
1 शानदार आयोजन: फिरोजाबाद में आरएसएस (RSS) के शताब्दी वर्ष पर भव्य ‘बाल कुंभ’, 275 स्वयंसेवकों ने दिखाया अद्भुत उत्साह
dlpnewstv.com न्यूज़ डेस्क: राष्ट्र निर्माण और युवाओं में देशभक्ति की भावना जागृत करने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद महानगर में एक शानदार और ऐतिहासिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के आगामी शताब्दी वर्ष (100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में) की तैयारियों के तहत नगर में एक भव्य ‘बाल कुंभ’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। यह विशेष कार्यक्रम शहर के प्रतिष्ठित श्री स्वामी बच्चू बाबा सरस्वती विद्या मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ।
इस कार्यक्रम ने पूरे वातावरण को देशभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर कर दिया। इस अद्भुत बाल कुंभ में महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से आए 275 बाल स्वयंसेवकों ने अत्यंत उत्साह और अनुशासन के साथ भाग लिया।
यह कार्यक्रम केवल एक सामान्य एकत्रीकरण नहीं था, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास को दिशा देने का एक सकारात्मक प्रयास था।
आज के डिजिटल युग में, जहाँ बच्चे मोबाइल और स्क्रीन तक सीमित होते जा रहे हैं, वहाँ मैदान पर उतरकर पारंपरिक खेलों और देशभक्ति के गीतों में उनकी सहभागिता एक अत्यंत सुखद संदेश देती है।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में फिरोजाबाद में हुआ भव्य बाल कुंभ।
- श्री स्वामी बच्चू बाबा सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित हुआ यह विशाल एकत्रीकरण।
- महानगर के 10 नगरों से चुने गए 275 बाल स्वयंसेवकों ने लिया उत्साहपूर्वक भाग।
- विभाग प्रचारक अखिलेश ने भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ।
- जलेबी दौड़, रस्साकसी और कबड्डी जैसे पारंपरिक खेलों का हुआ शानदार आयोजन।
- महापुरुषों की पहचान और देशभक्ति गीतों के माध्यम से बच्चों में जगाई गई राष्ट्रभक्ति।
आरएसएस का शताब्दी वर्ष: राष्ट्र निर्माण की एक सदी
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना 1925 में विजयादशमी के दिन डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा की गई थी। वर्ष 2025 में संघ अपने स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है।
इस ‘शताब्दी वर्ष’ को पूरे देश में अत्यंत भव्य और शानदार तरीके से मनाने की तैयारियां जोरों पर हैं।
इसी कड़ी में फिरोजाबाद महानगर में आयोजित यह ‘बाल कुंभ’ शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित होने वाले विशेष कार्यक्रमों की एक महत्वपूर्ण श्रृंखला का हिस्सा है।
संघ का हमेशा से यह मानना रहा है कि किसी भी राष्ट्र का भविष्य उसकी युवा और बाल पीढ़ी के हाथों में होता है। बाल स्वयंसेवक ही वह नींव हैं जिस पर एक सशक्त समाज का निर्माण होता है।
बाल कुंभ जैसे आयोजनों का मुख्य उद्देश्य बचपन से ही बच्चों के भीतर राष्ट्रप्रेम, समाज सेवा, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के प्रति गहरी आस्था के बीज बोना है।
इस अद्भुत आयोजन के माध्यम से फिरोजाबाद के बच्चों ने यह साबित कर दिया कि वे देश की सांस्कृतिक विरासत को आगे ले जाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
कार्यक्रम की रूपरेखा: 10 नगरों से 275 बाल स्वयंसेवकों का शानदार चयन
श्री स्वामी बच्चू बाबा सरस्वती विद्या मंदिर का प्रांगण सुबह से ही बच्चों की किलकारियों और देशभक्ति के नारों से गूंज रहा था। इस भव्य बाल कुंभ के लिए महानगर स्तर पर एक व्यापक योजना बनाई गई थी।
आयोजकों ने जानकारी दी कि पूरे फिरोजाबाद महानगर को संगठनात्मक दृष्टि से विभिन्न ‘नगरों’ (इलाकों) में विभाजित किया गया है।
इस विशेष कुंभ के लिए महानगर के 10 नगरों से लगभग 25-25 ऊर्जावान बाल स्वयंसेवकों का चयन किया गया था। इस प्रकार कुल 275 बच्चों ने इस एकत्रीकरण में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
चयन प्रक्रिया में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया था कि सभी प्रतिभागी संघ की दैनिक शाखाओं और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हों।
एक साथ इतने सारे बच्चों का पूर्ण गणवेश (यूनिफॉर्म) में और पूर्ण अनुशासन के साथ उपस्थित होना एक बेहद सुखद और अद्भुत दृश्य प्रस्तुत कर रहा था।
दीप प्रज्वलन और विभाग प्रचारक अखिलेश का प्रेरक उद्बोधन
कार्यक्रम का विधिवत और शानदार शुभारंभ चंद्रनगर विभाग के विभाग प्रचारक श्री अखिलेश जी द्वारा किया गया।
उन्होंने सबसे पहले भारत माता और संघ के संस्थापकों के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर और पुष्पार्चन कर कार्यक्रम को आध्यात्मिक और राष्ट्रीय गरिमा प्रदान की। इसके बाद ध्वजारोहण और संघ की प्रार्थना संपन्न हुई।
अपने मुख्य उद्बोधन (भाषण) में विभाग प्रचारक अखिलेश जी ने वहां उपस्थित सैकड़ों बाल स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
उन्होंने इस बाल कुंभ को संघ के शताब्दी वर्ष के विशेष कार्यक्रमों में अत्यंत महत्वपूर्ण और मील का पत्थर बताया।
अखिलेश जी ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि, “इस कुंभ में भाग लेने वाले आप सभी बाल स्वयंसेवकों के लिए यह एक ऐसा अद्भुत अनुभव है जो आपके जीवनभर यादगार रहेगा।”
शिक्षा और शारीरिक मजबूती का सुखद संतुलन
विभाग प्रचारक अखिलेश जी ने अपने भाषण में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और समसामयिक विषय पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान (General Knowledge) की मजबूती और उनमें देशभक्ति (Patriotism) की भावना का विकास करना सबसे बड़ी आवश्यकता है।
केवल किताबी ज्ञान किसी भी व्यक्ति को पूर्ण नहीं बनाता। उन्होंने बच्चों को और वहां उपस्थित अभिभावकों व शिक्षकों को संदेश देते हुए स्पष्ट किया कि बच्चों के जीवन में केवल पढ़ाई और किताबें ही पर्याप्त नहीं हैं।
शिक्षा के साथ-साथ शारीरिक मजबूती (Physical Fitness) और मैदान पर पसीना बहाना भी उतना ही आवश्यक है।
उन्होंने कहा, “मैदानी खेलकूद और व्यायाम बच्चों को केवल शारीरिक रूप से ही मजबूत नहीं करते, बल्कि उन्हें टीम भावना (Team Spirit), हार को स्वीकार करने का साहस और जीतने का संघर्ष भी सिखाते हैं।”
पारंपरिक खेलों का अद्भुत रोमांच: जलेबी दौड़ और कबड्डी
बौद्धिक सत्र के पश्चात श्री स्वामी बच्चू बाबा सरस्वती विद्या मंदिर का मैदान एक शानदार खेल महोत्सव में तब्दील हो गया।
बच्चों के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए आयोजकों ने पूरी तरह से पारंपरिक और स्वदेशी खेलों की प्रतियोगिताएं आयोजित कीं। इन खेलों का उद्देश्य बच्चों को अपनी जड़ों से जोड़ना और उनमें शारीरिक स्फूर्ति पैदा करना था।
सबसे पहले जलेबी दौड़ का आयोजन किया गया, जिसने पूरे प्रांगण में हंसी और उल्लास का सुखद माहौल बना दिया। बच्चों ने पीछे हाथ बांधकर लटकती हुई जलेबियों को खाने और दौड़ जीतने का जो अद्भुत प्रयास किया, उसने सभी का मन मोह लिया।
इसके बाद रस्साकसी (Tug-of-war) की भव्य प्रतियोगिता हुई। दो अलग-अलग टीमों के बीच हुए इस शक्ति प्रदर्शन में बच्चों ने अपनी पूरी ताकत लगा दी।
खेलों के इस क्रम में भारत का पारंपरिक और सबसे लोकप्रिय खेल कबड्डी भी खेला गया। कबड्डी के मैदान पर धूल में सने बाल स्वयंसेवकों ने जो रणनीति और दमखम दिखाया, वह देखने लायक था।
बौद्धिक विकास: देशभक्ति गीत और महापुरुषों की पहचान
बाल कुंभ केवल शारीरिक खेलों तक सीमित नहीं था; इसमें बच्चों के मानसिक और सांस्कृतिक बौद्धिक विकास पर भी उतना ही ध्यान दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों को प्रेरक देशभक्ति गीतों का अभ्यास कराया गया। समूह में गाए गए इन गीतों ने बच्चों के हृदय में राष्ट्र के प्रति समर्पण का भव्य भाव जागृत किया।
इसके अतिरिक्त, एक अत्यंत रचनात्मक ‘महापुरुषों की पहचान प्रतियोगिता’ का आयोजन किया गया।
इस प्रतियोगिता में भारत के स्वतंत्रता सेनानियों, वैज्ञानिकों, ऋषियों और समाज सुधारकों के चित्र दिखाकर या उनके कार्यों का वर्णन कर बच्चों से उनके नाम पूछे गए।
इस प्रतियोगिता में बच्चों ने बेहद सक्रिय और शानदार रूप से भाग लिया। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि नई पीढ़ी अपने देश के असली नायकों को जाने।
संगठन के कर्मठ कार्यकर्ताओं की अहम उपस्थिति
इतने विशाल और भव्य कार्यक्रम को सफल बनाने के पीछे संघ के कई वरिष्ठ और युवा कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत शामिल थी।
इस बाल कुंभ के पावन अवसर पर आरएसएस के कई प्रमुख पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरी व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित किया।
प्रमुख रूप से महानगर प्रचारक शेखर, महानगर विद्यार्थी प्रचारक दिलीप, वर्ग पालक डॉ. वीरेंद्र, रामकुमार, पवन, प्रेम, विद्यार्थी प्रमुख कुनाल, बाल प्रमुख हर्ष उपस्थित रहे।
इसके साथ ही युवा कार्यकर्ताओं में पारस, आयुष, शिवम, अर्पण और रुद्राक्ष सहित भारी संख्या में दायित्ववान कार्यकर्ताओं ने अपनी सक्रिय और शानदार भागीदारी दर्ज कराई।
निष्कर्ष और प्रधानाचार्य प्रमोद वर्मा का प्रेरक समापन
दिन भर चले इस अद्भुत और ऊर्जामय कार्यक्रम का समापन एक बेहद सकारात्मक और शांतिपूर्ण तरीके से हुआ।
कार्यक्रम का औपचारिक समापन श्री स्वामी बच्चू बाबा सरस्वती विद्या मंदिर के प्रधानाचार्य श्री प्रमोद वर्मा जी के कर कमलों और उद्बोधन से हुआ।
प्रधानाचार्य प्रमोद वर्मा ने अपने समापन भाषण में बताया कि विद्यालय शिक्षा का मंदिर है, लेकिन संघ की शाखा और ऐसे बाल कुंभ जैसे आयोजन बच्चों की वह पाठशाला हैं जहाँ जीवन के वास्तविक मूल्य सिखाए जाते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे भव्य आयोजन बच्चों के सर्वांगीण विकास में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में, सभी स्वयंसेवकों ने ‘प्रार्थना’ की और अनुशासन के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। यह आयोजन निश्चित रूप से एक सशक्त भारत के निर्माण में अहम योगदान देगा।
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