आगरा में ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर 18.50 लाख रुपये की ठगी, निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह

आगरा पुलिस कार्रवाई
पुलिसकर्मी वाहन के पास कार्रवाई करते हुए | Pexels: 112 Uttar Pradesh | Pexels License (Free)

आगरा ऑनलाइन ट्रेडिंग ठगी का एक मामला निवेश के नाम पर मिलने वाले ऊंचे मुनाफे के दावों को लेकर सावधानी की जरूरत बताता है। अमर उजाला की 7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, आगरा के एक युवक को शेयर ट्रेडिंग में 100 प्रतिशत मुनाफे का भरोसा देकर कथित तौर पर 18.50 लाख रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। रिपोर्ट में पीड़ित के साथ हुई धोखाधड़ी को साइबर ठगी के रूप में पेश किया गया है।

मुनाफे का लालच कैसे बनता है जाल?

ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी करने वाले लोग कई बार सोशल मीडिया, मैसेजिंग समूहों या अनजान ऐप के जरिए संपर्क करते हैं। शुरुआत में छोटी रकम पर लाभ दिखाकर भरोसा बनाया जा सकता है। इसके बाद निवेशक को बड़ी राशि जमा करने के लिए कहा जाता है। कुछ मामलों में ऐप पर दिखने वाला लाभ वास्तविक बाजार लेनदेन से जुड़ा नहीं होता। जब व्यक्ति रकम निकालने की कोशिश करता है तो अतिरिक्त शुल्क, टैक्स या सत्यापन के नाम पर और पैसा मांगा जा सकता है। इस मामले में रिपोर्ट में 100 प्रतिशत लाभ के वादे का उल्लेख है, लेकिन ठगी में इस्तेमाल हुए ऐप या आरोपियों की पूरी पहचान सार्वजनिक रूप से उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।

निवेश से पहले किन बातों की जांच करें?

किसी भी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म पर पैसा लगाने से पहले कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय स्थिति और आधिकारिक वेबसाइट जांचें। भारत में प्रतिभूति बाजार से जुड़ी सेवाओं के लिए संबंधित संस्थाओं की SEBI पंजीकरण स्थिति देखना जरूरी है। अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए APK या लिंक से ऐप इंस्टॉल न करें। केवल स्क्रीनशॉट, व्हाट्सऐप संदेश या ऑनलाइन समूह में दिखाए गए मुनाफे को प्रमाण न मानें। शेयर बाजार में निश्चित या दोगुना मुनाफा देने का दावा गंभीर चेतावनी संकेत है।

यदि ऑनलाइन ठगी हो जाए तो क्या करें?

पीड़ित को जल्द से जल्द राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए और cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। बैंक या भुगतान सेवा प्रदाता को तुरंत सूचना देकर संदिग्ध लेनदेन रोकने का अनुरोध करें। चैट, फोन नंबर, वेबसाइट लिंक, बैंक ट्रांजैक्शन आईडी और स्क्रीनशॉट सुरक्षित रखें। शिकायत में समय और राशि का सही विवरण दें। देरी होने पर रकम वापस मिलने की संभावना प्रभावित हो सकती है।

किसी को OTP या स्क्रीन साझा न करें

बैंकिंग पासवर्ड, OTP, UPI PIN और कार्ड विवरण किसी को न बताएं। यदि कोई व्यक्ति रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करने को कहे तो ऐसा न करें। निवेश सलाह के नाम पर निजी खाते में रकम भेजने की मांग को भी संदेह से देखें।

आगरा का यह मामला निवेशकों को याद दिलाता है कि अधिक मुनाफे का वादा जोखिम-मुक्त निवेश का प्रमाण नहीं होता। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार 18.50 लाख रुपये की रकम ठगी में जाने की बात कही गई है; जांच और कानूनी प्रक्रिया के निष्कर्ष आने बाकी हैं।

स्रोत: अमर उजाला – आगरा समाचार, 7 नवंबर 2026 | साइबर शिकायत: राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल


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