
1 शानदार कामयाबी: बाड़ी पुलिस का भीषण प्रहार, हत्या के प्रयास में 4 साल से फरार 5 हजार का इनामी खौफनाक वारंटी गिरफ्तार
dlpnewstv.com क्राइम और इन्वेस्टिगेशन डेस्क: राजस्थान के धौलपुर जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे धरपकड़ अभियान में बाड़ी शहर की कोतवाली थाना पुलिस को एक बेहद शानदार और बड़ी सफलता हाथ लगी है। लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे और कानून को चकमा दे रहे एक खौफनाक इनामी अपराधी को पुलिस ने आखिरकार सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।
यह अपराधी पिछले चार वर्षों से हत्या के प्रयास (Attempt to Murder) जैसे भीषण मामले में फरार चल रहा था। इसके पकड़े जाने से न केवल पीड़ित पक्ष को सुखद न्याय की उम्मीद जगी है, बल्कि पूरे इलाके के अपराधियों में एक खौफनाक दहशत का माहौल बन गया है। इस अपराधी की गिरफ्तारी धौलपुर पुलिस के मजबूत सूचना तंत्र और जिला पुलिस अधीक्षक (SP) विकास सांगवान की अचूक कार्यप्रणाली का सीधा परिणाम है।
आरोपी की गिरफ्तारी बसेड़ी बस स्टैंड के पास से एक गुप्त और आक्रामक पुलिस ऑपरेशन के तहत की गई। पुलिस के मुताबिक, यह अपराधी भरतपुर जिले के रूपवास थाना क्षेत्र का निवासी है और उसके खिलाफ आर्म्स एक्ट (Arms Act) सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।
- बाड़ी कोतवाली पुलिस और डीएसटी (DST) टीम का शानदार संयुक्त ऑपरेशन।
- हत्या के प्रयास के मामले में पिछले 4 साल से फरार चल रहा था स्थाई वारंटी जंडेल सिंह।
- धौलपुर एसपी विकास सांगवान ने आरोपी की गिरफ्तारी पर रखा था 5 हजार रुपये का इनाम।
- मुखबिर की सटीक सूचना पर बसेड़ी बस स्टैंड को घेरकर दबोचा गया शातिर अपराधी।
- आरोपी भरतपुर जिले के रूपवास थाना क्षेत्र के चक गांव का मूल निवासी है।
- आरोपी के खिलाफ हत्या के प्रयास के अलावा आर्म्स एक्ट के तहत भी दर्ज हैं गंभीर मामले।
- थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा और डीएसटी इंचार्ज मुकेश कुमार की टीम ने निभाई अहम भूमिका।
ऑपरेशन बसेड़ी: मुखबिर की सूचना और खौफनाक घेराबंदी
अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस का ‘मुखबिर तंत्र’ (Informer Network) सबसे बड़ा हथियार होता है। एसपी विकास सांगवान के निर्देश पर पूरे जिले में मुखबिरों का एक मजबूत जाल बिछाया गया है। इसी तंत्र से बाड़ी कोतवाली पुलिस को एक बहुत ही अहम और सटीक इनपुट प्राप्त हुआ था।
पुलिस को विश्वसनीय सूत्रों से पता चला कि हत्या के प्रयास का एक खतरनाक और इनामी अपराधी, जो लंबे समय से फरार है, वह किसी काम से बसेड़ी बस स्टैंड के आस-पास मंडरा रहा है। हो सकता है कि वह शहर छोड़कर किसी अन्य राज्य या जिले में भागने की खौफनाक फिराक में हो।
सूचना मिलते ही कोतवाली थाना अधिकारी देवेंद्र शर्मा ने बिना एक भी पल गंवाए एक्शन लिया। उन्होंने तुरंत जिला विशेष शाखा यानी डीएसटी (District Special Team) को अलर्ट किया। डीएसटी टीम इंचार्ज मुकेश कुमार के साथ मिलकर एक शानदार रणनीति तैयार की गई। पुलिसकर्मियों ने सादे कपड़ों में और कुछ ने वर्दी में बसेड़ी बस स्टैंड की तरफ कूच किया।
बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले इलाके में किसी शातिर अपराधी को पकड़ना आसान नहीं होता। अपराधी भीड़ का फायदा उठाकर भाग सकता है या पुलिस पर हमला भी कर सकता है। इसलिए पुलिस टीम ने चारों तरफ से इलाके की कड़ी घेराबंदी (Cordon off) कर दी। जैसे ही मुखबिर का इशारा मिला, टीम ने बाज जैसी फुर्ती दिखाते हुए आरोपी को चारों तरफ से दबोच लिया। आरोपी को भागने या विरोध करने का कोई मौका ही नहीं मिला। यह पुलिस की अचूक योजना का ही परिणाम था।
कौन है खौफनाक अपराधी जंडेल सिंह?
पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद जब आरोपी से कड़ाई से पूछताछ की गई और थाने लाकर उसकी शिनाख्त की गई, तो उसकी पूरी क्राइम कुंडली (Criminal Record) खुलकर सामने आ गई। गिरफ्तार किए गए इस शातिर इनामी वारंटी की पहचान जंडेल सिंह पुत्र प्रताप सिंह कुशवाह के रूप में हुई है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी जंडेल सिंह मूल रूप से पड़ोसी जिले भरतपुर के थाना रूपवास के अंतर्गत आने वाले ‘गांव चक’ का निवासी है। धौलपुर और भरतपुर सीमा से सटे होने के कारण अपराधी अक्सर एक जिले में भीषण वारदात को अंजाम देकर दूसरे जिले में छिप जाते हैं। जंडेल सिंह भी इसी खौफनाक रणनीति का इस्तेमाल कर रहा था।
कोतवाली थाना अधिकारी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि यह आरोपी कोई मामूली चोर-उचक्का नहीं है। इसके खिलाफ बाड़ी कोतवाली थाने में हत्या के प्रयास (Attempt to Murder – Section 307 IPC/BNS) का एक गंभीर मुकदमा दर्ज था। किसी व्यक्ति पर जानलेवा हमला करने के बाद से ही यह पुलिस की रडार पर था। माननीय न्यायालय ने भी इसके खिलाफ ‘स्थाई वारंट’ (Permanent Warrant) जारी कर रखा था।
4 साल की फरारी और आर्म्स एक्ट का खौफनाक सच
जंडेल सिंह पिछले चार वर्षों (48 महीनों) से पुलिस के साथ चूहे-बिल्ली का गंदा खेल खेल रहा था। चार साल तक छिपकर रहना किसी भी अपराधी के लिए आसान नहीं होता। पुलिस सूत्रों के अनुसार, फरारी काटने के दौरान ऐसे शातिर अपराधी अक्सर अपनी पहचान छिपाकर दूसरे राज्यों या दूर-दराज के गांवों में मजदूरी करने लगते हैं, या फिर किसी बड़े क्रिमिनल सिंडिकेट की शरण ले लेते हैं।
वे बार-बार अपने मोबाइल नंबर (SIM Cards) और ठिकाने बदलते रहते हैं ताकि पुलिस की तकनीकी सर्विलांस (Technical Surveillance) उन्हें ट्रेस न कर सके। लेकिन कहावत है कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, और आखिरकार जंडेल सिंह का भी खौफनाक अंत पुलिस की गिरफ्त में ही हुआ।
पुलिस रिकॉर्ड खंगालने पर यह भी सामने आया है कि इस आरोपी के खिलाफ पूर्व में अवैध हथियारों की तस्करी या उपयोग से संबंधित ‘आर्म्स एक्ट’ (Arms Act) का मामला भी दर्ज है। इससे यह स्पष्ट होता है कि जंडेल सिंह हथियारों का शौकीन और एक खतरनाक प्रवृत्ति का व्यक्ति है। ऐसे अपराधियों का समाज में खुला घूमना आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।
5 हजार का इनाम: एसपी विकास सांगवान की सुखद रणनीति
धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) विकास सांगवान जिले में अपराध को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने के लिए जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रहे हैं। जब कोई शातिर अपराधी लंबे समय तक पकड़ में नहीं आता है, तो पुलिस विभाग उस पर नकद इनाम घोषित करता है।
आरोपी जंडेल सिंह की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए भी एसपी सांगवान ने उस पर 5 हजार रुपये का ईनाम (Bounty) घोषित कर रखा था। इनाम घोषित करने का मुख्य उद्देश्य आम जनता और मुखबिरों को प्रोत्साहित करना होता है ताकि वे बिना किसी खौफ के पुलिस को अपराधियों की जानकारी दे सकें।
एसपी के इसी शानदार विजन का नतीजा है कि धौलपुर पुलिस पिछले कुछ महीनों में लगातार कई इनामी बदमाशों, डकैतों, और स्थाई वारंटियों को सलाखों के पीछे धकेलने में कामयाब रही है। पुलिस द्वारा चलाया जा रहा ‘विशेष अभियान’ (Special Drive against Wanted Criminals) जिले में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने में एक अहम भूमिका निभा रहा है।
किसी भी खतरनाक अपराधी को पकड़ना एक टीम वर्क होता है। इस शानदार सफलता के पीछे कोतवाली थाना पुलिस और डीएसटी टीम के जांबाज पुलिसकर्मियों की दिन-रात की मेहनत शामिल है। इस पूरे ऑपरेशन को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में कोतवाली थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा, डीएसटी टीम इंचार्ज मुकेश कुमार, तेज-तर्रार एएसआई (ASI) नीरज कुमार, और अपनी जान जोखिम में डालकर दबिश देने वाले कांस्टेबल आसाराम, मनोज व सूबे सिंह की भूमिका अत्यंत प्रशंसनीय रही। इन पुलिसकर्मियों ने साबित कर दिया है कि पुलिस की मुस्तैदी के आगे कोई भी अपराधी ज्यादा दिन तक आजाद नहीं घूम सकता।
आगे की पूछताछ: खुल सकते हैं कई खौफनाक राज
गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने आरोपी जंडेल सिंह को कड़ी सुरक्षा के बीच न्यायालय में पेश करने की तैयारी कर ली है। पुलिस कोर्ट से आरोपी के पुलिस रिमांड (Police Remand) की मांग करेगी ताकि उससे गहन पूछताछ की जा सके।
पुलिस अधिकारियों को पूरी उम्मीद है कि इस शातिर अपराधी से पूछताछ के दौरान कई अन्य अनसुलझे मामलों और खौफनाक वारदातों से पर्दा उठ सकता है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फरारी के चार सालों के दौरान उसने किन-किन लोगों से पनाह ली, उसे आर्थिक मदद कौन पहुंचा रहा था, और क्या उसने इस दौरान किसी अन्य राज्य या जिले में किसी नए अपराध को तो अंजाम नहीं दिया।
इसके अलावा, आरोपी के पुराने आर्म्स एक्ट के मुकदमों को देखते हुए, पुलिस उसके अवैध हथियारों के नेटवर्क (Illegal Weapons Smuggling Network) और भरतपुर-धौलपुर बॉर्डर पर सक्रिय अन्य माफियाओं के बारे में भी जानकारी उगलवाने की कोशिश करेगी। जो लोग इस अपराधी को शरण दे रहे थे, उनके खिलाफ भी पुलिस द्वारा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष: आमजन में बढ़ा सुखद विश्वास
धौलपुर पुलिस द्वारा की गई यह शानदार कार्रवाई इस बात का स्पष्ट संदेश है कि अपराध करके कोई भी व्यक्ति कानून की नजरों से बच नहीं सकता। चाहे वह 4 साल भागे या 10 साल, अंततः उसे अपने किए की खौफनाक सजा भुगतनी ही पड़ती है।
जंडेल सिंह जैसे खतरनाक अपराधियों के पकड़े जाने से बाड़ी और बसेड़ी इलाके की आम जनता, विशेषकर व्यापारियों और महिलाओं में सुरक्षा का एक सुखद भाव पैदा हुआ है। पुलिस का यह विशेष अभियान लगातार जारी रहेगा, जिससे आने वाले दिनों में और भी कई इनामी बदमाशों के पकड़े जाने की संभावना है। dlpnewstv.com की टीम धौलपुर पुलिस के इस साहसिक कार्य की सराहना करती है और आमजन से अपील करती है कि वे पुलिस का सहयोग करें।
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