नई दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार आधारित ऑफलाइन पहचान सत्यापन व्यवस्था का विस्तार करते हुए अब तक 300 Offline Verification Seeking Entities (OVSEs) को अपने नेटवर्क में शामिल किया है। यह व्यवस्था जनवरी 2026 में शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य पहचान की जांच को सहमति-आधारित, सुरक्षित और पेपरलेस बनाना है।
होटल, स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र को भी मिलेगा लाभ
UIDAI के अनुसार, ऑफलाइन सत्यापन का उपयोग होटल और हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, आयोजनों, गिग इकॉनमी और उपभोक्ता सेवाओं जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इस व्यवस्था में व्यक्ति की सहमति के आधार पर पहचान से जुड़ी जानकारी का सत्यापन किया जाता है। इससे हर बार भौतिक दस्तावेजों की कॉपी लेने पर निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
आधार ऐप के इस्तेमाल में भी बढ़ोतरी
UIDAI की 5 नवंबर 2026 की जानकारी के मुताबिक, 86 लाख से अधिक लोगों ने आधार ऐप के जरिए मोबाइल नंबर अपडेट किया है। आधार ऐप के डाउनलोड लगभग 7.5 करोड़ तक पहुंचे हैं। इसके अलावा बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक के 4.6 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए। ऐप के माध्यम से 22 लाख से अधिक पते और करीब 40 लाख ईमेल अपडेट भी किए गए।
ऑफलाइन सत्यापन में सहमति और डेटा सुरक्षा अहम
आधार ऑफलाइन वेरिफिकेशन का विस्तार डिजिटल सेवाओं को आसान बना सकता है, लेकिन संस्थाओं के लिए सहमति लेना, जानकारी का सीमित उपयोग करना और डेटा को सुरक्षित रखना जरूरी रहेगा। उपयोगकर्ताओं को भी किसी सेवा के लिए अपनी पहचान साझा करते समय यह समझना चाहिए कि कौन-सी जानकारी मांगी जा रही है और उसका उपयोग किस उद्देश्य से होगा।
UIDAI ने इस विस्तार को पेपरलेस सत्यापन व्यवस्था की दिशा में अहम कदम बताया है। इससे सेवा प्रदाताओं और नागरिकों, दोनों के लिए पहचान की जांच अधिक सुविधाजनक बनाने की संभावना है।
स्रोत: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) की जानकारी, प्रेस सूचना ब्यूरो के माध्यम से 5 नवंबर 2026 को जारी।
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