1 बाड़ी पुलिस विवाद ने पकड़ा तूल: 60 वर्षीय दुकानदार के साथ दर्दनाक मारपीट, पूरी रात थाने में रखने पर व्यापार संघ में भीषण आक्रोश

1 बाड़ी पुलिस विवाद ने पकड़ा तूल: 60 वर्षीय दुकानदार के साथ दर्दनाक मारपीट, पूरी रात थाने में रखने पर व्यापार संघ में भीषण आक्रोश

1 बाड़ी पुलिस विवाद ने पकड़ा तूल: 60 वर्षीय दुकानदार के साथ दर्दनाक मारपीट, पूरी रात थाने में रखने पर व्यापार संघ में भीषण आक्रोश

dlpnewstv.com न्यूज़ डेस्क: राजस्थान के धौलपुर जिले के बाड़ी शहर से खाकी को शर्मसार करने वाली एक खबर सामने आई है। शहर के व्यस्ततम गंज तिराहे पर देर रात एक बाड़ी पुलिस विवाद ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है।

आरोप है कि गश्त पर निकली पुलिस टीम ने एक बुजुर्ग दुकानदार के साथ न केवल गाली-गलौज की, बल्कि उनके साथ मारपीट भी की। यह दर्दनाक घटना शहर के व्यापारियों के बीच चर्चा का मुख्य विषय बन गई है।

पुलिस के अनुसार, मामला देर रात दुकान बंद कराने से जुड़ा हुआ है। लेकिन जिस तरीके से एक वरिष्ठ नागरिक और दुकानदार को हिरासत में लिया गया, उसने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पीड़ित दुकानदार को पूरी रात कोतवाली थाने में पुलिस हिरासत में रखा गया। अगले दिन उन्हें शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार दिखाकर जमानत पर रिहा किया गया।

इस घटना के बाद शहर के व्यापार संघ में भीषण आक्रोश पनप गया है। व्यापारी वर्ग इसे अपने सम्मान पर सीधा हमला मान रहा है।

घटना के मुख्य बिंदु (News Highlights):
  • बाड़ी शहर के गंज तिराहे पर देर रात 11:30 बजे पुलिस और दुकानदार के बीच हुआ विवाद।
  • धर्मशाला में शादी समारोह होने के कारण खुली हुई थी परचून और डेली नीड्स की दुकान।
  • ‘राजवीर’ नाम की नेमप्लेट लगाए अधिकारी और दो जवानों पर मारपीट का गंभीर आरोप।
  • 60 वर्षीय दुकानदार रामनिवास को भूखे-प्यासे पूरी रात थाने की हवालात में रखा गया।
  • व्यापार संघ के अध्यक्ष अमित मंगल ने घटना की कड़ी निंदा की, आंदोलन की चेतावनी।
  • कोतवाली थाना अधिकारी के अनुसार हेड कांस्टेबल ने दुकानदार के सामने अपनी गलती स्वीकारी है।

देर रात दुकान बंद करने का वह खौफनाक घटनाक्रम

यह पूरी घटना बुधवार रात की बताई जा रही है। शहर का गंज तिराहा आम दिनों में रात 10 बजे तक शांत हो जाता है। लेकिन उस दिन परिस्थितियां कुछ अलग थीं।

गंज दरवाजे के पास स्थित एक बड़ी धर्मशाला में एक विवाह समारोह का आयोजन चल रहा था। शादी के घर में अक्सर देर रात तक मेहमानों की आवाजाही लगी रहती है।

इसी विवाह समारोह के कारण आस-पास के कुछ दुकानदार अपनी दुकानें खोले हुए थे। इनमें पीड़ित रामनिवास उर्फ लल्लू बंसल भी शामिल थे।

रामनिवास की गंज दरवाजे पर परचून और डेली नीड्स (रोजमर्रा की जरूरतों) की एक छोटी सी दुकान है। शादी समारोह के चलते उनकी दुकान पर ग्राहकों की भीड़ थी।

रात के करीब 11:30 बज चुके थे। इसी दौरान गश्त करती हुई कोतवाली पुलिस की एक गाड़ी वहां आकर रुकी।

पुलिस की गाड़ी से पुलिसकर्मी उतरे और उन्होंने वहां मौजूद सभी दुकानदारों को तुरंत अपनी दुकानें बंद करने का कड़ा निर्देश दिया।

दुकानदारों ने पुलिस के निर्देश का पालन किया। रामनिवास के अनुसार, उन्होंने भी तुरंत अपना सामान समेटना और दुकान बंद करना शुरू कर दिया था।

पांच मिनट बाद पुलिस की वापसी और मारपीट का आरोप

घटना में नया मोड़ तब आया जब पुलिस की गाड़ी वहां से जाने के बाद महज पांच मिनट के भीतर ही वापस लौट आई।

तब तक आसपास की अन्य सभी दुकानें पूरी तरह से बंद हो चुकी थीं। लेकिन रामनिवास की दुकान का कुछ सामान बाहर रखा हुआ था।

रामनिवास की उम्र अधिक होने के कारण उन्हें शटर गिराने और सामान अंदर रखने में थोड़ा अतिरिक्त समय लग रहा था। उनकी दुकान पूरी तरह बंद नहीं हो पाई थी।

आरोप है कि इसी मामूली सी बात पर पुलिसकर्मी आगबबूला हो गए। गाड़ी से एक पुलिस अधिकारी और दो अन्य जवान बाहर निकले।

पीड़ित के मुताबिक, उस पुलिस अधिकारी की वर्दी पर ‘राजवीर’ नाम की नेमप्लेट लगी हुई थी। उन्होंने आते ही रामनिवास के साथ अभद्र भाषा का प्रयोग शुरू कर दिया।

आरोप यह भी है कि पुलिसकर्मियों ने केवल गाली-गलौज ही नहीं की, बल्कि एक 60 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार को थप्पड़ भी जड़ दिए।

यह पूरा दृश्य बेहद खौफनाक था। एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ सरेआम इस तरह का व्यवहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

पत्रकारिता और कानूनी नोट: यह बाड़ी पुलिस विवाद की खबर पूरी तरह से पीड़ित दुकानदार के बयानों और व्यापार संघ के दावों पर आधारित है। dlpnewstv.com स्पष्ट करता है कि पुलिसकर्मियों पर लगे मारपीट के आरोप जांच का विषय हैं। अंतिम निष्कर्ष विभागीय जांच के बाद ही तय होगा।

पूरी रात थाने में काटी भूखे-प्यासे, शांति भंग का लगा मुकदमा

विवाद यहीं नहीं थमा। दुकान बंद होने के बाद, पुलिसकर्मी रामनिवास को जबरन अपनी गाड़ी में बिठाकर कोतवाली थाने ले गए।

दुकानदार ने मीडिया को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि उन्हें पूरी रात थाने की हवालात में एक अपराधी की तरह रखा गया।

बुजुर्ग रामनिवास ने बताया कि उन्होंने बुधवार के दिन में भी कुछ नहीं खाया था। थाने में उन्हें भूखे-प्यासे ही पूरी रात काटनी पड़ी।

एक 65 वर्ष के बुजुर्ग व्यक्ति का भूखे पेट थाने के फर्श पर रात गुजारना एक अत्यंत भावुक और विचलित कर देने वाली स्थिति है।

पुलिस ने अगले दिन सुबह रामनिवास का सरकारी अस्पताल में मेडिकल परीक्षण कराया। इसके बाद उन पर कानूनी कार्यवाही की गई।

पुलिस के अनुसार, उन्हें आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 151 के तहत शांति भंग करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

बाद में उन्हें उपखंड मजिस्ट्रेट (SDM) या कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश कर जमानत पर रिहा कर दिया गया।

चार बेटियों के पिता हैं रामनिवास, सीसीटीवी फुटेज आया सामने

इस घटना ने रामनिवास को अंदर तक झकझोर कर रख दिया है। वे शारीरिक रूप से कम, लेकिन मानसिक रूप से अधिक व्यथित नजर आ रहे हैं।

रामनिवास की आयु लगभग 60 से 65 वर्ष के बीच है। इस ढलती उम्र में भी वे मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं।

उनके परिवार में चार बेटियां हैं। अपनी बेटियों की परवरिश और शादी की जिम्मेदारी एक पिता होने के नाते उन्हीं के कंधों पर है।

वे अपनी परचून की दुकान पर अकेले ही काम करते हैं। उनके पास कोई सहायक या नौकर नहीं है, इसलिए दुकान का सारा काम खुद निपटाते हैं।

रामनिवास का कहना है कि उन्होंने जीवन भर ईमानदारी से व्यापार किया है। पुलिस द्वारा सरेआम की गई इस कार्रवाई को वे अपनी भारी बेइज्जती मान रहे हैं।

इस पूरे बाड़ी पुलिस विवाद का एक अहम पहलू सीसीटीवी (CCTV) फुटेज है, जो अब स्थानीय मीडिया और लोगों के सामने आ गया है।

इन सीसीटीवी फुटेज में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी रात के समय रामनिवास की दुकान बंद करा रहे हैं।

फुटेज में यह भी साफ नजर आ रहा है कि पुलिसकर्मी एक बुजुर्ग दुकानदार को अपनी सरकारी गाड़ी में जबरन बिठाकर ले जा रहे हैं। यह विजुअल पुलिस की संवेदनशीलता पर सवाल उठाता है।

कानूनी विश्लेषण: कानून के जानकारों का मानना है कि केवल दुकान देर से बंद करने पर शांति भंग (धारा 151) की कार्रवाई करना पुलिस के अधिकारों का अतिरेक हो सकता है। यह धारा मुख्य रूप से किसी संज्ञेय अपराध को रोकने के लिए इस्तेमाल की जाती है।

व्यापार संघ में भीषण आक्रोश, पुलिस की कड़ी निंदा

एक वयोवृद्ध व्यापारी के साथ हुए इस अमानवीय व्यवहार की खबर सुबह होते ही पूरे बाड़ी शहर में जंगल की आग की तरह फैल गई।

शहर के सभी छोटे-बड़े दुकानदारों में पुलिस की इस कथित बर्बरता के खिलाफ भीषण आक्रोश पनप गया है। व्यापारी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

बाड़ी शहर के व्यापार संघ ने इस पूरी घटना का कड़ा संज्ञान लिया है। व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने आपातकालीन बैठक कर घटना की निंदा की है।

व्यापार संघ के अध्यक्ष अमित मंगल ने मीडिया से बातचीत करते हुए अपनी गहरी नाराजगी और निराशा व्यक्त की है।

अमित मंगल ने कहा, “किसी भी आम दुकानदार के साथ पुलिस द्वारा इस प्रकार मारपीट करना और उसे पूरी रात थाने पर रखना किसी भी दृष्टिकोण से ठीक नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि बाड़ी शहर का व्यापार संघ हमेशा से कानून व्यवस्था बनाए रखने में स्थानीय पुलिस का पूरा सहयोग करता रहा है।

अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि प्रशासन के हर निर्देश का व्यापारी पालन करते हैं। लेकिन पुलिस के कुछ अधिकारियों से ऐसी दर्दनाक कार्रवाई की उम्मीद बिल्कुल नहीं थी।

व्यापार संघ का मानना है कि अगर दुकानदार से कोई चूक हुई भी थी, तो उसे समझाकर या चालान काटकर छोड़ा जा सकता था। पूरी रात थाने में रखना ज्यादती है।

अमित मंगल ने इस घटना को घोर निंदनीय करार दिया है। उन्होंने कहा कि व्यापार संघ व्यापारियों के सम्मान से कोई समझौता नहीं करेगा।

इस मामले में व्यापार संघ ने तय किया है कि अन्य सभी पदाधिकारियों और शहर के प्रबुद्ध नागरिकों के साथ एक विस्तृत बैठक की जाएगी।

बैठक में आगे की रणनीति तय की जाएगी। यदि पुलिस के उच्चाधिकारियों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई नहीं की, तो व्यापारी आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं।

कोतवाली थाना अधिकारी का बयान: हेड कांस्टेबल ने स्वीकारी गलती

जैसे-जैसे यह बाड़ी पुलिस विवाद तूल पकड़ता गया, बाड़ी कोतवाली पुलिस को भी अपनी स्थिति स्पष्ट करने के लिए आगे आना पड़ा।

कोतवाली थाना अधिकारी (SHO) देवेंद्र शर्मा ने घटना के संबंध में अपना आधिकारिक बयान मीडिया के सामने प्रस्तुत किया है।

SHO देवेंद्र शर्मा का कहना है कि बुधवार रात को हेड कांस्टेबल (HC) राजवीर सिंह और अन्य पुलिस जवान शहर में नियमित गश्त पर निकले हुए थे।

गश्त के दौरान ही गंज तिराहे पर देर रात दुकान खुली होने को लेकर पुलिस टीम की रामनिवास से बहस हुई थी।

पुलिस अधिकारी के अनुसार, गश्त कर रही टीम मौके से एक व्यक्ति (रामनिवास) को पूछताछ के लिए कोतवाली थाने लेकर आई थी।

थाने में लाने के बाद, पुलिस के अनुसार, उस व्यक्ति के खिलाफ शांति भंग (Breach of Peace) की धाराओं में कानूनी कार्रवाई अमल में लाई गई।

हालांकि, थाना अधिकारी ने इस बात को भी स्पष्ट किया कि जब उन्हें पूरे मामले और व्यापारी के साथ हुए व्यवहार की विस्तृत जानकारी मिली, तो उन्होंने संज्ञान लिया।

SHO शर्मा ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हेड कांस्टेबल राजवीर सिंह से पूछताछ की गई और उन्हें व्यापारी की स्थिति से अवगत कराया गया।

थाना अधिकारी के बयान के अनुसार, हेड कांस्टेबल राजवीर सिंह ने बाद में दुकानदार रामनिवास के सामने अपनी गलती को स्वीकार कर लिया है।

हेड कांस्टेबल द्वारा गलती स्वीकारना इस बात का संकेत है कि कहीं न कहीं पुलिस की ओर से कार्रवाई में जल्दबाजी या ज्यादती की गई थी।

अब यह देखना सुखद होगा कि पुलिस उच्चाधिकारी इस मामले में अनुशासनहीनता बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर क्या विभागीय कार्रवाई करते हैं।

जनता और प्रशासन के बीच विश्वास बहाली की जरूरत

यह घटना केवल एक दुकानदार और कुछ पुलिसकर्मियों के बीच का विवाद नहीं है। यह पुलिस और आम जनता के बीच घटते विश्वास का एक चिंताजनक उदाहरण है।

खाकी वर्दी का काम जनता में सुरक्षा की भावना पैदा करना है, न कि उन्हें डराना। एक बुजुर्ग के साथ ऐसा बर्ताव पुलिस की छवि को धूमिल करता है।

व्यापारी वर्ग शहर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ होता है। यदि व्यापारी ही प्रशासन से खौफ खाएंगे, तो शहर का विकास और शांति व्यवस्था दोनों प्रभावित होंगे।

धौलपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को इस बाड़ी पुलिस विवाद का स्वतः संज्ञान लेना चाहिए।

सीसीटीवी फुटेज की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि पुलिसकर्मी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ एक मिसाल पेश करने वाली कार्रवाई होनी चाहिए।

साथ ही, व्यापार संघ को भी धैर्य का परिचय देते हुए कानूनी दायरे में रहकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए ताकि शहर का माहौल खराब न हो।

उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में प्रशासन और व्यापारियों के बीच एक बैठक होगी, जिसमें इस समस्या का कोई स्थायी और सुखद समाधान निकाला जाएगा।

भविष्य में पुलिसकर्मियों को आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों और महिलाओं के साथ व्यवहार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण (Soft Skills Training) दिए जाने की सख्त आवश्यकता है।

अंततः, न्याय की जीत होनी चाहिए और पीड़ित रामनिवास को उनके सम्मान की वापसी का अहसास कराया जाना चाहिए। dlpnewstv.com इस मामले की हर अपडेट आप तक पहुंचाता रहेगा।

1 बाड़ी पुलिस विवाद ने पकड़ा तूल: 60 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार के साथ दर्दनाक मारपीट, व्यापार संघ में भीषण आक्रोश

1 बाड़ी पुलिस विवाद ने पकड़ा तूल: 60 वर्षीय बुजुर्ग दुकानदार के साथ दर्दनाक मारपीट, व्यापार संघ में भीषण आक्रोश

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *