जयपुर, 7 नवंबर 2026: रबी सीजन में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता प्रभावित न हो, इसके लिए राजस्थान सरकार ने अनुदानित यूरिया और डीएपी के गैर-कृषि इस्तेमाल, कालाबाजारी तथा अवैध भंडारण पर सख्ती के निर्देश दिए हैं। कृषि आयुक्त कार्यालय की ओर से जारी निर्देशों में दुरुपयोग करने वालों के साथ-साथ कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है।
अनुदानित खाद का इस्तेमाल किसानों के लिए सुरक्षित रखने पर जोर
सरकारी जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार किसानों को उपलब्ध कराए जाने वाले यूरिया के एक बैग पर करीब 2,700 रुपये और डीएपी के एक बैग पर करीब 3,500 रुपये की सब्सिडी देती है। इसका उद्देश्य खेती की लागत कम करना और किसानों को जरूरी उर्वरक उपलब्ध कराना है। ऐसे में अनुदानित खाद का औद्योगिक या अन्य गैर-कृषि कामों में इस्तेमाल, अवैध बिक्री या जमाखोरी किसानों के हितों को प्रभावित कर सकती है।
राज्य के कृषि आयुक्त कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि सब्सिडी वाले उर्वरकों का गैर-कृषि उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभागीय स्तर पर निगरानी और कार्रवाई को तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
औद्योगिक इकाइयों को देना होगा मासिक विवरण
निर्देशों के तहत औद्योगिक, प्लाईवुड, रेजिन, पशु-आहार और अन्य गैर-कृषि इकाइयों को गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद तथा उत्पादन से संबंधित मासिक जानकारी विभागीय अधिकारियों को उपलब्ध करानी होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह देखना है कि गैर-कृषि उपयोग के लिए खरीदा गया यूरिया वैध स्रोत से आ रहा है और उसकी मात्रा व उपयोग का रिकॉर्ड उपलब्ध है।
यदि किसी इकाई के रिकॉर्ड, खरीद या भंडारण में गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित नियमों के तहत जांच और कार्रवाई की जा सकती है। अधिकारियों को भी शिकायत या सूचना मिलने पर समय पर कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर कानूनी कार्रवाई
जारी जानकारी में आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का उल्लेख किया गया है। इसके तहत धारा 7 के उल्लंघन पर तीन महीने से सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है। धारा 10 के तहत दोषी कंपनियों तथा जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। अवैध परिवहन में इस्तेमाल वाहनों को जब्त किए जाने की कार्रवाई भी संभव है।
किसी खास मामले में कौन-सी धारा लागू होगी और क्या दंड बनेगा, यह जांच के तथ्यों तथा सक्षम प्राधिकारी या अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
सही सूचना देने वालों के लिए प्रोत्साहन
सरकार ने अनुदानित उर्वरकों के अवैध उपयोग और कारोबार से जुड़ी प्रामाणिक जानकारी देने वालों के लिए नकद प्रोत्साहन या इनाम की व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर निगरानी को मजबूत करना है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना देते समय नागरिकों को तथ्यों और उपलब्ध प्रमाणों के साथ संबंधित विभाग या प्रशासन से संपर्क करना चाहिए।
रबी फसल के समय खाद की उपलब्धता अहम
नवंबर में रबी फसलों की बुवाई और शुरुआती बढ़वार के लिए यूरिया तथा डीएपी की मांग महत्वपूर्ण रहती है। यदि अनुदानित उर्वरक निर्धारित लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता तो किसानों को समय पर खाद मिलने में परेशानी हो सकती है। इसलिए कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य किसानों के लिए उर्वरक की उपलब्धता बनाए रखना और अनुदानित खाद की आपूर्ति-श्रृंखला को पारदर्शी रखना है।
किसानों और कारोबारियों के लिए क्या संदेश?
किसानों को उर्वरक अधिकृत विक्रेताओं से निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार खरीदना चाहिए और खरीद रसीद सुरक्षित रखनी चाहिए। कारोबारियों तथा औद्योगिक इकाइयों को खरीद, स्टॉक और उपयोग के रिकॉर्ड सही रखने चाहिए। अनुदानित खाद का गैर-कृषि इस्तेमाल या अवैध बिक्री पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राजस्थान में किन गतिविधियों पर कार्रवाई होगी?
अनुदानित यूरिया-डीएपी के गैर-कृषि उपयोग, कालाबाजारी और अवैध भंडारण पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
औद्योगिक इकाइयों को क्या जानकारी देनी होगी?
उन्हें गैर-अनुदानित यूरिया की खरीद और उत्पादन का मासिक विवरण विभागीय अधिकारियों को देना होगा।
क्या सूचना देने वालों के लिए इनाम की व्यवस्था है?
जारी जानकारी में प्रामाणिक सूचना देने वालों के लिए नकद प्रोत्साहन या इनाम का प्रावधान बताया गया है।
स्रोत: राजस्थान सरकार की प्रेस सूचना पर आधारित रिपोर्ट।
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