जैसलमेर, 4 नवंबर 2026। पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती जिले जैसलमेर में रक्षा मंत्रालय की संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में भारतीय सशस्त्र बलों के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा निर्माण और नई तकनीकों को सैन्य क्षमता से जोड़ने पर चर्चा हुई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 3 नवंबर को हुई इस बैठक की अध्यक्षता की।
रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बैठक का विषय ‘भारतीय रक्षा बलों का आधुनिकीकरण’ था। चर्चा में बदलती सुरक्षा चुनौतियों के अनुरूप सेना को तकनीकी रूप से सक्षम, चुस्त और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार बनाने पर जोर दिया गया।
रक्षा बजट में ₹7.85 लाख करोड़ का प्रावधान
राजनाथ सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रक्षा बजट बढ़ाकर रिकॉर्ड ₹7.85 लाख करोड़ किया गया है। इसमें आधुनिकीकरण और पूंजीगत खरीद के लिए ₹2.19 लाख करोड़ का पूंजीगत प्रावधान शामिल है। मंत्रालय के मुताबिक, बजटीय संसाधनों के साथ-साथ जरूरी क्षमताओं को प्राथमिकता देना और आवंटित राशि का प्रभावी इस्तेमाल भी अहम रहेगा।
2029 तक रक्षा उत्पादन और निर्यात बढ़ाने का लक्ष्य
बैठक में रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की प्रगति का भी उल्लेख किया गया। रक्षा मंत्री के अनुसार, देश का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2014-15 के ₹46,429 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹1.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा। वर्ष 2014 में ₹2,000 करोड़ से कम रहा रक्षा निर्यात अब लगभग ₹40,000 करोड़ बताया गया।
सरकार ने 2029 तक रक्षा उत्पादन को ₹3 लाख करोड़ और रक्षा निर्यात को ₹50,000 करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। इस दिशा में घरेलू उद्योग, स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों तथा शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।
ड्रोन, साइबर और अंतरिक्ष तकनीक पर ध्यान
जैसलमेर रक्षा आधुनिकीकरण बैठक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, स्वायत्त प्रणालियों, मानवरहित प्लेटफॉर्म, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और उन्नत संचार तकनीक को भविष्य की सैन्य तैयारियों के अहम हिस्से के रूप में रेखांकित किया गया। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO), रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों, निजी कंपनियों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग मजबूत करने की जरूरत भी सामने रखी गई।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक सैन्य क्षमता केवल नए हथियार खरीदने तक सीमित नहीं है। इसमें जवानों का प्रशिक्षण, संचालन की तैयारी, स्वदेशी तकनीक और लंबे समय तक काम आने वाली क्षमताओं का विकास भी शामिल है।
सेना की नई संरचनाओं का भी उल्लेख
रक्षा मंत्रालय की विज्ञप्ति में भारतीय सेना की ‘असनी’, ‘भैरव’ और ‘शक्तिबाण’ प्लाटून का उल्लेख किया गया। मंत्रालय के अनुसार, ये नई संरचनाएं बदलती युद्ध परिस्थितियों और परिचालन जरूरतों के अनुरूप सेना को तैयार करने के प्रयास का हिस्सा हैं।
बैठक में लोकसभा और राज्यसभा के सदस्यों ने भी सुझाव दिए। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और रक्षा उत्पादन, पूर्व सैनिक कल्याण तथा रक्षा वित्त विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल हुए।
रक्षा मंत्रालय की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में बैठक के प्रमुख बिंदु और सरकार के रक्षा उत्पादन एवं निर्यात लक्ष्य साझा किए गए हैं। राजस्थान से जुड़ी अन्य खबरें यहां पढ़ें।

