिए 223 स्वीकृत पदों के मुकाबले 211 कर्मचारियों के काम करने की जानकारी दी गई है। राज्य ने 18 स्थानों पर 42 CCTV कैमरे लगाए हैं। इसके अलावा छह वाहनों के लिए 30 बॉडी कैमरे और 12 डैश कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं। लेकिन वायरलेस संचार प्रणाली अभी निविदा के चरण में बताई गई और प्रस्तावित 16 स्थायी चेकपोस्ट में से कोई भी पूरा नहीं हुआ था।
CEC ने इस बात पर जोर दिया कि केवल उपकरण खरीद लेना या योजना स्वीकृत कर देना पर्याप्त नहीं है। यह देखना जरूरी है कि कैमरे, वाहन उपकरण, संचार प्रणाली और चेकपोस्ट वास्तव में चालू हैं या नहीं और उनसे जमीन पर निगरानी बेहतर हुई है या नहीं। वन्यजीव अभयारण्य में नियमित गश्त, समय पर सूचना साझा करना और अवैध गतिविधियों पर त्वरित कार्रवाई एक-दूसरे से जुड़ी व्यवस्थाएं हैं।
मुरैना में 1,250 वाहन जब्त, लेकिन प्रभाव का आकलन भी जरूरी
रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश ने मुरैना, श्योपुर और भिंड जिलों में अवैध रेत खनन या परिवहन से जुड़े मामलों में 1,250 वाहनों की जब्ती की जानकारी दी। राज्य में 36 निर्मित रेत (M-sand) इकाइयों और मुरैना में 12 लाइसेंस प्राप्त रेत डिपो को मंजूरी दिए जाने का भी उल्लेख है। समिति ने स्पष्ट किया कि मंजूरी की संख्या से यह साबित नहीं होता कि सभी इकाइयां वास्तव में चल रही हैं या नदी की रेत की मांग कम हो गई है।
इसीलिए समिति ने इकाइयों और डिपो की वास्तविक संचालन स्थिति की पुष्टि करने तथा यह जांचने की जरूरत बताई कि वैकल्पिक रेत की उपलब्धता से नदी तल पर दबाव घटा है या नहीं। मुरैना और आसपास के इलाकों में चंबल नदी और उसकी सहायक धाराओं का पारिस्थितिक महत्व है। अवैध खनन से नदी तल, किनारों और जलीय जीवों के आवास पर असर पड़ सकता है।
धौलपुर में वनरक्षक की मौत का संदर्भ
CEC रिपोर्ट में राजस्थान के धौलपुर जिले में जनवरी 2026 में वनरक्षक जितेंद्र सिंह शेखावत की मौत का भी उल्लेख है। रिपोर्ट के अनुसार, झिरी चेकपोस्ट के पास अवैध रूप से खनिज ले जा रही ट्रैक्टर-ट्रॉली से जुड़ी घटना के बाद यह मामला सामने आया था। समिति ने NH-44 पर एक एकीकृत वाहन जांच सुविधा स्थापित करने के प्रस्ताव की जांच करने और अवैध खनिज परिवहन पर मजबूत कार्रवाई की जरूरत बताई है। यह उल्लेख वन विभाग और खनन निगरानी के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
तीनों राज्यों से संयुक्त सत्यापन की मांग
समिति ने केन नदी के जलग्रहण क्षेत्र के 14 स्थानों और स्वीकृत 31 रेत खदानों की संयुक्त जांच की मांग की है। जांच में खदानों की सीमाएं, अनुमतियां और वास्तविक संचालन का मिलान किया जाना है। राज्यों को छह सप्ताह में सत्यापन रिपोर्ट देने और अवैध खनन से जुड़े विभागीय आंकड़ों में अंतर दूर करने को कहा गया है।
चंबल क्षेत्र में संरक्षण का काम केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। पुलिस, खनन विभाग, परिवहन, जिला प्रशासन और स्थानीय समुदायों के बीच समन्वय भी जरूरी है। नदी के किनारे बसे गांवों में लोगों को वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी रखने और अवैध खनन की सूचना सक्षम विभाग को देने के लिए जागरूक करना होगा।
रिपोर्ट के बाद क्या देखना होगा?
CEC की रिपोर्ट में सामने आए आंकड़े निगरानी व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन हैं; इन्हें अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। अब तीनों राज्यों की अनुपालन रिपोर्ट, खाली पदों को भरने की कार्रवाई, चेकपोस्ट और कैमरों की वास्तविक स्थिति तथा खनन पर नियंत्रण के परिणाम महत्वपूर्ण होंगे। समिति ने प्रस्तावित, स्वीकृत, खरीदे गए, लगाए गए और वास्तव में संचालित उपायों के बीच स्पष्ट अंतर बताने को कहा है।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, 4 नवंबर 2026।
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