केंद्र सरकार ने डिजिटल समाचार प्रकाशकों और OTT प्लेटफॉर्म के लिए ऑनलाइन सामग्री से जुड़े नियमों के पालन पर नई सलाह जारी की है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 2 नवंबर 2026 की एडवाइजरी में विजुअल के मूल समय और स्थान का उल्लेख करने, AI से बनी सामग्री की जांच करने और अपराध, हादसों तथा संवेदनशील घटनाओं की रिपोर्टिंग में सावधानी बरतने को कहा गया है। मंत्रालय की वेबसाइट पर यह दस्तावेज 3 नवंबर को सूचीबद्ध हुआ।
एडवाइजरी का दायरा OTT प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन न्यूज और करंट अफेयर्स कंटेंट प्रकाशित करने वाले डिजिटल न्यूज पब्लिशर्स तथा इंटरमीडियरीज तक है। मंत्रालय ने कहा है कि ऑनलाइन प्रकाशित सामग्री सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 और उसके तहत बने नियमों के अनुरूप होनी चाहिए। दस्तावेज किसी खास मीडिया संस्थान का नाम नहीं लेता और इसमें किसी नई सजा या अलग दंड का ऐलान नहीं किया गया है।
डिजिटल न्यूज एडवाइजरी में किन नौ बिंदुओं पर जोर?
1. विजुअल का समय, स्थान और संदर्भ: पुरानी या असंबंधित तस्वीरों-वीडियो को ताजा घटना बताकर पेश करने से बचने को कहा गया है। सलाह है कि फोटो और वीडियो के साथ मूल तारीख, स्थान और संदर्भ स्पष्ट किया जाए। बाहरी स्रोत या सोशल मीडिया से लिए गए विजुअल के साथ स्रोत का उल्लेख भी किया जाए।
2. आतंकवाद-रोधी अभियानों की लाइव कवरेज: चल रहे अभियान के दौरान सुरक्षा बलों की वास्तविक तैनाती, रणनीतिक स्थान, आवाजाही या पहुंच मार्ग जैसी जानकारी लाइव साझा न करने की सलाह दी गई है। ऐसी रिपोर्टिंग अधिकृत अधिकारी की ब्रीफिंग और कानूनन उपलब्ध जानकारी पर आधारित होनी चाहिए।
3. हिंसक और विचलित करने वाले दृश्य: ग्राफिक या परेशान करने वाले विजुअल प्रकाशित करते समय संपादकीय विवेक बरतने और जरूरत पड़ने पर ब्लर या मास्किंग करने को कहा गया है।
4. अपराध और हिंसा की रिपोर्टिंग: अपराध से जुड़े फोटो, वीडियो, हेडलाइन, थंबनेल और कैप्शन सत्यापित तथ्यों के अनुरूप होने चाहिए। महिलाओं और बच्चों से जुड़ी सामग्री में अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह है।
5. आपदा और बड़े हादसे: प्राकृतिक आपदा, दुर्घटना या बड़ी घटना के विजुअल में जरूरत के अनुसार तारीख और समय स्पष्ट करना चाहिए, ताकि पुराने दृश्य से अनावश्यक भय या भ्रम न फैले।
6. भारत का आधिकारिक नक्शा: मंत्रालय ने सामग्री में सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा प्रकाशित प्रामाणिक नक्शों के इस्तेमाल की सलाह दी है।
7. धार्मिक और भाषाई समुदायों का चित्रण: समुदायों से जुड़े बयान, आरोप, अनुवाद और विजुअल सही संदर्भ में प्रस्तुत किए जाएं। ऐसी प्रस्तुति से बचना चाहिए जो वैमनस्य या हिंसा को बढ़ावा दे।
8. यौन अपराध पीड़ितों की पहचान: पीड़ित की पहचान उजागर करने वाले सीधे या परोक्ष विवरण, फोटो, परिवार की जानकारी या स्थानीय पहचान प्रकाशित न करने के कानूनी निर्देश दोहराए गए हैं। एडवाइजरी में सुप्रीम कोर्ट के Nipun Saxena बनाम Union of India मामले का उल्लेख है।
9. AI और सिंथेटिक सामग्री: AI से बनी या महत्वपूर्ण रूप से बदली गई तस्वीर, वीडियो और ऑडियो की जांच करने, वास्तविक व्यक्तियों या घटनाओं से जुड़ी सिंथेटिक सामग्री का उचित खुलासा करने और नकली सामग्री को असली फुटेज या बयान की तरह पेश होने से रोकने की सलाह दी गई है।
डिजिटल न्यूज पोर्टलों के लिए इसका क्या मतलब है?
एडवाइजरी का व्यावहारिक असर न्यूज़रूम की संपादकीय जांच पर पड़ेगा। किसी पुरानी तस्वीर को फाइल फोटो या प्रतीकात्मक चित्र बताना, वीडियो का मूल संदर्भ जांचना, AI विजुअल को वास्तविक घटना का प्रमाण न बनाना और अपराध संबंधी हेडलाइन को उपलब्ध तथ्यों तक सीमित रखना जरूरी है। इंटरमीडियरीज को भी IT Act की धारा 79 और IT Rules, 2021 के तहत लागू due-diligence दायित्वों पर ध्यान देने को कहा गया है।
मंत्रालय ने डिजिटल प्रकाशकों से संपादकीय और कंटेंट-रिव्यू प्रक्रिया मजबूत करने तथा कंटेंट बनाने और प्रकाशित करने वाली टीमों के लिए प्रशिक्षण और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने को भी कहा है।
मूल सरकारी दस्तावेज: सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की 2 नवंबर 2026 की एडवाइजरी (PDF)।
डिजिटल सुरक्षा और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ी अन्य खबरें भी पढ़ें: CERT-In की साइबर सुरक्षा चेतावनी और AI टूल्स में नए सुरक्षा नियम।
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