मध्य प्रदेश के करीब 99 हजार शिक्षकों को पुरानी पेंशन का लाभ देने का हाईकोर्ट का निर्देश

मध्य प्रदेश शिक्षक पुरानी पेंशन को लेकर हाईकोर्ट के एक महत्वपूर्ण निर्देश से राज्य के हजारों शिक्षकों को राहत मिलने की संभावना बनी है। द हॉक में प्रकाशित IANS की 7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 1998 से 2005 के बीच नियुक्त लगभग 99 हजार शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने उनके राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) खातों में जमा राशि को OPS व्यवस्था में स्थानांतरित करने का भी आदेश दिया है।

ग्वालियर खंडपीठ का आदेश

रिपोर्ट के मुताबिक, यह आदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने न्यायमूर्ति आनंद सिंह बहारावत की पीठ से पारित किया। मामला शिक्षिका करुणा शर्मा की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। विवाद का मुख्य बिंदु 2018 में संवर्ग के विलय और नियुक्ति की प्रकृति से जुड़ा था। राज्य की ओर से यह तर्क दिया गया था कि संवर्ग विलय के बाद की स्थिति को नई नियुक्ति माना जाए, जबकि याचिकाकर्ता पक्ष ने पूर्व सेवा और नियुक्ति तिथि के आधार पर पेंशन लाभ का दावा किया।

करीब 99 हजार शिक्षकों पर संभावित असर

रिपोर्ट में प्रभावित शिक्षकों की संख्या लगभग 99 हजार बताई गई है। यह संख्या समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में उल्लिखित लगभग संख्या है; अंतिम लाभार्थियों की सूची विभागीय सत्यापन और आदेश के अनुपालन से स्पष्ट होगी। पुरानी पेंशन योजना और NPS में पेंशन निर्धारण, अंशदान और भुगतान की व्यवस्था अलग-अलग है। आदेश का वास्तविक वित्तीय प्रभाव संबंधित सेवा रिकॉर्ड, नियुक्ति तिथि और खाते में जमा राशि के सत्यापन के बाद सामने आएगा।

शिक्षकों के लिए आगे क्या जरूरी?

प्रभावित शिक्षकों को नियुक्ति आदेश, सेवा पुस्तिका, संवर्ग संबंधी आदेश और NPS खाते के विवरण सुरक्षित रखने चाहिए। व्यक्तिगत पात्रता को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग या जिला शिक्षा कार्यालय से आधिकारिक निर्देश लेना जरूरी होगा। अदालत के आदेश की प्रमाणित प्रति और सरकार की अनुपालन अधिसूचना से यह स्पष्ट होगा कि आवेदन या दस्तावेज जमा करने की अलग प्रक्रिया तय की गई है या नहीं।

सरकार के अनुपालन पर रहेगी नजर

अदालत का निर्देश महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव है, लेकिन लाभ का क्रियान्वयन सरकारी विभागों द्वारा रिकॉर्ड मिलान और आदेश के पालन पर निर्भर करेगा। शिक्षकों को सोशल मीडिया पर प्रसारित अपुष्ट समय-सीमा या भुगतान संबंधी दावों पर भरोसा करने के बजाय विभागीय आदेश देखना चाहिए।

यह रिपोर्ट उपलब्ध IANS समाचार पर आधारित है। किसी कर्मचारी की पात्रता का निर्धारण उसके सेवा रिकॉर्ड और लागू आदेशों के अनुसार होगा।

स्रोत: The Hawk / IANS, 7 नवंबर 2026


DLP News TV24 से जुड़े रहें

वेबसाइट: https://dlpnewstv.com
YouTube: DLP News TV24 | Facebook: Facebook | X: X
WhatsApp पर खबरें पाने के लिए हमारे न्यूज़ ग्रुप से जुड़ें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *