धौलपुर: चंबल क्षेत्र में अवैध बजरी के परिवहन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े एक पुराने मामले में धौलपुर की विशेष अदालत ने दो दोषियों को 10-10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोनों पर 10-10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। फैसला 5 नवंबर 2026 को सुनाया गया।
रिपोर्ट के अनुसार, मामला 17 फरवरी 2016 का है। दिहौली थाना क्षेत्र में पुलिस टीम की नाकाबंदी के दौरान चंबल बजरी से भरा एक ट्रैक्टर वहां पहुंचा था। पुलिसकर्मियों ने वाहन को रोकने का संकेत दिया, लेकिन चालक ने रुकने के बजाय ट्रैक्टर पुलिस दल की ओर बढ़ा दिया। पुलिसकर्मियों ने समय रहते हटकर अपनी जान बचाई।
अदालत ने सुनाई 10-10 साल की सजा
मामले की सुनवाई डकैती प्रभावित क्षेत्र से जुड़े विशेष न्यायालय में हुई। रिपोर्ट में न्यायाधीश राकेश गोयल के फैसले का उल्लेख है। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए प्रत्येक को 10 वर्ष का कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना जमा नहीं होने की स्थिति में अतिरिक्त दंड का प्रावधान भी बताया गया है।
अवैध बजरी परिवहन और पुलिस सुरक्षा पर फिर चर्चा
चंबल क्षेत्र में बजरी का अवैध खनन और परिवहन लंबे समय से प्रशासन के लिए चुनौती रहा है। ऐसे मामलों में पुलिस और वन विभाग की टीमों को जोखिम उठाकर कार्रवाई करनी पड़ती है। अदालत का यह फैसला उस घटना से जुड़ा है जिसमें कथित तौर पर पुलिस नाकाबंदी तोड़ते हुए वाहन को टीम की ओर बढ़ाया गया था।
इस मामले को हाल में हुई किसी नई मुठभेड़ या ताजा जब्ती से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। यह 2016 की घटना पर नवंबर 2026 में आया न्यायिक फैसला है।
क्या है आगे की अहम बात?
अवैध खनन के विरुद्ध कार्रवाई में केवल जब्ती ही नहीं, बल्कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया का पूरा होना भी महत्वपूर्ण है। इस फैसले से यह संदेश जाता है कि अवैध खनन के साथ-साथ सरकारी ड्यूटी में बाधा डालने और पुलिस दल की जान जोखिम में डालने जैसे आरोपों पर अदालत साक्ष्यों के आधार पर कठोर सजा दे सकती है।
स्रोत: Maru Chakra Digital की 5 नवंबर 2026 की रिपोर्ट; रिपोर्ट में Dainik Bhaskar Rajasthan का स्रोत उल्लेखित है।
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