बाल तस्करी के आरोपों से जुड़े मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने स्वतः संज्ञान लेते हुए राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों से रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने 3 नवंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों से नाबालिग लड़कियों की कथित खरीद-फरोख्त और बाद में महाराष्ट्र के शहरों तक तस्करी किए जाने संबंधी मीडिया रिपोर्ट पर उसने कार्रवाई शुरू की है।
NHRC ने किन राज्यों से जवाब मांगा?
आयोग ने तीनों राज्यों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों (DGP) को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है। NHRC ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह बच्चियों के जीवन, गरिमा और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन होगा।
आयोग की विज्ञप्ति में मीडिया रिपोर्ट के हवाले से कुछ मामलों में बिचौलियों द्वारा नाबालिग लड़कियों को कथित रूप से दूसरे राज्यों तक ले जाने और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की बात कही गई है। ये आरोप अभी जांच और सरकारी रिपोर्ट के दायरे में हैं। इन्हें अदालत या जांच एजेंसी द्वारा सिद्ध तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाना चाहिए।
मामले में जांच की जरूरत क्यों?
ऐसे मामलों में बच्चों की पहचान छिपाने, दस्तावेजों में हेरफेर, बिचौलियों की भूमिका और विभिन्न जिलों तथा राज्यों के बीच समन्वय जैसे पहलुओं की जांच आवश्यक होती है। सीमावर्ती जिलों में प्रशासन और पुलिस के बीच सूचना साझा करने की प्रक्रिया मजबूत होना जरूरी है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई हो सके।
बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में पीड़ित बच्चों की निजता सर्वोपरि है। उनकी पहचान, परिवार की निजी जानकारी, तस्वीरें या ऐसे विवरण सार्वजनिक नहीं किए जाने चाहिए जिनसे उनकी पहचान उजागर हो सकती है। किसी भी रिपोर्टिंग में पीड़ितों को दोषी ठहराने वाली भाषा से बचना जरूरी है।
दो सप्ताह की समय-सीमा में क्या सामने आ सकता है?
NHRC के नोटिस के बाद संबंधित राज्यों को अपने स्तर पर उपलब्ध जानकारी, शिकायतों, दर्ज मामलों, जांच की स्थिति और पीड़ितों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों का विवरण देना होगा। आयोग इन रिपोर्टों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकता है। फिलहाल NHRC की विज्ञप्ति में नोटिस और रिपोर्ट तलब करने की पुष्टि की गई है; इससे किसी आरोपी की दोषसिद्धि या अंतिम निष्कर्ष साबित नहीं होता।
नागरिक और संस्थाएँ क्या कर सकती हैं?
बाल तस्करी या बच्चों के शोषण से जुड़ी आशंका होने पर नागरिकों को खुद कार्रवाई करने या संदिग्ध लोगों से भिड़ने के बजाय पुलिस और बाल संरक्षण तंत्र को सूचना देनी चाहिए। बच्चों की सुरक्षा, सुरक्षित आश्रय, कानूनी सहायता, काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था भी जांच जितनी ही महत्वपूर्ण है।
राजस्थान से जुड़ी प्रशासनिक और कानूनी खबरों के लिए DLP News TV24 की राजस्थान हाईकोर्ट के संदिग्ध जमानत आदेशों की जांच पर प्रकाशित रिपोर्ट भी पढ़ें। धौलपुर के पुराने हत्याकांड में अदालत के फैसले से जुड़ी यह रिपोर्ट भी उपलब्ध है।
आधिकारिक जानकारी
NHRC का पूरा प्रेस नोट राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है।
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