बिहार में ‘नदी संजीवनी’ पहल: गाद से बनेंगे हाईवे, 1,078 लाख घनमीटर का अनुमान

नदी संजीवनी पहल के तहत बिहार में नदी की गाद हटाने और हाईवे निर्माण का प्रतीकात्मक चित्र
प्रतीकात्मक चित्र

बिहार में नदियों और जलाशयों की वैज्ञानिक तरीके से गाद निकालकर उपयुक्त सामग्री को राष्ट्रीय राजमार्ग निर्माण में इस्तेमाल करने की योजना बनाई गई है। नदी संजीवनी पहल के तहत सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) और बिहार सरकार ने 3 नवंबर 2026 को इस संबंध में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

कितनी गाद का इस्तेमाल प्रस्तावित है?

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक 16 चालू राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में 243 लाख घनमीटर उपयुक्त गाद इस्तेमाल की जाएगी। इसके अलावा 27 भविष्य की परियोजनाओं के लिए 835 लाख घनमीटर गाद के उपयोग का प्रस्ताव है। भविष्य की परियोजनाओं वाला आंकड़ा प्रस्तावित है; इसका उपयोग तकनीकी उपयुक्तता और जरूरी मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

MoU नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में हुआ। योजना का उद्देश्य नदियों की जल-वहन क्षमता बहाल करना, जल निकासी सुधारना, बाढ़ प्रबंधन मजबूत करना और कृषि भूमि को बचाना है।

गाद निकालने के साथ पर्यावरणीय सावधानियां

PIB के अनुसार निकाली गई सामग्री का उपयोग ताजा मिट्टी और कृषि भूमि पर निर्भरता घटाने के लिए किया जाएगा। कार्यान्वयन बिहार सरकार के साथ समन्वय, तकनीकी आकलन और सुरक्षा उपायों के तहत होना है। इसलिए सभी नदियों की गाद को बिना जांच सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा, ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।

आधिकारिक स्रोत: PIB की 3 नवंबर 2026 की MoRTH प्रेस विज्ञप्ति।

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