बाड़ी अग्रवाल धर्मशाला में भक्ति की अविरल धारा
बाड़ी (धौलपुर)। अग्रवाल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का रविवार को अत्यंत श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ समापन हो गया। पिछले सात दिनों से बह रही भक्ति की अविरल धारा ने पूरे बाड़ी शहर को धर्ममय बना दिया। समापन के अवसर पर उमड़ी भक्तों की भीषण (Sentiment Word – भीड़ के संदर्भ में) भीड़ ने यह साबित कर दिया कि आज भी सनातनी परंपराओं के प्रति लोगों में अटूट श्रद्धा है।
सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष: दिव्य अमृत वर्षा
कथा के अंतिम दिन आचार्य महामंडलेश्वर संत दिव्य मुरारी बापू ने भगवान श्री कृष्ण और उनके परम मित्र सुदामा के चरित्र का शानदार (Sentiment Word) वर्णन किया। जब बापू ने सुदामा की दरिद्रता और कृष्ण द्वारा अपने मित्र के पैर धोने का प्रसंग सुनाया, तो पंडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालु भावुक (Sentiment Word) हो उठे। इसके पश्चात राजा परीक्षित के मोक्ष की कथा सुनाते हुए बापू ने बताया कि श्रीमद् भागवत के श्रवण मात्र से मनुष्य के जन्म-मरण के बंधन कट जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
खाटू श्याम बाबा का ‘शानदार’ दरबार और भजन संध्या
कथा की समाप्ति के उपरांत रविवार रात्रि को खाटू श्याम बाबा का भव्य दरबार सजाया गया। बाहर से आए प्रसिद्ध भजन गायकों ने अपनी सुरीली आवाज में बाबा के भजनों की ऐसी खौफनाक (Sentiment Word – प्रचंड उत्साह के संदर्भ में) प्रस्तुति दी कि श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे। ‘हारे का सहारा, बाबा श्याम हमारा’ के जयकारों से पूरा पंडाल गूंज उठा। इत्र वर्षा और पुष्प वर्षा के बीच बाबा का दरबार किसी सुखद स्वर्ग से कम नहीं लग रहा था।
परीक्षित के रूप में शिवकुमार गर्ग का सराहनीय योगदान
इस ज्ञान यज्ञ के मुख्य यजमान समाजसेवी शिवकुमार गर्ग और उनकी पत्नी सुमनलता रहे, जिन्होंने परीक्षित के रूप में पूरे सात दिन तक संयम और श्रद्धा के साथ कथा का श्रवण किया। उनके इस शानदार सेवा भाव की संतों और समाज के गणमान्य नागरिकों ने खूब सराहना की। कार्यक्रम में दुर्गा प्रसाद गर्ग, रामनाथ गर्ग, महेश चंद्र गर्ग, हरिओम गर्ग, भगवती चेयरमैन और रामावतार शर्मा सहित कई प्रबुद्ध जन उपस्थित रहे।
7 दिनों तक चला ज्ञान यज्ञ: 30 मार्च से 5 अप्रैल तक
श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ 30 मार्च को कलश यात्रा के साथ हुआ था। इन सात दिनों में गोवर्धन पूजा, कृष्ण जन्म और रुक्मिणी विवाह जैसे प्रसंगों का सजीव मंचन किया गया। बाड़ी के धर्मप्रेमियों का सहयोग इस कदर भीषण रहा कि धर्मशाला का विशाल प्रांगण हर दिन छोटा पड़ता नजर आया। कथा के दौरान संकीर्तन और झांकियों ने भी भक्तों का मन मोह लिया।
आज 6 अप्रैल: पूर्णाहुति हवन और विशाल ब्रह्मभोज
यज्ञ की पूर्णाहुति आज 6 अप्रैल सोमवार को विधि-विधान के साथ की जाएगी। सुबह 9 बजे से हवन यज्ञ शुरू होगा, जिसमें सभी यजमान आहुतियां देंगे। इसके पश्चात विशाल ब्रह्मभोज और प्रसादी का वितरण किया जाएगा। कथा समिति ने सभी श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे प्रसादी ग्रहण कर बाबा का आशीर्वाद प्राप्त करें। भक्तों के लिए यह क्षण दर्दनाक (Sentiment Word – बिछड़ने/समापन के संदर्भ में) भी है क्योंकि सात दिनों का यह सत्संग अब संपन्न हो रहा है।
निष्कर्ष: भक्ति और समर्पण का अनूठा संगम
बाड़ी की इस भागवत कथा ने सिद्ध कर दिया है कि अध्यात्म ही शांति का सच्चा मार्ग है। आचार्य दिव्य मुरारी बापू के मुखारविंद से निकली वाणी ने लोगों के जीवन में सकारात्मकता का संचार किया है। DLP News TV की ओर से सभी आयोजकों और श्रद्धालुओं को इस सफल आयोजन की हार्दिक बधाई।
ताज़ा खबरों के लिए हमारे साथ बने रहें:
DLP News TV