
1 बड़ा हंगामा: फिरोजाबाद में पीएम आवास योजना के लाभार्थियों का भीषण प्रदर्शन, मक्खनपुर नगर पंचायत कार्यालय मिला खाली, डीएम तक पहुंची खौफनाक शिकायत
1 बड़ा हंगामा: फिरोजाबाद में पीएम आवास योजना के लाभार्थियों का भीषण प्रदर्शन, मक्खनपुर नगर पंचायत कार्यालय मिला खाली, डीएम तक पहुंची खौफनाक शिकायत
dlpnewstv.com विशेष कवरेज: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से अफसरशाही की एक बेहद खौफनाक और शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। केंद्र और राज्य सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ (PM Awas Yojana) जमीनी स्तर पर किस तरह से भ्रष्टाचार और अधिकारियों की लापरवाही की भेंट चढ़ रही है, इसका जीता-जागता उदाहरण मक्खनपुर नगर पंचायत में देखने को मिला।
बुधवार की सुबह मक्खनपुर नगर पंचायत कार्यालय उस समय भीषण आक्रोश का अखाड़ा बन गया, जब एक साल से अधिक समय से अपने घर की छत के लिए तरस रहे सैकड़ों महिला और पुरुष लाभार्थी प्रदर्शन करने पहुंच गए। लेकिन वहां का नजारा देखकर जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया, क्योंकि पूरा कार्यालय खाली पड़ा था और जनता की सुनने वाला कोई भी अधिकारी या कर्मचारी अपनी कुर्सी पर मौजूद नहीं था।
गरीबों, दिव्यांगों और महिलाओं के इस दर्दनाक संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि योजनाओं के नाम पर केवल कागजी घोड़े दौड़ाए जा रहे हैं। जब नगर पंचायत में कोई सुनवाई नहीं हुई, तो यह बड़ा जनसैलाब जिलाधिकारी (DM) कार्यालय फिरोजाबाद की ओर कूच कर गया।
- मक्खनपुर नगर पंचायत (फिरोजाबाद) कार्यालय पर पीएम आवास योजना के लाभार्थियों का भीषण प्रदर्शन।
- बुधवार सुबह कार्यालय पहुंचने पर न कोई बाबू मिला, न चेयरमैन गीता देवी और न ही ईओ (EO) उपस्थित थे।
- एक साल से अधिक समय पहले आवेदन करने और कई सर्वे होने के बावजूद नहीं मिला योजना का सुखद लाभ।
- शिकोहाबाद एसडीएम कार्यालय और नगर पंचायत के बीच चक्कर काटकर बर्बाद हो रहे गरीब।
- खाली कार्यालय देखकर आक्रोशित भीड़ पहुंची फिरोजाबाद डीएम कार्यालय, दर्ज कराई खौफनाक शिकायत।
- जिलाधिकारी ने लिया कड़ा संज्ञान, एसडीएम को दिए तत्काल और शानदार कार्रवाई के निर्देश।
- ईओ का अजीबोगरीब बयान: “मामला संज्ञान में नहीं, मैं सिविल लाइंस में विभागीय बैठक में था।”
कार्यालय में पसरा सन्नाटा: गायब थे अधिकारी, जनता की उम्मीदों पर खौफनाक प्रहार
बुधवार की सुबह जब मक्खनपुर नगर पंचायत के गरीब निवासी अपनी एक बड़ी उम्मीद लेकर स्थानीय कार्यालय पहुंचे, तो उनका सामना सरकारी तंत्र की भीषण संवेदनहीनता से हुआ। आम दिनों में जहां जनता के सेवक होने का दावा करने वाले अधिकारी बैठते हैं, वहां कुर्सियां खाली पड़ी थीं।
प्रदर्शनकारियों का हुजूम सुबह-सुबह ही नगर पंचायत भवन के गेट पर जमा हो गया था। इनमें से कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर आई थीं, जबकि कुछ बुजुर्ग और दिव्यांग (Handicapped) अपनी बैसाखियों के सहारे न्याय की गुहार लगाने पहुंचे थे। यह दृश्य किसी भी पत्थर दिल इंसान को भावुक कर देने वाला था, लेकिन वहां उन आंसुओं को देखने वाला कोई नहीं था।
कार्यालय के अंदर झांकने पर पता चला कि न तो वहां कोई क्लर्क (बाबू) मौजूद है और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी। यहां तक कि नगर पंचायत की अध्यक्ष (चेयरमैन) गीता देवी और अधिशासी अधिकारी (EO) भी नदारद थे। यह खौफनाक लापरवाही इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को जनता की बुनियादी समस्याओं (जैसे छत और आवास) से कोई सरोकार नहीं रह गया है।
मौके पर सच्चाई की पड़ताल करने पहुंचे स्थानीय रिपोर्टर्स और मीडिया कर्मियों को भी पंचायत भवन में कोई कर्मचारी नहीं मिला, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि मक्खनपुर नगर पंचायत में ‘बाबू राज’ और ‘तानाशाही’ चरम पर है।
एक साल का दर्दनाक इंतजार: सर्वे के नाम पर केवल धोखा
प्रधानमंत्री आवास योजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर गरीब को पक्की छत (Pakka House) मुहैया कराना है। लेकिन मक्खनपुर में यह योजना लालफीताशाही (Red Tapism) के भीषण जाल में उलझ कर रह गई है।
प्रदर्शन कर रहे लाभार्थियों ने भारी मन और आक्रोशित स्वर में बताया कि उन्होंने एक साल से भी अधिक समय पहले योजना का लाभ पाने के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत आवेदन किया था। आवेदन के साथ सभी जरूरी दस्तावेज, आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और कच्चे मकान की तस्वीरें भी जमा की गई थीं।
लाभार्थियों का आरोप है कि पिछले 12 महीनों में उनके कच्चे मकानों का कई बार ‘सर्वे’ (Survey) किया जा चुका है। हर बार अधिकारी कैमरे लेकर आते हैं, फोटो खींचते हैं और एक सुखद आश्वासन देकर चले जाते हैं कि ‘जल्द ही पैसा तुम्हारे खाते में आ जाएगा’।
लेकिन हकीकत में, एक साल बीत जाने के बाद भी किसी भी गरीब के खाते में योजना की पहली किस्त (First Installment) तक नहीं पहुंची है। बारिश और कड़ाके की ठंड में टूटी छतों के नीचे रातें गुजारना इन गरीब परिवारों के लिए एक खौफनाक सजा बन गया है।
अधिकारियों का ‘फुटबॉल मैच’: शिकोहाबाद एसडीएम कार्यालय और नगर पंचायत के बीच पिसती जनता
इस पूरी प्रक्रिया में सबसे दर्दनाक पहलू वह मानसिक प्रताड़ना है, जो इन अनपढ़ और गरीब लाभार्थियों को झेलनी पड़ रही है। जब भी ये लाभार्थी अपनी रुकी हुई फाइलों का स्टेटस (Status) जानने के लिए मक्खनपुर नगर पंचायत कार्यालय जाते हैं, तो वहां बैठे बाबू उन्हें यह कहकर टरका देते हैं कि ‘तुम्हारी फाइल शिकोहाबाद एसडीएम कार्यालय (SDM Office Shikohabad) भेज दी गई है, अब वहीं जाकर पता करो।’
जब ये गरीब दिहाड़ी मजदूर अपनी रोजी-रोटी का नुकसान करके किराया भाड़ा खर्च कर शिकोहाबाद एसडीएम कार्यालय पहुंचते हैं, तो वहां से उन्हें एक खौफनाक जवाब मिलता है। एसडीएम कार्यालय के अधिकारी साफ कह देते हैं कि ‘नगर पंचायत से हमें अभी तक कोई फाइल प्राप्त ही नहीं हुई है, वापस अपने पंचायत कार्यालय जाओ।’
यह एक ऐसा भीषण और क्रूर फुटबॉल मैच बन गया है, जिसमें गरीब जनता को गेंद की तरह इधर से उधर ठोकरें मारी जा रही हैं। सिस्टम की इस संवेदनहीनता ने लाभार्थियों का धैर्य जवाब दे दिया, जिसके कारण उन्हें सड़कों पर उतरकर यह बड़ा प्रदर्शन करने को मजबूर होना पड़ा।
गुस्साई भीड़ पहुंची डीएम कार्यालय: जिलाधिकारी ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
मक्खनपुर नगर पंचायत में जब कोई अधिकारी उनकी भावुक गुहार सुनने के लिए मौजूद नहीं मिला, तो प्रदर्शनकारियों का जनसैलाब ट्रकों, ट्रैक्टरों और अन्य साधनों से जिला मुख्यालय (फिरोजाबाद डीएम कार्यालय) पहुंच गया।
वहां पहुंचकर महिलाओं और पुरुषों ने जमकर नारेबाजी की और जिलाधिकारी महोदय के सामने अपनी खौफनाक पीड़ा व्यक्त की। प्रदर्शन में शामिल कई महिलाओं की आंखों में आंसू थे। उन्होंने डीएम को बताया कि उनके घरों में छत तक नहीं है, बारिश का पानी सीधा घर में भर जाता है, और कई बार शिकायत करने के बावजूद मक्खनपुर नगर पंचायत के अधिकारी उनके फोन तक नहीं उठाते हैं।
मामले की गंभीरता और जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए फिरोजाबाद के जिलाधिकारी (District Magistrate) ने इसे तुरंत संज्ञान में लिया। उन्होंने इसे सरकारी कार्यप्रणाली पर एक बड़ा धब्बा मानते हुए मौके से ही शिकोहाबाद एसडीएम को फोन लगाया और इस मामले में तत्काल एवं शानदार कार्रवाई करने के कड़े निर्देश जारी किए।
डीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में किसी भी बाबू या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ निलंबन (Suspension) और एफआईआर (FIR) की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने जनता को एक सुखद आश्वासन दिया है कि पात्र लाभार्थियों को किसी भी कीमत पर पीएम आवास योजना से वंचित नहीं रखा जाएगा।
अधिशासी अधिकारी (EO) का ‘गोलमोल’ जवाब: ‘मुझे घटना की जानकारी नहीं’
इस पूरे बवाल के बीच जब मीडिया की टीम ने मक्खनपुर नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी (Executive Officer – EO) से फोन पर संपर्क किया और कार्यालय के खाली होने तथा जनता के प्रदर्शन पर जवाब मांगा, तो उन्होंने बेहद अजीबोगरीब और गैर-जिम्मेदाराना बयान दिया।
ईओ महोदय ने सफाई देते हुए कहा, “नगर पंचायत कार्यालय में हुए किसी भी प्रदर्शन या हंगामे का मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। मैं बुधवार सुबह से ही सिविल लाइंस फिरोजाबाद में स्थित जिलाधिकारी कार्यालय में एक अति-महत्वपूर्ण विभागीय बैठक (Departmental Meeting) में व्यस्त था।”
हालांकि, अधिकारी ने अपनी खाल बचाते हुए मीडिया को यह आश्वासन जरूर दिया कि, “यदि मेरे पीछे से कार्यालय में ऐसी कोई खौफनाक घटना घटी है, तो मैं तुरंत वापस लौटकर उसकी गहन जांच (Investigation) करवाऊंगा। जिन भी शिकायतकर्ताओं की फाइलें रुकी हुई हैं, मैं स्वयं उनकी समीक्षा करूंगा और समस्याओं का सुखद समाधान सुनिश्चित करूंगा।”
लेकिन ईओ का यह बयान जनता के गले नहीं उतर रहा है। सवाल यह उठता है कि यदि ईओ मीटिंग में थे, तो कार्यालय के अन्य लिपिक, कंप्यूटर ऑपरेटर और नगर पंचायत अध्यक्ष (चेयरमैन) गीता देवी कहां गायब थीं? यह एक बड़ी प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।
योजनाओं का भ्रष्टाचार और सीएम योगी के आदेशों की धज्जियां
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंचों से बार-बार यह शानदार उद्घोष करते हैं कि सरकार की योजनाएं समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव और भ्रष्टाचार के पहुंचनी चाहिए। लेकिन मक्खनपुर नगर पंचायत में जो भीषण लापरवाही देखने को मिली है, वह सीधे तौर पर सीएम के आदेशों की धज्जियां उड़ाने जैसी है।
पीएम आवास योजना के तहत शहरी क्षेत्रों में 2.5 लाख रुपये और ग्रामीण क्षेत्रों में 1.20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। अक्सर यह आरोप लगते हैं कि निचले स्तर के अधिकारी और बिचौलिए (Middlemen) इस राशि को पास करने की एवज में रिश्वत की मांग करते हैं।
जो गरीब रिश्वत नहीं दे पाते, उनकी फाइलों को ‘कागजी कमियों’ का खौफनाक बहाना बनाकर महीनों तक अटका दिया जाता है। मक्खनपुर का यह मामला भी कहीं न कहीं इसी तरह के सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है, जिसकी उच्च स्तरीय जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
निष्कर्ष: क्या अब मिलेगा गरीबों को उनका हक?
जिलाधिकारी फिरोजाबाद के संज्ञान लेने के बाद अब उम्मीद जगी है कि मक्खनपुर के इन सैकड़ों बेबस लाभार्थियों को उनका हक मिलेगा। लेकिन यह प्रदर्शन हमारी नौकरशाही के चेहरे पर एक दर्दनाक तमाचा है।
जब तक सरकारी कार्यालयों में जनता की सुनवाई सुनिश्चित नहीं की जाएगी और कामचोर अधिकारियों पर कठोर एक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक ऐसी शानदार योजनाएं फाइलों में ही दम तोड़ती रहेंगी।
dlpnewstv.com इस मुद्दे को तब तक प्रमुखता से उठाता रहेगा, जब तक कि इन सभी गरीब महिलाओं और दिव्यांगों के सिर पर उनके पक्के मकान की छत नहीं बन जाती। प्रशासन को चाहिए कि वह मक्खनपुर नगर पंचायत कार्यालय की कार्यप्रणाली को तुरंत दुरुस्त करे और जनता के फोन कॉल्स का जवाब देना अनिवार्य करे।
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