धौलपुर फरार गांजा तस्कर गिरफ्तार होने के बाद पुलिस अभिरक्षा से फरार आरोपी की तलाश का अभियान समाप्त हुआ। STV News Rajasthan की 7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 25 हजार रुपये का इनामी आरोपी टी. श्रीनिवास महाराष्ट्र के नागपुर से पकड़ा गया। पुलिस के अनुसार, वह 25 अक्टूबर को दिहोली थाने की खिड़की तोड़कर फरार हुआ था और गिरफ्तारी से बचने के लिए अलग-अलग शहरों में ठिकाने बदल रहा था।
कैसे शुरू हुआ मामला?
रिपोर्ट में दिहोली थाना प्रभारी शैतान सिंह के हवाले से बताया गया कि 17 अक्टूबर 2026 को मनिया थाना पुलिस ने राष्ट्रीय राजमार्ग-44 पर नाकाबंदी के दौरान एक चार पहिया वाहन को रोका था। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी। वाहन से टी. श्रीनिवास और उसके एक साथी को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने वाहन से दो क्विंटल से अधिक गांजा बरामद होने और उसकी अनुमानित कीमत करीब 1 करोड़ 30 लाख रुपये होने की बात कही थी। यह आंकड़ा पुलिस द्वारा बताई गई कीमत है।
थाने से फरारी के बाद कई शहरों में तलाश
STV की रिपोर्ट के अनुसार, 25 अक्टूबर की रात आरोपी दिहोली थाने की खिड़की तोड़कर पुलिस अभिरक्षा से फरार हुआ। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की। खबर में बताया गया है कि आरोपी खेतों के रास्ते लगभग 12 किलोमीटर पैदल चला और फिर अलग-अलग साधनों से आगरा, वाराणसी तथा अन्य शहरों की ओर गया। पुलिस के अनुसार उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए सिर और मूंछों का मुंडन भी कराया था। छह दिन तक चले तलाशी अभियान के बाद 6 नवंबर को नागपुर में गिरफ्तारी की गई।
जांच और पुलिस अभिरक्षा पर उठते सवाल
किसी आरोपी का थाने से फरार होना पुलिस सुरक्षा व्यवस्था और हिरासत प्रबंधन से जुड़े सवाल खड़े करता है। ऐसे मामलों में यह जांचना जरूरी होता है कि थाने की सुरक्षा व्यवस्था में कौन-सी चूक हुई, निगरानी किस स्तर पर थी और फरारी के बाद आरोपी किन रास्तों से बाहर निकला। उपलब्ध रिपोर्ट में फरारी और गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, लेकिन विभागीय जांच या जिम्मेदारी तय होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को संबंधित अदालत में पेश किया जाना और जांच एजेंसी द्वारा पूछताछ करना सामान्य कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है। मूल गांजा बरामदगी मामले में भी जांच और न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। आरोपी पर लगे आरोपों का अंतिम फैसला अदालत करेगी।
धौलपुर और चंबल क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी पर कार्रवाई के साथ-साथ सीमावर्ती मार्गों पर निगरानी भी महत्वपूर्ण है। इस मामले में पुलिस द्वारा बताई गई बरामदगी, फरारी और गिरफ्तारी की जानकारी को आधिकारिक जांच के निष्कर्षों से अलग समझना चाहिए।
स्रोत: STV News Rajasthan, 7 नवंबर 2026
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