
1 बड़ा प्रशासनिक भूकंप: फिरोजाबाद के DM रमेश रंजन का खौफनाक विवादों के बीच तबादला, संतोष कुमार शर्मा बने नए जिलाधिकारी, ‘आईफोन’ कांड की भीषण चर्चा
dlpnewstv.com विशेष प्रशासनिक डेस्क: उत्तर प्रदेश शासन ने रविवार देर रात नौकरशाही में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए प्रदेशभर में 38 आईएएस (IAS) अधिकारियों के तबादले कर दिए हैं। इस बड़े फेरबदल में फिरोजाबाद के जिलाधिकारी रमेश रंजन की भी कुर्सी छिन गई है। रमेश रंजन को फिरोजाबाद के डीएम पद से हटाकर एक नई जिम्मेदारी सौंपी गई है।
रमेश रंजन की जगह अब महाराजगंज के तेजतर्रार जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा को फिरोजाबाद का नया डीएम (District Magistrate) नियुक्त किया गया है। यह तबादला ऐसे समय में हुआ है जब रमेश रंजन का कार्यकाल कई गंभीर विवादों और भीषण प्रशासनिक उलझनों में घिरा हुआ था।
टूंडला की तत्कालीन तहसीलदार द्वारा लगाए गए खौफनाक आरोपों से लेकर शहर में चल रहे स्मार्ट मीटर के भीषण विरोध प्रदर्शन तक, रमेश रंजन लगातार मीडिया और शासन की रडार पर थे। इसी कड़ी में अब प्रदेश सरकार ने उन्हें जिले की कमान से मुक्त करते हुए शासन स्तर पर वापस बुला लिया है।
- यूपी में 38 आईएएस अधिकारियों के तबादले, फिरोजाबाद के डीएम रमेश रंजन पर गिरी प्रशासनिक गाज।
- महाराजगंज के डीएम संतोष कुमार शर्मा (2014 बैच) बने फिरोजाबाद के नए जिलाधिकारी।
- रमेश रंजन को अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, राजस्व परिषद (UP) के पद पर किया गया स्थानांतरित।
- टूंडला तहसीलदार राखी शर्मा द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार और दबाव के आरोपों ने बढ़ाई थी मुश्किलें।
- महंगे ‘आईफोन’ (iPhone) कांड को लेकर पूरे प्रदेश में हुई थी भीषण चर्चा।
- स्मार्ट मीटर के खिलाफ जनता के उग्र धरने-प्रदर्शन से भी बैकफुट पर था प्रशासन।
- नए डीएम संतोष कुमार शर्मा से जिले में शानदार प्रशासनिक कसावट की उम्मीदें।
संतोष कुमार शर्मा: फिरोजाबाद के नए डीएम की शानदार प्रोफाइल
फिरोजाबाद जिले की जिम्मेदारी अब वर्ष 2014 बैच के तेजतर्रार आईएएस अधिकारी संतोष कुमार शर्मा के कंधों पर होगी। इससे पहले वे महाराजगंज जिले के जिलाधिकारी के रूप में अपनी शानदार सेवाएं दे रहे थे।
संतोष कुमार शर्मा को प्रशासनिक गलियारों में एक सख्त और अपनी कार्यप्रणाली पर मजबूत पकड़ रखने वाला अधिकारी माना जाता है। महाराजगंज में उनके कार्यकाल के दौरान राजस्व कार्यों (Revenue Tasks) में तेजी और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर काफी सुखद परिणाम देखने को मिले थे।
फिरोजाबाद जैसे औद्योगिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिले में एक अनुभवी और सख्त प्रशासक की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। माना जा रहा है कि संतोष कुमार शर्मा के आने से जिले की चरमराई कानून-व्यवस्था और राजस्व विभाग की पेंडेंसी में शानदार सुधार देखने को मिलेगा।
रमेश रंजन का कार्यकाल: सख्ती से ज्यादा विवादों का साया
निवर्तमान डीएम रमेश रंजन का फिरोजाबाद का कार्यकाल काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। यद्यपि उन्होंने शुरुआत में प्रशासनिक सख्ती दिखाने का प्रयास किया, लेकिन धीरे-धीरे उनका कार्यकाल कई खौफनाक विवादों की भेंट चढ़ता चला गया। शासनादेश के अनुसार, अब उन्हें अपर भूमि व्यवस्था आयुक्त, राजस्व परिषद उत्तर प्रदेश (लखनऊ) के पद पर भेज दिया गया है, जिसे मुख्यधारा की प्रशासनिक कमान से हटाना माना जाता है।
रमेश रंजन के खिलाफ सबसे बड़ा बवंडर तब खड़ा हुआ जब तत्कालीन टूंडला तहसीलदार राखी शर्मा ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। एक तहसीलदार स्तर की महिला अधिकारी का जिले के सर्वोच्च अधिकारी (DM) पर खुलेआम भ्रष्टाचार और प्रशासनिक दबाव का आरोप लगाना कोई मामूली बात नहीं थी।
तहसीलदार राखी शर्मा का आरोप और ‘आईफोन’ कांड की गूंज
कुछ समय पहले टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा ने शासन स्तर (लखनऊ) तक एक विस्फोटक शिकायत भेजी थी। इस शिकायत में उन्होंने तत्कालीन डीएम रमेश रंजन पर आरोप लगाया था कि वे जमीन संबंधी महत्वपूर्ण मामलों में गलत फैसले करने का अवैध प्रशासनिक दबाव बनाते हैं।
शिकायत में कथित भ्रष्टाचार के कई मामलों का भी जिक्र था। इस प्रकरण ने पूरे जिला प्रशासन की साख पर गहरे सवाल खड़े कर दिए थे और यह मामला मीडिया की भीषण सुर्खियों में छाया रहा।
इसी दौरान एक और खौफनाक विवाद सामने आया जिसे लोग ‘आईफोन (iPhone) कांड’ के नाम से जानने लगे। चर्चाएं तेज थीं कि किसी कार्य विशेष के लिए महंगे आईफोन की मांग की गई थी या उसे उपहार स्वरूप दिया गया था। हालांकि इस मामले की कभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन जनता और प्रशासनिक गलियारों में इस अफवाह ने रमेश रंजन की छवि को भारी नुकसान पहुंचाया।
स्मार्ट मीटर का भीषण जन-आक्रोश: प्रशासन के लिए बनी चुनौती
आंतरिक विवादों के अलावा, बाहरी मोर्चे पर भी डीएम रमेश रंजन के लिए स्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण हो गई थीं। बीते कुछ दिनों से फिरोजाबाद जिले में बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे ‘स्मार्ट मीटर’ (Smart Meters) को लेकर जनता का जबरदस्त और उग्र विरोध चल रहा है।
शहर के मुख्य चौराहों से लेकर ग्रामीण कस्बों तक, हर जगह व्यापार मंडल, किसान संगठन और आम नागरिक धरने पर बैठे हैं। जनता का आरोप है कि स्मार्ट मीटर तेज चलते हैं और बिजली बिलों में खौफनाक वृद्धि कर रहे हैं।
इस भीषण जन-आंदोलन को शांत करने में प्रशासन पूरी तरह से विफल साबित हो रहा था। आए दिन डीएम कार्यालय पर ज्ञापन और प्रदर्शन हो रहे थे। मजबूरी में डीएम रमेश रंजन को कुछ मामलों में सख्त रुख अपनाना पड़ा, जिससे जनता में प्रशासन के खिलाफ और अधिक नाराजगी पनप गई। माना जा रहा है कि शासन ने चुनाव और जनभावनाओं को ध्यान में रखते हुए इस बदलाव का निर्णय लिया है।
नवागत डीएम संतोष कुमार शर्मा के लिए फिरोजाबाद की कुर्सी फूलों की सेज नहीं होगी। उनके सामने मुख्य रूप से 3 अहम चुनौतियां खड़ी हैं: 1. स्मार्ट मीटर के उग्र विरोध को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाना और जनता का विश्वास जीतना। 2. राजस्व विभाग और तहसील स्तर पर फैले कथित भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति लागू करना। 3. पूर्व तहसीलदार द्वारा लगाए गए आरोपों के कारण धूमिल हुई प्रशासनिक साख को फिर से एक शानदार मुकाम पर लाना।
निष्कर्ष: यूपी शासन का सख्त संदेश
रविवार देर रात 38 आईएएस अधिकारियों के इस बड़े फेरबदल ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार किसी भी जिले में प्रशासनिक ढिलाई या भ्रष्टाचार के आरोपों को बर्दाश्त नहीं करेगी।
रमेश रंजन का जाना और संतोष कुमार शर्मा का आना फिरोजाबाद की जनता के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। dlpnewstv.com उम्मीद करता है कि नए जिलाधिकारी जिले के रुके हुए विकास कार्यों को शानदार गति देंगे और आम जनता से जुड़े मुद्दों का सुखद समाधान निकालेंगे।
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