आगरा: राष्ट्रीय जनगणना से जुड़े काम में जिम्मेदारी निभाने को लेकर आगरा नगर निगम ने सख्त रुख अपनाया है। प्रशिक्षण सत्रों और निर्धारित ड्यूटी में अनुपस्थित रहने के आरोप में 124 कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें 107 प्रगणक और 17 पर्यवेक्षक शामिल बताए गए हैं। यह कार्रवाई जनगणना प्रक्रिया में तैनात कर्मचारियों की उपस्थिति और जवाबदेही सुनिश्चित करने के प्रयास के तौर पर सामने आई है।
किस आधार पर हुई कार्रवाई?
टाइम्स ऑफ इंडिया की 7 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित कर्मचारियों पर जनगणना से जुड़ी अनिवार्य ट्रेनिंग और उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों में शामिल नहीं होने का आरोप है। नगर निगम ने ऐसे कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज कराने का आदेश दिया है। रिपोर्ट में कुल 124 कर्मचारियों का उल्लेख है, जिनमें 107 एन्यूमरेटर यानी प्रगणक और 17 सुपरवाइजर शामिल हैं।
जनगणना का काम कई चरणों में पूरा होता है। इसमें फील्ड स्तर पर घरों और परिवारों से संबंधित जानकारी जुटाना, निर्धारित प्रारूप में विवरण दर्ज करना, प्रशिक्षण में भाग लेना और तय समय-सीमा में डेटा जमा करना शामिल होता है। प्रगणक सीधे क्षेत्र में जाकर जानकारी जुटाते हैं, जबकि पर्यवेक्षक कार्य की निगरानी और गुणवत्ता जांच में भूमिका निभाते हैं। इसलिए दोनों स्तरों पर समय पर उपस्थिति और प्रशिक्षण जरूरी माने जाते हैं।
जनगणना प्रक्रिया में कर्मचारियों की भूमिका
जनगणना देश की जनसंख्या, आवास, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से संबंधित व्यापक आधिकारिक आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया है। सरकारी योजनाओं, संसाधनों के वितरण, शहरी सुविधाओं और भविष्य की नीतियों के निर्माण में ऐसे आंकड़ों का उपयोग किया जाता है। स्थानीय स्तर पर प्रगणक और पर्यवेक्षक इस प्रक्रिया की महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
प्रशिक्षण के दौरान कर्मचारियों को प्रश्नावली, डेटा दर्ज करने के तरीके, क्षेत्र आवंटन, तकनीकी प्रक्रिया और नागरिकों से संवाद के नियम समझाए जाते हैं। यदि कोई कर्मचारी बिना उचित कारण प्रशिक्षण या ड्यूटी से अनुपस्थित रहता है, तो क्षेत्रीय काम प्रभावित हो सकता है और समय-सीमा पर असर पड़ सकता है। हालांकि किसी कर्मचारी की अनुपस्थिति के कारणों की व्यक्तिगत जांच और संबंधित पक्ष का जवाब सुनना भी प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
FIR के निर्देश का मतलब क्या है?
FIR दर्ज कराने के निर्देश का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित सभी कर्मचारियों को दोषी ठहरा दिया गया है। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद पुलिस और संबंधित विभाग उपलब्ध रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर, नोटिस और कर्मचारियों के जवाब के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय करेंगे। किसी कर्मचारी के पास अनुपस्थिति का वैध कारण, स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेज या पहले से स्वीकृत अवकाश हो सकता है, जिसकी जांच आवश्यक होगी।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्ट में कर्मचारियों के नाम, थाना-वार विवरण या FIR दर्ज होने की अंतिम स्थिति का पूरा ब्यौरा नहीं दिया गया है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी 124 कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हो चुकी है। समाचार में नगर निगम की ओर से FIR दर्ज कराने के निर्देश दिए जाने की बात कही गई है।
आगरा में प्रशासनिक जवाबदेही पर जोर
शहर में जनगणना से जुड़ी तैयारियां आगे बढ़ने के साथ कर्मचारियों की उपलब्धता, प्रशिक्षण और फील्ड ड्यूटी का समन्वय महत्वपूर्ण रहेगा। प्रशासन के सामने चुनौती है कि काम समय पर पूरा हो और नागरिकों से जुटाई जाने वाली जानकारी सही तथा व्यवस्थित रहे। कर्मचारियों के लिए भी जरूरी है कि वे विभागीय निर्देशों, प्रशिक्षण कार्यक्रम और ड्यूटी आवंटन को गंभीरता से लें।
आगरा के नागरिकों को जनगणना कर्मियों को आवश्यक सहयोग देना चाहिए, लेकिन किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले आधिकारिक पहचान और प्रक्रिया की पुष्टि करना उचित है। जनगणना के नाम पर किसी अनधिकृत व्यक्ति को निजी दस्तावेज या संवेदनशील जानकारी देने से बचें।
आगे क्या?
नगर निगम के निर्देश के बाद अब संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और पुलिस की कार्रवाई पर नजर रहेगी। FIR दर्ज होने, कर्मचारियों के जवाब और विभागीय जांच से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। DLP News TV24 इस मामले में पुष्टि किए गए अपडेट ही प्रकाशित करेगा।
स्रोत: The Times of India, 7 नवंबर 2026।
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