
1 शानदार पहल: बाल विवाह रोकने के लिए धौलपुर प्रशासन का खौफनाक एक्शन, 24 घंटे खुलेगा सुखद कंट्रोल रूम
dlpnewstv.com विशेष सामाजिक रिपोर्ट: राजस्थान के ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में आज भी बाल विवाह जैसी कुप्रथा पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है। हर साल हिंदू पंचांग के वैशाख मास (विशेषकर आखातीज/अक्षय तृतीया) में अबूझ सावे (बिना मुहूर्त निकाले होने वाली शादियां) होते हैं।
इन अबूझ सावों की आड़ में कई मासूम बच्चों को शादी के खौफनाक और जीवन भर के बंधन में बांध दिया जाता है। इस भीषण सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए इस बार धौलपुर जिला प्रशासन और पुलिस महकमे ने एक बहुत ही शानदार और सख्त कदम उठाया है।
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी सूरत में जिले के भीतर बाल विवाह नहीं होने दिए जाएंगे। इसके लिए बाकायदा जिला स्तर और उपखंड स्तर पर 24 घंटे काम करने वाले कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं।
- वैशाख मास के अबूझ सावों पर बाल विवाह रोकने के लिए जिला कलेक्टर श्री निधि बीटी का कड़ा एक्शन।
- जिला मुख्यालय सहित सभी उपखंडों में 24 घंटे एक्टिव रहने वाले सुखद कंट्रोल रूम स्थापित।
- आमजन की सुविधा और सूचना गुप्त रखने के लिए प्रशासन ने जारी किए विशेष व्हाट्सएप नंबर।
- विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से एडीजे सुनील कुमार गुप्ता ने निकाली स्कूली बच्चों की जागरूकता रैली।
- लड़की की उम्र 18 और लड़के की उम्र 21 वर्ष से कम होने पर विवाह पूर्णतः गैरकानूनी घोषित।
- बाड़ी एसडीएम भगवत शरण त्यागी ने ग्राम विकास अधिकारियों और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को किया पाबंद।
कलेक्टर श्री निधि बीटी का एक्शन प्लान: 24/7 कंट्रोल रूम और व्हाट्सएप नंबर
बाल विवाह जैसी कुरीति केवल एक सामाजिक अपराध नहीं है, बल्कि यह मासूम बच्चों के बचपन की निर्मम हत्या है। इस गंभीरता को समझते हुए धौलपुर की तेज-तर्रार जिला कलेक्टर (DM) श्री निधि बीटी ने पूरे जिले में एक अभेद्य निगरानी तंत्र विकसित किया है।
कलेक्टर के सख्त निर्देशों पर धौलपुर जिला मुख्यालय पर एक विशेष कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इस कंट्रोल रूम में कर्मचारियों की तीन शिफ्टों में 24 घंटे के लिए तैनाती (Duty) सुनिश्चित की गई है, ताकि आधी रात को भी कोई सूचना आए तो उस पर तुरंत एक्शन लिया जा सके।
अक्सर लोग पुलिस के पचड़े या गांव की रंजिश से बचने के लिए बाल विवाह की शिकायत नहीं करते। इस खौफनाक डर को दूर करने के लिए प्रशासन ने विशेष व्हाट्सएप (WhatsApp) नंबर जारी किए हैं।
कोई भी जागरूक नागरिक बिना अपनी पहचान बताए, केवल विवाह स्थल की लोकेशन या कार्ड की फोटो इन व्हाट्सएप नंबरों पर भेज सकता है। प्रशासन की ओर से गारंटी दी गई है कि सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा और शानदार त्वरित कार्रवाई की जाएगी।
कलेक्टर श्री निधि बीटी ने जिले के सभी उपखंड अधिकारियों (SDM) को भी अपने-अपने ब्लॉक मुख्यालयों पर ऐसे ही कंट्रोल रूम बनाने और ग्रामीण इलाकों के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के निर्देश दिए हैं।
विधिक सेवा प्राधिकरण की शानदार जागरूकता: बच्चों ने निकाली रैली
कानून का डंडा तभी प्रभावी होता है जब समाज में जागरूकता हो। इसी क्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (District Legal Services Authority) भी मैदान में उतर आया है। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य लोगों को कानूनी रूप से साक्षर बनाना है।
गुरुवार की सुबह शहर में एक बेहद सुखद और सकारात्मक नजारा देखने को मिला। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) सुनील कुमार गुप्ता ने बाल विवाह रोकथाम के लिए स्कूली बच्चों की एक विशाल जन-जागरूकता रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
इस रैली में शहर के विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। बच्चों के हाथों में तख्तियां और बैनर थे, जिन पर ‘बाल विवाह एक अपराध है’, ‘बचपन बचाओ’, और ‘पढ़ने की उम्र में शादी नहीं’ जैसे प्रेरक और शानदार स्लोगन लिखे हुए थे।
यह रैली शहर के सभी मुख्य बाजारों, चौराहों और प्रमुख मार्गों से होते हुए गुजरी। सड़कों पर जब मासूम बच्चों ने अपने हकों के लिए आवाज उठाई, तो हर राहगीर रुककर उन्हें देखने लगा।
रैली का समापन एडीजे (ADJ) कोर्ट कैंपस में आकर हुआ। इस रैली का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस, विशेषकर ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले लोगों के दिलों में यह बात बिठाना था कि बाल विवाह समाज के लिए कितना भीषण कलंक है।
एडीजे सुनील कुमार गुप्ता का भावुक संदेश: ‘बाल विवाह एक अभिशाप है’
रैली के समापन के बाद एडीजे सुनील कुमार गुप्ता ने बच्चों, शिक्षकों और वहां मौजूद आम नागरिकों को संबोधित किया। उनका यह भाषण कानूनी जानकारी के साथ-साथ एक गहरी भावुक अपील से भरा हुआ था।
एडीजे गुप्ता ने अत्यंत स्पष्ट शब्दों में कहा कि, “बाल विवाह कोई परंपरा नहीं, बल्कि हमारे समाज पर लगा एक खौफनाक अभिशाप है। जो माता-पिता छोटी उम्र में अपने बच्चों के हाथ पीले कर देते हैं, वे अनजाने में उनका पूरा भविष्य अंधकार में धकेल देते हैं।”
उन्होंने वैज्ञानिक और चिकित्सा दृष्टिकोण (Medical Perspective) समझाते हुए कहा कि कम उम्र में शादी होने से लड़के और लड़कियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य (Physical Health) पर बहुत बुरा और दर्दनाक प्रभाव पड़ता है। छोटी उम्र में लड़कियां मातृत्व (Motherhood) का बोझ उठाने के लिए शारीरिक रूप से तैयार नहीं होती हैं।
इससे न केवल प्रसूता (मां) की जान को भीषण खतरा रहता है, बल्कि पैदा होने वाले बच्चे भी कुपोषण (Malnutrition) का शिकार होते हैं। यह एक ऐसी चेन (Chain) है जो पूरे जीवन को और आने वाली पीढ़ियों को बर्बाद कर देती है।
एडीजे ने कानूनी प्रावधानों को दोहराते हुए जोर देकर कहा कि भारत के कानून (Prohibition of Child Marriage Act, 2006) के अनुसार लड़की की आयु कम से कम 18 वर्ष और लड़के की आयु 21 वर्ष होनी अनिवार्य है। इससे कम उम्र में किया गया विवाह शून्य (Voidable) और दंडनीय अपराध है। इस जागरूकता कार्यक्रम में स्कूली शिक्षकों के अलावा, एडीजे कोर्ट के लिपिक पंकज सेन और अन्य न्यायिक कर्मचारी भी मौजूद रहे।
बाड़ी एसडीएम भगवत शरण त्यागी का ग्राउंड जीरो पर खौफनाक अलर्ट
बाल विवाह सबसे ज्यादा ग्रामीण इलाकों में होते हैं, इसलिए वहां की जमीनी हकीकत को पकड़ना सबसे ज्यादा जरूरी है। इस दिशा में बाड़ी उपखंड के एसडीएम (SDM) भगवत शरण त्यागी ने एक बेहद शानदार और रणनीतिक कदम उठाया है।
एसडीएम त्यागी ने पंचायत स्तर पर कार्यरत सभी प्रमुख विभागों के अधिकारियों की एक आपात और महत्वपूर्ण बैठक (Meeting) आयोजित की। इस बैठक में कृषि विभाग, राजस्व विभाग (पटवारी), आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (Anganwadi Workers), ग्राम विकास अधिकारी (VDO) और ब्लॉक शिक्षा विभाग के सीबीईओ (CBEO) को विशेष रूप से तलब किया गया।
एसडीएम ने इन सभी जमीनी कर्मचारियों को स्पष्ट और सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों (Beat/Panchayat) में होने वाली हर एक शादी-ब्याह की गतिविधि पर बाज जैसी पैनी नजर रखें।
आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और पटवारियों को गांव के हर घर की जानकारी होती है। उन्हें विशेष रूप से पाबंद किया गया है कि यदि किसी भी गांव या ढाणी में कोई संदिग्ध शादी हो रही हो, जहां दूल्हा या दुल्हन नाबालिग लग रहे हों, तो उसकी सूचना तुरंत एसडीएम कार्यालय या पुलिस को दी जाए।
एसडीएम ने खौफनाक चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि किसी भी ग्राम पंचायत में बाल विवाह हुआ और संबंधित कर्मचारी ने उसकी सूचना प्रशासन को नहीं दी, तो उस कर्मचारी को बाल विवाह में संलिप्त मानकर उसके खिलाफ भीषण विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। नौकरी से बर्खास्तगी (Termination) तक की सिफारिश की जा सकती है।
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 (Prohibition of Child Marriage Act) एक बेहद कड़ा कानून है। इस कानून के तहत, बाल विवाह करवाने वाले, उसमें शामिल होने वाले (बाराती), टेंट वाले, बैंड वाले, पंडित या मौलवी, और कैटरिंग वाले भी बराबर के अपराधी माने जाते हैं। दोषी पाए जाने पर 2 साल तक की खौफनाक कठोर जेल और 1 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। यह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है, जिसमें प्रशासन बिना वारंट के भी गिरफ्तारी कर सकता है।
अबूझ सावों (आखातीज) का इतिहास और समाज की जिम्मेदारी
राजस्थान में वैशाख शुक्ल तृतीया, जिसे आखातीज या अक्षय तृतीया भी कहा जाता है, एक बहुत बड़ा और पवित्र त्योहार माना जाता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए पंचांग या मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती है। यह ‘अबूझ सावा’ होता है।
दुर्भाग्य से, इस पवित्र दिन की आड़ में ही सबसे ज्यादा बाल विवाह संपन्न कराए जाते हैं। ग्रामीण इलाकों में अशिक्षा, गरीबी और पुरानी रूढ़िवादी सोच के कारण कई परिवार एक ही मंडप में बड़ी बेटी के साथ छोटी नाबालिग बेटी की भी शादी कर देते हैं ताकि शादी का खर्च (Dowry and Event Cost) बच सके।
यह दर्दनाक सोच ही बच्चों के भविष्य के लिए सबसे बड़ा खतरा है। प्रशासन चाहे कितने भी कंट्रोल रूम बना ले या कानून लागू कर दे, लेकिन जब तक समाज के भीतर से इस भीषण बुराई के खिलाफ आवाज नहीं उठेगी, तब तक इसे पूरी तरह से रोकना असंभव है।
पंच-पटेलों, समाज सुधारकों और गांव के बुजुर्गों को आगे आकर इस कुरीति का बहिष्कार करना होगा। जिस शादी में दूल्हा या दुल्हन नाबालिग हों, पूरे गांव को उस शादी का शानदार तरीके से सामाजिक बहिष्कार कर देना चाहिए। यही वह सुखद तरीका है जिससे हम अपनी आने वाली पीढ़ी को बचा सकते हैं।
निष्कर्ष: धौलपुर को ‘चाइल्ड मैरिज फ्री’ बनाने का सुखद सपना
जिला कलेक्टर श्री निधि बीटी, एडीजे सुनील कुमार गुप्ता और एसडीएम भगवत शरण त्यागी के इन संयुक्त और शानदार प्रयासों से यह स्पष्ट हो गया है कि इस बार वैशाख के सावों में प्रशासन किसी को बख्शने के मूड में नहीं है।
सरकारी तंत्र (Government Machinery) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। स्कूलों में बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। गांव-गांव में निगरानी समितियां एक्टिव हो चुकी हैं।
अब बारी धौलपुर की जनता की है कि वे प्रशासन का साथ दें। dlpnewstv.com की टीम भी सभी पाठकों से अपील करती है कि वे एक जिम्मेदार नागरिक होने का फर्ज निभाएं। अगर आपके आस-पास कहीं भी बाल विवाह की खौफनाक तैयारी चल रही हो, तो प्रशासन के कंट्रोल रूम या पुलिस को तुरंत सूचना दें। आपके एक फोन कॉल से किसी मासूम का बचपन और जीवन संवर सकता है।
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