
1 ऐतिहासिक कामयाबी: बाड़ी पुलिस का खौफनाक प्रहार, 17 साल से फरार 5 हजार का इनामी लुटेरा एमपी के मुरैना से शानदार तरीके से गिरफ्तार
dlpnewstv.com क्राइम और इन्वेस्टिगेशन डेस्क: राजस्थान के धौलपुर जिले में अपराध और अपराधियों के खिलाफ पुलिस का ‘ऑपरेशन धरपकड़’ भीषण और आक्रामक रूप ले चुका है। दशकों पुराने और ठंडे बस्ते में जा चुके मुकदमों की फाइलें फिर से खोली जा रही हैं। इसी कड़ी में बाड़ी शहर की कोतवाली थाना पुलिस को एक बेहद शानदार और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है।
धौलपुर पुलिस ने लूट के एक ऐसे शातिर और खतरनाक स्थायी वारंटी को गिरफ्तार किया है, जो पिछले 17 सालों से पुलिस और कानून की आंखों में धूल झोंककर आजाद घूम रहा था। यह अपराधी पुलिस से बचने के लिए राजस्थान की सीमा छोड़कर पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में एक गुमनाम जिंदगी जी रहा था।
आरोपी की पहचान केशव सिंह के रूप में हुई है, जिस पर धौलपुर के तेज-तर्रार पुलिस अधीक्षक (SP) ने 5 हजार रुपये का बड़ा इनाम भी घोषित कर रखा था। पुलिस की एक विशेष टीम ने मुखबिर की सटीक और अचूक सूचना पर कार्रवाई करते हुए इस खौफनाक लुटेरे को मुरैना बस स्टैंड से रंगे हाथों दबोच लिया है।
- बाड़ी कोतवाली पुलिस ने 17 साल से फरार लूट के खतरनाक स्थायी वारंटी को किया गिरफ्तार।
- आरोपी केशव सिंह पुत्र गणेश ठाकुर मूल रूप से शाहपुरा (कंचनपुर) का रहने वाला है।
- वर्ष 1999 में कंचनपुर थाना क्षेत्र में हुई एक भीषण लूट की वारदात में था मुख्य आरोपी।
- 2009 में पहली बार हुआ था गिरफ्तार, लेकिन जमानत पर छूटने के बाद हो गया था फरार।
- धौलपुर एसपी ने इस शातिर अपराधी पर घोषित कर रखा था 5 हजार रुपए का इनाम।
- अपनी पहचान छिपाकर एमपी के मुरैना जिले (देवगढ़ थाना क्षेत्र) के सिरोही गांव में रह रहा था।
- एएसआई दीनदयाल की टीम ने मुखबिर की सूचना पर मुरैना बस स्टैंड से किया शानदार अरेस्ट।
फ्लैशबैक 1999: कंचनपुर में हुई थी खौफनाक लूट की वारदात
इस पूरी रोमांचक और लंबी पुलिस इन्वेस्टिगेशन की कहानी आज से लगभग 27 साल पहले शुरू होती है। कोतवाली थाना अधिकारी (SHO) देवेंद्र शर्मा ने पूरे मामले का खुलासा करते हुए बताया कि घटना वर्ष 1999 की है। उस समय कंचनपुर थाना क्षेत्र में एक भीषण लूट की वारदात को अंजाम दिया गया था।
आरोपी केशव सिंह, जो उस समय एक युवा और आक्रामक अपराधी था, अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर इस लूट में शामिल था। उस दौर में डकैतों और लुटेरों का खौफ चंबल और धौलपुर के बीहड़ों में सिर चढ़कर बोलता था। केशव सिंह भी उसी खौफनाक क्रिमिनल माइंडसेट का हिस्सा था, जिसने हथियार के बल पर लोगों में दहशत फैलाकर इस वारदात को अंजाम दिया था।
लूट की इस घटना के बाद कंचनपुर थाने में आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस कई सालों तक इस गिरोह की तलाश में खाक छानती रही।
2009 में पहली गिरफ्तारी और जमानत का काला खेल
वारदात के 10 साल बाद, वर्ष 2009 में धौलपुर पुलिस को एक बड़ी कामयाबी मिली थी जब उन्होंने केशव सिंह को पहली बार गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने पूरी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए उसे माननीय न्यायालय के समक्ष पेश किया और उसे जेल भेज दिया गया।
हालांकि, कुछ समय जेल में बिताने के बाद आरोपी केशव सिंह ने अपने वकीलों के माध्यम से अदालत से जमानत (Bail) हासिल कर ली। जमानत पर रिहा होना न्याय प्रक्रिया का एक हिस्सा है, लेकिन इस शातिर अपराधी ने इस कानूनी छूट का बेहद खौफनाक फायदा उठाया।
जमानत पर छूटने के बाद नियम यह होता है कि आरोपी को हर पेशी (Hearing) पर अदालत में हाजिर होना पड़ता है। लेकिन केशव सिंह ने पुलिस और न्याय व्यवस्था को धता बताते हुए फरार होने की गहरी साजिश रच ली। वह रातों-रात अपना गांव शाहपुरा छोड़कर कहीं गायब हो गया।
जब वह कई पेशियों तक अदालत में हाजिर नहीं हुआ, तो माननीय न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए उसके खिलाफ ‘स्थायी वारंट’ (Permanent Warrant) जारी कर दिया। इसके बाद शुरू हुआ 17 वर्षों का वह लंबा और थका देने वाला इंतजार, जिसमें पुलिस उसकी परछाई तक नहीं ढूंढ पा रही थी।
17 साल की फरारी: एमपी के सिरोही गांव में बनाई सुरक्षित पनाहगाह
एक वांछित अपराधी के लिए 17 साल तक पुलिस से बचकर रहना कोई आसान काम नहीं है। इसके लिए एक खतरनाक क्रिमिनल नेटवर्क और सीमाओं को पार करने की समझ चाहिए होती है। केशव सिंह जानता था कि अगर वह राजस्थान में रहा, तो किसी न किसी दिन पुलिस के हत्थे चढ़ जाएगा।
इसीलिए उसने धौलपुर जिले और राजस्थान की सीमा को हमेशा के लिए छोड़ दिया। वह चंबल नदी पार करके मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में घुस गया। वहां उसने देवगढ़ थाना क्षेत्र के एक बेहद पिछड़े और दूरदराज के ‘सिरोही गांव’ को अपना सुरक्षित ठिकाना बना लिया।
वहां वह अपनी पहचान बदलकर एक आम नागरिक की तरह रहने लगा। इतने सालों में उसने पुलिस को चकमा देने के कई शातिर तरीके अपनाए। वह कभी भी अपने पुराने रिश्तेदारों या गांव (शाहपुरा) के लोगों से सीधे संपर्क नहीं करता था। लेकिन पुलिस की फाइलें कभी बंद नहीं होतीं, वे बस सही वक्त का इंतजार करती हैं।
एसपी का कड़ा रुख और 5000 का शानदार इनाम
धौलपुर के वर्तमान पुलिस अधीक्षक (SP) हमेशा से ही ‘पेंडिंग केसेज’ (Pending Cases) को निपटाने पर विशेष जोर देते आए हैं। जिले भर में जब पुराने और खौफनाक वारंटियों की लिस्ट तैयार की गई, तो उसमें केशव सिंह का नाम सबसे ऊपर के क्रिमिनल्स में था।
इस शातिर अपराधी की गिरफ्तारी को सुनिश्चित करने और पुलिस व मुखबिरों का मनोबल बढ़ाने के लिए धौलपुर एसपी ने केशव सिंह पर 5,000 रुपये का नकद इनाम (Bounty) घोषित कर दिया। इनाम घोषित होते ही पुलिस का खुफिया तंत्र (Intelligence Network) और मुखबिर पूरी तरह से सक्रिय हो गए।
राजस्थान पुलिस की स्पेशल टीमों ने एमपी और यूपी के सीमावर्ती थानों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया। यह रणनीतिक दबाव ही था जिसने 17 साल की फरारी की दीवार में पहला छेद किया।
जब कोई आरोपी अदालत से जमानत मिलने के बाद फरार हो जाता है और सम्मन (Summons) या गिरफ्तारी वारंट (Arrest Warrant) के बावजूद पेश नहीं होता, तो न्यायालय सीआरपीसी (CrPC) की धारा 299 के तहत ‘स्थायी वारंट’ जारी कर देता है। इसका सीधा मतलब यह है कि पुलिस उस खतरनाक अपराधी को भारत के किसी भी राज्य, शहर या गांव से किसी भी वक्त गिरफ्तार कर सकती है। स्थायी वारंट कभी एक्सपायर (Expire) नहीं होता, जब तक कि आरोपी को अदालत में पेश न कर दिया जाए।
ऑपरेशन मुरैना: मुखबिर की अचूक सूचना और गिरफ्तारी
सोमवार (वर्तमान सप्ताह) का दिन बाड़ी पुलिस के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक सफलता लेकर आया। बाड़ी कोतवाली में तैनात असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर (ASI) दीनदयाल को अपने सबसे विश्वस्त मुखबिर से एक सनसनीखेज इनपुट मिला।
मुखबिर ने पक्की सूचना दी कि 17 साल से फरार 5 हजार का इनामी लुटेरा केशव सिंह आज अपने छिपने के ठिकाने (सिरोही गांव, देवगढ़) से निकलकर किसी काम के सिलसिले में मुरैना बस स्टैंड पर आया हुआ है। सूचना मिलते ही थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा ने एक स्पेशल टास्क फोर्स (Team) का गठन किया और तुरंत मुरैना की ओर कूच किया।
चूंकि बस स्टैंड एक भीड़भाड़ वाला इलाका होता है, इसलिए पुलिस ने सादे कपड़ों में पूरे इलाके की खौफनाक घेराबंदी कर ली। जैसे ही मुखबिर ने दूर से केशव सिंह की शिनाख्त की, पुलिस टीम ने बाज जैसी फुर्ती दिखाते हुए उसे चारों तरफ से दबोच लिया।
17 साल बाद पुलिस को अपने सामने देखकर केशव सिंह के चेहरे पर खौफ और हताशा साफ झलक रही थी। उसने भागने की कोशिश की, लेकिन पुलिस की शानदार प्लानिंग के आगे उसकी एक न चली।
आगे की कार्रवाई: खुलेंगे कई काले राज
मुरैना से गिरफ्तार करने के बाद पुलिस केशव सिंह को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धौलपुर ले आई है। 17 साल की लंबी फरारी के दौरान उसने और किन-किन खौफनाक अपराधों को अंजाम दिया है, यह अब पुलिस की पूछताछ का मुख्य विषय होगा।
अक्सर ऐसे शातिर अपराधी फरारी के दौरान दूसरे राज्यों में भी लूट, डकैती या हथियारों की तस्करी जैसे गंभीर सिंडिकेट का हिस्सा बन जाते हैं। पुलिस मध्य प्रदेश (MP) पुलिस के साथ भी केशव सिंह का आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) साझा कर रही है।
थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपी को जल्द ही न्यायालय में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा ताकि इस लंबी फरारी के दौरान उसे पनाह देने वाले (Harbouring) मददगारों का भी पर्दाफाश किया जा सके। कानून की नजर में एक अपराधी को छुपाना भी एक बड़ा अपराध है।
निष्कर्ष: आम जनता में सुखद विश्वास की लहर
बाड़ी कोतवाली पुलिस का यह शानदार ऑपरेशन इस बात का प्रमाण है कि पुलिस का तंत्र कितना मजबूत हो चुका है। 1999 की वारदात और 2009 की फरारी के बाद आज 2026 में हुई यह गिरफ्तारी साबित करती है कि ‘अपराधी चाहे जितना भी शातिर क्यों न हो, वह कानून के लंबे हाथों से कभी बच नहीं सकता।’
इस गिरफ्तारी से धौलपुर और कंचनपुर इलाके की जनता में सुरक्षा का एक सुखद भाव पैदा हुआ है। dlpnewstv.com की टीम धौलपुर एसपी, बाड़ी थानाधिकारी देवेंद्र शर्मा और एएसआई दीनदयाल की पूरी टीम को इस साहसिक और अचूक कार्रवाई के लिए बधाई देती है। ऐसी कार्रवाइयां अपराधियों के दिलों में खौफ और जनता के दिलों में पुलिस के प्रति सम्मान बढ़ाती हैं।
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