
आरटीआइ मे उत्तरपुस्तिका की प्रतिलिपि से हजारो विघार्थियों को मिलेगी राहत - मृदुल
आरटीआइ मे उत्तरपुस्तिका की प्रतिलिपि से हजारो विघार्थियों को मिलेगी राहत – मृदुल
देश मे 12 अक्टूबर को आरटीआई एक्ट की स्थापना का उद्देश्य शासन एवं प्रशासन मे पारदर्शिता लाना था परन्तु बृज विवि आरटीआइ एक्ट के नियमो का उल्लंघन करता नजर आ रहा है हालांकि बीएड छात्र मृदुल कृष्ण भारद्वाज ने बृज विवि के नियमो को ही चुनौती दे डाली एवं छात्र की जिद के आगे विवि को अपने नियम बदलने पडे और आयोग द्वारा अपने पक्ष मे निर्णय कर हजारो विघार्थियों को राहत दिला दी
मृदुल ने बताया कि उन्होने बृज विवि से स्वयं की बीएड की उत्तरपुस्तिका की छायाप्रति हेतु आरटीआइ एक्ट के तहत आवेदन किया परन्तु विवि द्वारा उत्तरपुस्तिका के 580 ₹ रु जमा कराने एवं पुनमूल्याकन हेतु आवेदन की कहा एवं मृदुल द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी को पत्र द्वारा अवगत कराया गया कि उन्होने आरटीआइ एक्ट के तहत आवेदन किया ना कि पुनमूल्याकन ,विवि द्वारा प्रथम अपीलीय अपीलोत्तर मे वाक्य सुधार किया गया एवं बताया गया कि उत्तरपुस्तिका विशेष प्रावधान से राजस्थान विवि के नियमो के तहत उपलब्ध करवाई जाती है
आयोग के निर्णय ने दी राहत -मृदुल
मृदुल बताते है कि दो वर्षो की लम्बी लडाई के पश्चात विवि द्वारा 25 फरवरी को आयोग द्वारा निर्णय दिया कि अपीलार्थी आरटीआई एक्ट के प्रावधानो के अनुसार निर्धारित विहित शुल्क पर सूचना पाने का अधिकारी है विवि आदेश की प्राप्ति के 21 दिवस की अवधि मे अपीलार्थी द्वारा मांगी गई विषयो कि उत्तरपुस्तिका की पृष्ठ संख्या बताकर दो रूपये प्रति पृष्ठ की दर से नियम चार मे विहित प्रावधान के तहत उपलब्ध करवाएं
विवि को उत्तरपुस्तिका के सुरक्षित रखने के लिए भी मृदुल ने पत्र लिखा कि जब तक आयोग का निर्णय ना हो जाएं मेरी उत्तरपुस्तिका सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी विवि की बनती है
दो रूपये से अधिक शुल्क वसूलना विधि विरूद्ध – हाईकोर्ट
वर्ष 2012 मे अल्का मटोरिया बनाम महाराजा गंगा सिंह विवि बीकानेर एवं रज्जाक खान बनाम जेएनवीयू जोधपुर के निर्णय मे भी कोर्ट द्वारा आरटीआइ एक्ट के तहत दो रूपये प्रति पृष्ठ से उत्तरपुस्तिका उपलब्ध कराने का आदेश विवि को मानना पडा
सीबीएसई का निर्णय बना आधार
बृज विवि द्वारा अपने पत्र मे कहा गया कि जब तक कुमार शानु बनाम सीबीएसई का निर्णय नही आ जाता तब तक राजस्थान विवि के नियम ही मान्य रहेगे सुप्रीम कोर्ट द्वारा 29 अक्टूबर 2018 के निर्णय दिया गया कि उत्तरपुस्तिका की प्रतिलिपि का शुल्क दो रूपये प्रति पृष्ठ होगा
रद्दी का दिया हवाला
आयोग के निर्णय की प्रति मिलने मे देरी के कारण रद्दी मे दिए जाने का हवाला दिया गया जो कि न्यायसंगत प्रतीत नही होता है

मृदुल बताते है कि सभी विवि ने अपने तरीको से आरटीआइ एक्ट को शिथिल कर रखा है जो कि उल्लंघन नजर आता है
मृदुल आरटीआइ के क्षेत्र मे काफी सकिय है वह युवा विकास केन्द्र के स्पीकर , गणित विशेषज्ञ दिशारी एप , संस्थापक एलुमिनि समिति राजकीय महाविद्यालय धौलपुर एवं बाल अधिकारिता विभाग मे परामर्शदाता रहे है
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