₹904 करोड़ के कथित बैंक फ्रॉड मामले में CBI की FIR, Future Retail और प्रमोटर्स जांच के घेरे में

प्रतीकात्मक ग्राफिक: फ्यूचर रिटेल के कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई जांच
बैंकिंग जांच से जुड़ी खबर पर प्रतीकात्मक ग्राफिक

मुंबई/नई दिल्ली, 7 नवंबर 2026: केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने Future Retail Ltd (FRL), कंपनी के प्रमोटर्स किशोर लखमीनारायण बियानी और राकेश गोपीकिशन बियानी सहित अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को कथित तौर पर ₹904.32 करोड़ का नुकसान पहुंचाने के मामले में केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी की FIR में फंड के कथित डायवर्जन, लेनदेन की परतें बनाने और वित्तीय रिकॉर्ड में गड़बड़ी जैसे आरोपों का उल्लेख है।

4 नवंबर को दर्ज हुई FIR

द इकोनॉमिक टाइम्स की 7 नवंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, CBI ने 4 नवंबर 2026 को यह मामला दर्ज किया। इससे पहले SBI ने 9 अक्टूबर को शिकायत दी थी। FIR में कंपनी, उसके प्रमोटर्स और निदेशकों के साथ कुछ अज्ञात लोक सेवकों तथा अन्य लोगों का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी ने मुंबई में प्रमोटर्स से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी लेकर दस्तावेज जब्त किए।

फॉरेंसिक ऑडिट में किन लेनदेन पर सवाल?

मामले की पृष्ठभूमि में BDO India LLP की ओर से 1 अप्रैल 2017 से 30 अप्रैल 2022 तक की अवधि का फॉरेंसिक ऑडिट किया गया था। बैंक की शिकायत के अनुसार, ऑडिट में 13 संबंधित और जुड़ी हुई संस्थाओं को किए गए भुगतान की जांच की गई। रिपोर्ट में इन संस्थाओं को कुल सकल भुगतान ₹24,002.09 करोड़ और उनसे प्राप्त राशि ₹18,123.79 करोड़ बताई गई, जिसके आधार पर शुद्ध भुगतान ₹5,878.28 करोड़ रहा।

ऑडिट में नौ अन्य संबंधित संस्थाओं को किए गए भुगतान पर भी सवाल उठाए गए। शिकायत में कहा गया कि कुछ संस्थाओं की वित्तीय क्षमता और घोषित कारोबार उनके खाते में आई राशि के अनुपात में नहीं दिखते थे। इन बिंदुओं को CBI की जांच में परखा जाना है।

कंपनी के खाते और अन्य लेनदेन भी जांच के दायरे में

रिपोर्ट के मुताबिक, Future Retail के लोन खाते को 26 अप्रैल 2021 से पिछली तारीख से गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) के रूप में वर्गीकृत किया गया था। SBI की Fraud Identification Committee ने 23 मार्च 2026 को खाते को धोखाधड़ी वाला घोषित किया था। जांच में समूह की एक कंपनी को दिए गए ऋण और वित्तीय विवरणों में दर्ज कुछ आंकड़ों की भी समीक्षा की जा रही है।

आरोप और जांच को दोषसिद्धि न समझें

यह मामला फिलहाल FIR और जांच के स्तर पर है। किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ आरोप दर्ज होना अदालत में दोष साबित होने के बराबर नहीं होता। जांच एजेंसी को दस्तावेजों, लेनदेन और संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल करनी है। अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएंगे। इसलिए इस खबर में सभी आरोपों को कथित रूप में ही प्रस्तुत किया जा रहा है।

बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र के लिए मामला क्यों अहम?

बड़े कॉरपोरेट खातों में फंड के इस्तेमाल, संबंधित कंपनियों को भुगतान और ऑडिट रिकॉर्ड की पारदर्शिता बैंकिंग व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। इस मामले में जांच का दायरा यह समझने पर भी केंद्रित रहेगा कि बैंक से प्राप्त धन कहां और किस उद्देश्य से इस्तेमाल हुआ। आगे की जांच में दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की पुष्टि अहम होगी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

CBI ने कितनी राशि के कथित मामले में केस दर्ज किया?

SBI की शिकायत में ₹904.32 करोड़ की कथित धोखाधड़ी का उल्लेख है।

FIR कब दर्ज हुई?

रिपोर्ट के मुताबिक CBI ने 4 नवंबर 2026 को FIR दर्ज की।

क्या मामले में दोष साबित हो गया है?

नहीं। मामला जांच के चरण में है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही आएगा।

स्रोत: द इकोनॉमिक टाइम्स, 7 नवंबर 2026।


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