ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ₹14,500 करोड़ के वित्तीय समर्थन के साथ मंजूरी दी है। 4 नवंबर 2026 को स्वीकृत इस योजना का उद्देश्य देश में 92 गीगावॉट-घंटे (GWh) की नई ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करना है। सरकार के मुताबिक इससे सौर और पवन ऊर्जा को बिजली ग्रिड से जोड़ना आसान होगा और जरूरत के समय भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
ग्रिड-स्केल ऊर्जा भंडारण योजना में क्या शामिल है?
योजना के तहत कुल 92 GWh क्षमता को तीन हिस्सों में विकसित करने का प्रस्ताव है। इसमें 30 GWh बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS), 60 GWh पंप्ड स्टोरेज परियोजनाएँ और 2 GWh उभरती ऊर्जा भंडारण तकनीकें शामिल हैं। सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए व्यवहार्यता अंतर वित्तपोषण (Viability Gap Funding) उपलब्ध कराने का फैसला किया है।
PIB की विज्ञप्ति के अनुसार इन परियोजनाओं में लगभग ₹97,600 करोड़ के कुल निवेश का अनुमान है। VGF का मकसद उन परियोजनाओं की वित्तीय व्यवहार्यता बेहतर करना है, जिनमें शुरुआती लागत अधिक होने के कारण निवेशकों के लिए तुरंत व्यावसायिक लाभ सुनिश्चित करना कठिन हो सकता है। यह पूरी राशि सीधे उपभोक्ताओं को सब्सिडी के रूप में देने की योजना नहीं है, बल्कि परियोजना विकास को समर्थन देने का ढाँचा है।
बिजली आपूर्ति और नवीकरणीय ऊर्जा को कैसे मिलेगा फायदा?
सौर ऊर्जा का उत्पादन दिन में और पवन ऊर्जा का उत्पादन मौसम तथा हवा की गति के अनुसार बदलता रहता है। बिजली की मांग, हालांकि, सुबह और शाम के समय भी अधिक हो सकती है। ऊर्जा भंडारण प्रणालियाँ अतिरिक्त उत्पादन को जमा करके जरूरत के समय ग्रिड में वापस भेज सकती हैं। इससे उत्पादन और खपत के बीच समय का अंतर कम करने में मदद मिलती है।
बैटरी स्टोरेज तेजी से प्रतिक्रिया देने वाली तकनीक है, जबकि पंप्ड स्टोरेज में अतिरिक्त बिजली का उपयोग करके पानी को ऊँचाई पर पहुँचाया जाता है और आवश्यकता पड़ने पर उसे नीचे छोड़कर टरबाइन से बिजली बनाई जाती है। दोनों प्रणालियों की भूमिका अलग-अलग है और उन्हें ग्रिड की जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है।
2031-32 तक का लक्ष्य और घरेलू निर्माण
सरकारी विवरण में 2031-32 तक देश की कुल ग्रिड-स्तरीय ऊर्जा भंडारण आवश्यकता 411 GWh तक पहुँचने का अनुमान दिया गया है। मंजूर योजना को मौजूदा क्षमता में बड़ा विस्तार करने वाला कदम बताया गया है। BESS में घरेलू सामग्री की अनिवार्यता का प्रावधान देश में बैटरी विनिर्माण को प्रोत्साहन देने और आयात निर्भरता कम करने के उद्देश्य से रखा गया है।
योजना का असर तभी स्पष्ट होगा जब परियोजनाएँ समय पर पूरी हों, भंडारण प्रणालियों की लागत नियंत्रित रहे और उनके संचालन तथा रखरखाव की व्यवस्था मजबूत हो। जमीन, जल उपलब्धता, पर्यावरणीय मंजूरी, ग्रिड से कनेक्शन और बैटरी के जीवन-चक्र प्रबंधन जैसे मुद्दे भी परियोजनाओं के लिए अहम रहेंगे।
उद्योग और निवेश के लिए इसका अर्थ
ऊर्जा भंडारण का विस्तार बैटरी निर्माण, पावर इलेक्ट्रॉनिक्स, इंजीनियरिंग, परियोजना विकास और संचालन सेवाओं से जुड़े उद्योगों के लिए अवसर पैदा कर सकता है। बड़े स्तर पर भंडारण उपलब्ध होने से बिजली वितरण कंपनियों को मांग के उतार-चढ़ाव को संभालने में मदद मिल सकती है। हालांकि योजना की मंजूरी को उत्पादन शुरू होने के बराबर नहीं समझना चाहिए; परियोजनाओं की निविदा, चयन और निर्माण की प्रक्रिया आगे पूरी होगी।
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आधिकारिक जानकारी
योजना का पूरा विवरण प्रेस सूचना ब्यूरो की आधिकारिक विज्ञप्ति और प्रधानमंत्री कार्यालय की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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