बाड़ी में चैत्रीय नवरात्र का उल्लास
बाड़ी (धौलपुर)। धौलपुर जिले के बाड़ी शहर में चैत्रीय नवरात्र के पावन अवसर पर भक्ति और कला का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। नगर पालिका प्रशासन द्वारा आयोजित “बाड़ी नवदुर्गा महोत्सव” के तीसरे दिन शनिवार की रात मेला रंगमंच पर एक भव्य सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया और सैकड़ों की संख्या में पहुंचे दर्शकों का मन मोह लिया।
रंगारंग प्रस्तुतियां: 15 सामूहिक और एकल कार्यक्रम
कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन समाजसेवी बाबूलाल कुलश्रेष्ठ द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि इस सांस्कृतिक संध्या में कुल 15 सामूहिक और एकल प्रस्तुतियां दी गईं। कार्यक्रम की शुरुआत मां दुर्गा की वंदना से हुई, जिसके बाद सोलो डांस, बॉलीवुड हिट्स, देशभक्ति गीत और राजस्थानी लोक गीतों की झड़ी लग गई। कलाकारों ने क्लासिकल गीतों पर नृत्य कर दर्शकों को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया।
जब मंच पर गूंजी खाकी की सुरीली आवाज
इस शाम का सबसे खौफनाक और सुखद सरप्राइज (Sentiment Word) तब देखने को मिला, जब कोतवाली एसएचओ (SHO) देवेंद्र शर्मा ने मंच संभाला। आमतौर पर कानून व्यवस्था संभालने वाली खाकी वर्दी में छिपे कलाकार ने जब एक क्लासिकल गीत की प्रस्तुति दी, तो पूरा पंडाल प्रशंसा से गूंज उठा। उनकी गायकी ने यह साबित कर दिया कि पुलिसकर्मी भी कला और संस्कृति के प्रति गहरा जुड़ाव रखते हैं। उनकी इस दर्दनाक हद तक सुरीली (इमोशनल टच) आवाज ने कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
आस्था का केंद्र: मां राज राजेश्वरी मंदिर
यह महोत्सव केवल मेला रंगमंच तक ही सीमित नहीं है, बल्कि शहर की अटूट आस्था के केंद्र मां राज राजेश्वरी मंदिर पर भी विशेष अनुष्ठान और कार्यक्रमों का दौर जारी है। मंदिर परिसर को भव्य फूलों और रोशनी से सजाया गया है, जहाँ सुबह-शाम होने वाली आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। नगर पालिका द्वारा आयोजित इस महोत्सव ने शहर के वातावरण को पूरी तरह धर्ममय और उत्सवमयी बना दिया है।
आज का विशेष आकर्षण: कृष्णा गुर्जर की लोक गायकी
महोत्सव की सफलता को देखते हुए प्रशासन ने आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तैयार कर ली है। आज, रविवार को मेला चतुर्थी के अवसर पर कृष्णा गुर्जर और उनकी पार्टी द्वारा भव्य लोकगीत कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। गुर्जर समुदाय और स्थानीय संस्कृति में विशेष पहचान रखने वाले कृष्णा गुर्जर की प्रस्तुति को देखने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से भी भारी भीड़ जुटने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक आयोजनों का सामाजिक महत्व
इस तरह के आयोजन न केवल स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करते हैं, बल्कि समाज में आपसी भाईचारे और समरसता को भी बढ़ावा देते हैं।“बाड़ी नवदुर्गा महोत्सव” में जिस तरह से युवा, महिलाएं और बुजुर्ग एक साथ बैठकर कला का आनंद ले रहे हैं, वह बाड़ी की समृद्ध विरासत को दर्शाता है। नगर पालिका का यह प्रयास स्थानीय पर्यटन और व्यापार को भी गति प्रदान कर रहा है, क्योंकि मेले के कारण बाजारों में भी काफी रौनक देखी जा रही है।
निष्कर्ष: कला और भक्ति का अनूठा संगम
देर रात तक चले इस कार्यक्रम ने बाड़ीवासियों को एक यादगार शाम दी। प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्था और कलाकारों के उत्साह ने महोत्सव को सफल बनाया है। आने वाले दिनों में और भी बड़े कलाकारों के बाड़ी पहुँचने की संभावना है, जिससे उत्साह का यह ग्राफ और ऊपर जाएगा।
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