श्रीनगर से लोकसभा सांसद आगा सैयद रुहुल्ला मेहदी ने 3 नवंबर 2026 को जम्मू-कश्मीर के बडगाम में आयोजित सभा में नेशनल कॉन्फ्रेंस से अलग होने और लोकसभा सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा की। आगा रुहुल्ला इस्तीफा प्रकरण में समाचार एजेंसियों और उनके सार्वजनिक बयान के अनुसार, उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र भेजने की बात कही है। हालांकि, इस मसौदे की तैयारी के समय अध्यक्ष की ओर से इस्तीफा स्वीकार किए जाने की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
रुहुल्ला ने यह घोषणा अपने पिता आगा सैयद मेहदी की 26वीं पुण्यतिथि पर बेहिश्ती ज़हरा पार्क, बडगाम में आयोजित सभा में की। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर 2024 के विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों से पीछे हटने का आरोप लगाया। उनके भाषण में अनुच्छेद 370 की बहाली, बंदियों की रिहाई और लोगों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे। ये आरोप रुहुल्ला के राजनीतिक बयान हैं; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
आगा रुहुल्ला के इस्तीफे की वजह क्या बताई गई?
रुहुल्ला ने कहा कि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने चुनाव के समय जिन मुद्दों पर जनता से समर्थन मांगा था, उन पर सरकार बनने के बाद पर्याप्त काम नहीं हुआ। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की राजनीतिक दिशा की आलोचना की। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि वह नई पार्टी बनाने के बजाय जम्मू-कश्मीर के लोगों के अधिकार और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर एक आंदोलन खड़ा करना चाहते हैं।
रुहुल्ला ने अपने इस्तीफे की घोषणा के साथ लोकसभा अध्यक्ष को संबोधित सार्वजनिक संदेश में कहा कि ईमेल भेजा गया है और हार्ड कॉपी भी भेजी जाएगी। इस बयान से इस्तीफा भेजने की उनकी बात सामने आती है, लेकिन लोकसभा सचिवालय की प्राप्ति या अध्यक्ष की स्वीकृति की अलग आधिकारिक पुष्टि अभी जरूरी है।
लोकसभा सीट पर अंतिम स्थिति क्या होगी?
लोकसभा सदस्य का इस्तीफा स्वीकार होने के बाद ही सीट रिक्त होने की औपचारिक स्थिति बनती है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि श्रीनगर लोकसभा सीट पर उपचुनाव की तारीख तय हो गई है या सीट औपचारिक रूप से रिक्त घोषित हो चुकी है। इस संबंध में लोकसभा अध्यक्ष और सचिवालय की अगली आधिकारिक सूचना महत्वपूर्ण होगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस ने भी रुहुल्ला के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी है। Scroll की रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने उनके संसदीय कामकाज और विशेष दर्जे की बहाली के लिए किए गए प्रयासों पर सवाल उठाए। दोनों पक्षों के बयानों को उनके अपने राजनीतिक दावों के रूप में ही पढ़ा जाना चाहिए।
संदर्भ: PTI की रिपोर्ट में इस्तीफा भेजने का विवरण और Scroll की रिपोर्ट में नेशनल कॉन्फ्रेंस की प्रतिक्रिया।
