नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: केंद्र सरकार ने बलात्कार और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों से जुड़े मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) योजना को आगे पांच साल तक जारी रखने की मंजूरी दी है। यह विस्तार वित्त वर्ष 2026-27 से लागू अवधि के लिए है। सरकार का घोषित उद्देश्य ऐसे संवेदनशील मामलों की सुनवाई में तेजी लाना और लंबित मामलों के निपटारे में विशेष अदालतों की भूमिका मजबूत करना है।
किन मामलों पर रहेगा विशेष जोर?
प्रेस सूचना ब्यूरो के अनुसार, केंद्र ने बलात्कार और POCSO (Protection of Children from Sexual Offences) अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए केंद्र प्रायोजित योजना को पांच वर्ष के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। इस व्यवस्था में विशेष अदालतों के माध्यम से मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दी जाती है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत क्यों?
यौन अपराधों से जुड़े मामलों में समय पर सुनवाई पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए महत्वपूर्ण होती है। लंबी कानूनी प्रक्रिया, गवाहों की उपलब्धता और जांच से जुड़े मुद्दे मामलों के निपटारे को प्रभावित कर सकते हैं। विशेष अदालतों का उद्देश्य ऐसे मामलों को सामान्य लंबित सूची से अलग प्राथमिकता देकर सुनवाई को व्यवस्थित करना है।
योजना के असर की कसौटी
योजना के विस्तार के साथ अदालतों में पर्याप्त न्यायिक व सहायक स्टाफ, अभियोजन की तैयारी, पीड़ित सहायता और गवाह संरक्षण जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी रहेंगी। केवल योजना जारी रहने से सभी मामलों का त्वरित निपटारा सुनिश्चित नहीं होता; वास्तविक परिणाम अदालतों की क्षमता और राज्य स्तर पर क्रियान्वयन पर निर्भर करेंगे।
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स्रोत: Press Information Bureau (PIB)
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