
1 बड़ा जनाक्रोश: फिरोजाबाद नगर निगम पर फूटा महिलाओं का खौफनाक गुस्सा, जलभराव और कच्ची गलियों से त्रस्त जनता का अनिश्चितकालीन धरना
dlpnewstv.com लोकल और सिविक न्यूज़ डेस्क: स्मार्ट सिटी और विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद नगर निगम की एक बेहद शर्मनाक और कड़वी सच्चाई सड़क पर आ गई है। शहर के वार्ड नंबर 12 (लक्ष्मी नगर नई आबादी) में नारकीय जीवन जीने को मजबूर स्थानीय महिलाओं और पार्षद के सब्र का बांध आखिरकार टूट गया।
कच्ची गलियों और भीषण जलभराव की समस्या से आजिज आकर बुधवार को दर्जनों महिलाओं ने नगर निगम परिसर में ही डेरा डाल दिया और उग्र धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं का सीधा आरोप है कि नगर निगम के अधिकारी केवल फाइलों में विकास कर रहे हैं, जबकि असलियत में जनता कीड़े-मकौड़ों की तरह जिंदगी गुजार रही है।
आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को खुली चेतावनी दी है कि जब तक उनके मोहल्ले में गलियों का निर्माण और जल निकासी की व्यवस्था शुरू नहीं होती, वे इस धरना स्थल से एक इंच भी नहीं हिलेंगी।
- वार्ड 12, लक्ष्मी नगर नई आबादी की महिलाओं का नगर निगम में भीषण धरना प्रदर्शन।
- गली नंबर 5 और 6 आज भी हैं पूरी तरह से कच्ची, आधे घंटे की बारिश में बन जाती हैं तालाब।
- लगातार 1 साल से नगर निगम के चक्कर काट रही है जनता, मिल रहे हैं सिर्फ झूठे आश्वासन।
- महापौर को शिकायती पत्र देने के बावजूद नहीं हुई कोई सुनवाई, अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप।
- वार्ड में मच्छरों का खौफनाक प्रकोप, फोगिंग मशीन तक उपलब्ध नहीं करा रहा निगम।
- पार्षद मनोज शंखवार का तंज: “पुरस्कारों की आड़ में बुनियादी सुविधाओं का हो रहा है कत्ल।”
आधे घंटे की बारिश और वार्ड 12 बन गया नरक
धरने पर बैठी महिलाओं ने अपनी दर्दनाक पीड़ा बयां करते हुए बताया कि उनके वार्ड की गली नंबर 5 (शेर सिंह के घर से गौरव के घर तक) और गली नंबर 6 (ममता के घर से आजाद के घर तक) आजादी के इतने सालों बाद भी पूरी तरह से कच्ची हैं। इन गलियों में आज तक एक ईंट नहीं लगाई गई है।
उन्होंने बताया कि मंगलवार को शहर में महज आधे घंटे की मामूली बारिश हुई थी, लेकिन इस हल्की बारिश ने ही पूरे मोहल्ले को जलमग्न कर दिया। कच्ची गलियां गहरे कीचड़ और गंदे पानी के दलदल में तब्दील हो गईं। बच्चों का स्कूल जाना, बुजुर्गों का निकलना और यहां तक कि महिलाओं का घरों से बाहर कदम रखना भी खौफनाक साबित हो रहा है। गंदे पानी की बदबू और कीचड़ ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे उनका आक्रोश फूट पड़ा।
एक साल से चल रहा है झूठे आश्वासनों का गंदा खेल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह कोई एक-दो दिन की समस्या नहीं है। वे पिछले एक वर्ष से लगातार नगर निगम कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। वार्ड के लोग अपना काम-धंधा छोड़कर अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते हैं, लेकिन उन्हें हर बार केवल कोरा और झूठा आश्वासन देकर वापस लौटा दिया जाता है।
स्थानीय पार्षद मंजू देवी ने खुद कई बार महापौर (Mayor) और नगर आयुक्त को लिखित में शिकायती पत्र सौंपे हैं और गली निर्माण की सख्त मांग की है। इसके बावजूद, निगम के अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जनता के टैक्स के पैसों का इस्तेमाल कहां हो रहा है, यह कोई बताने को तैयार नहीं है। इस प्रशासनिक घमंड और लापरवाही से मोहल्लेवासियों में भारी नाराजगी है।
महिलाओं ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप: “फाइलों में दबी हैं शिकायतें”
नगर निगम के गेट पर बैठीं पूनम देवी, ममता, भूमिका देवी, शशी, शांती, राजरानी, सावित्री देवी, सिया देवी, लक्ष्मी देवी सहित बड़ी संख्या में आक्रोशित महिलाओं ने निगम के अधिकारियों और ठेकेदारों पर भ्रष्टाचार के सीधे और गंभीर आरोप लगाए।
महिलाओं ने साफ शब्दों में कहा, “नगर निगम में बिना सुविधा शुल्क (रिश्वत) दिए कोई काम नहीं होता। हमारी छोटी-छोटी समस्याओं का भी समाधान नहीं हो पा रहा है क्योंकि हम गरीब हैं। अधिकारी अपने एयर-कंडीशनर कमरों से बाहर नहीं निकलते। जब हम मिलने आते हैं तो अधिकारी मिलते नहीं, और हमारी शिकायतें धूल फांकती फाइलों में दबी रह जाती हैं।”
महिलाओं के इन तीखे बयानों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली की धज्जियां उड़ा दी हैं। उनका कहना है कि वे इस नरक में रहने को मजबूर हैं और प्रशासन को उनकी कोई परवाह नहीं है।
पार्षद मनोज शंखवार की कड़ी चेतावनी: “पुरस्कारों का दिखावा बंद करो”
धरने का समर्थन कर रहे और जनता की आवाज उठा रहे स्थानीय पार्षद मनोज शंखवार ने नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों को आईना दिखाते हुए तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “अखबारों में अक्सर फिरोजाबाद नगर निगम को स्वच्छता और विकास के लिए पुरस्कार मिलने की खबरें छापी जाती हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन खोखले पुरस्कारों से बिल्कुल अलग और भयावह है।”
उन्होंने आगे कहा कि वार्डों में सीवर, सड़क और जल निकासी जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं पहुंच पा रही हैं। कागजों पर विकास हो रहा है, लेकिन जनता कीचड़ में चल रही है।
पार्षद ने नगर निगम प्रशासन को एक कठोर अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि, “यह धरना तब तक समाप्त नहीं होगा, जब तक गली नंबर 5 और 6 के निर्माण का टेंडर जारी नहीं होता और जल निकासी की स्थाई व्यवस्था का काम मौके पर शुरू नहीं कराया जाता। अगर जरूरत पड़ी तो हम उग्र आंदोलन के लिए भी तैयार हैं।”
निष्कर्ष: क्या जागेगा कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन?
लक्ष्मी नगर नई आबादी की महिलाओं का यह धरना केवल एक वार्ड की समस्या नहीं है, बल्कि यह फिरोजाबाद नगर निगम की पूरी व्यवस्था पर एक करारा तमाचा है। जनता को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित रखना किसी अपराध से कम नहीं है।
अब देखना यह होगा कि क्या नगर निगम के अधिकारी अपने वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर इन पीड़ित महिलाओं की सुध लेते हैं, या फिर यह धरना एक बड़े जन-आंदोलन का रूप लेगा। dlpnewstv.com इस मामले पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा और जनता की आवाज को इसी मजबूती से उठाता रहेगा।
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