राजस्थान NCR प्रदूषण नियम के तहत राज्य सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शामिल जिलों में धूल फैलाने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर अस्थायी रोक लगाई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की 4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रतिबंध 5 नवंबर से 20 नवंबर तक लागू रहेगा। इसके साथ ही पांच NCR जिलों में पटाखों के इस्तेमाल को भी सीमित किया गया है। 7 और 8 नवंबर को केवल CSIR-NEERI से प्रमाणित ग्रीन पटाखे तय समय के दौरान चलाने की अनुमति दी गई है।
किन जिलों में लागू हैं पटाखों के नियम?
राज्य सरकार की ओर से बताई गई सूची में अलवर, भरतपुर, डीग, खैरथल-तिजारा और कोटपूतली-बहरोड़ जिले शामिल हैं। इन जिलों में 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 बजे से 7 बजे तक तथा रात 8 बजे से 10 बजे तक ही प्रमाणित ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी गई है। तय समय के बाहर पटाखों का इस्तेमाल प्रतिबंधित बताया गया है। सामान्य पटाखों के बजाय केवल उन ग्रीन पटाखों की अनुमति है जिनके प्रमाणन की शर्त पूरी होती है।
अस्पतालों, नर्सिंग होम, प्राथमिक और जिला स्वास्थ्य केंद्रों, वृद्धाश्रमों तथा शैक्षणिक संस्थानों को साइलेंस और नो-क्रैकर जोन घोषित किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन संस्थानों के 300 मीटर के दायरे में पटाखे चलाने की अनुमति नहीं होगी। यह व्यवस्था मरीजों, बुजुर्गों, बच्चों और पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को शोर तथा धुएं से बचाने के उद्देश्य से लागू की गई है।
5 से 20 नवंबर तक धूल फैलाने वाले कामों पर रोक
राज्य सरकार ने NCR जिलों में धूल उत्पन्न करने वाली निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर 5 नवंबर से 20 नवंबर तक रोक लगाई है। इसमें खुले निर्माण कार्य और तोड़फोड़ जैसी गतिविधियां शामिल हैं, जिनसे हवा में धूल के कण बढ़ सकते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि यह कदम वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुपालन में लिया गया है।
कुछ विशेष परियोजनाओं को छूट दी गई है। इनमें रेलवे, मेट्रो सेवाएं, हवाई अड्डे, अंतरराज्यीय बस टर्मिनल, अस्पताल, जलापूर्ति, स्वच्छता, राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं शामिल हैं। रिपोर्ट के अनुसार, छूट के दायरे में हाईवे, सड़क, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़े कुछ कार्य भी शर्तों के अधीन शामिल हो सकते हैं। इसलिए किसी परियोजना को छूट प्राप्त है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित सरकारी निर्देश से होगा।
सड़कों की धूल और यातायात पर भी निगरानी
मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संबंधित विभागों को प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों से निर्माण और विध्वंस मलबे के प्रबंधन की नियमित निगरानी डैशबोर्ड के माध्यम से करने को कहा गया। सड़क की धूल कम करने के लिए मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों का अधिकतम उपयोग और दो शिफ्ट में संचालन करने के निर्देश भी दिए गए।
सरकार ने प्रमुख सड़कों पर यातायात जाम कम करने और वाहनों की आवाजाही सुचारु बनाने पर भी जोर दिया। पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) प्रणाली लगाने की समीक्षा की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि NCR क्षेत्र में ‘No PUC, No Fuel’ व्यवस्था के तहत वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) नहीं रखने वाले 5,000 से अधिक वाहनों पर कार्रवाई की गई थी।
ग्रीन पटाखे और सामान्य पटाखों में अंतर
ग्रीन पटाखों को निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित किया जाता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उनसे बिल्कुल भी धुआं या शोर नहीं निकलता। इसलिए सरकार ने उनके उपयोग को भी सीमित समय और प्रमाणन की शर्त से जोड़ा है। लोगों को पैकेट पर प्रमाणन संबंधी जानकारी देखनी चाहिए और अप्रमाणित पटाखों को ग्रीन बताकर बेचने वाले दावों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
आवासीय इलाकों में बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों की सुविधा का ध्यान रखना जरूरी है। अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास पटाखे न चलाने का नियम विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। नियमों का उल्लंघन होने पर स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचना दी जा सकती है।
धौलपुर और अन्य जिलों के लिए क्या ध्यान रखें?
ये विशेष प्रतिबंध केवल अधिसूचित NCR जिलों पर लागू बताए गए हैं। धौलपुर या राजस्थान के किसी अन्य जिले में नियम स्वतः लागू मानना सही नहीं होगा, जब तक संबंधित जिला प्रशासन की अलग अधिसूचना ऐसा न कहे। भरतपुर और डीग के निवासियों को अपने जिले में लागू समय, प्रतिबंधित क्षेत्र और प्रमाणन की शर्तों का पालन करना चाहिए। अन्य जिलों के नागरिक स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक सूचना देखें।
निर्माण एजेंसियों, ठेकेदारों और आम नागरिकों को भी यह समझना चाहिए कि धूल नियंत्रण केवल सरकारी प्रतिबंध का विषय नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा मुद्दा है। मलबे को खुले में छोड़ना, बिना ढके निर्माण सामग्री ले जाना और सड़क पर धूल उड़ाना आसपास रहने वाले लोगों को प्रभावित कर सकता है।
स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, 4 नवंबर 2026।
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